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कोरोनावायरस के समय में क्या करें, क्या न करें गर्भवती महिलाएं?

 अब तक कोविड-19 के आंकड़े गर्भवती महिलाओं को इस वायरस से ज्यादा खतरा होने की तरफ इशारा नहीं करते 

On: Wednesday 01 April 2020
 
Credit: Needpix
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हेक्टर चापा

“एक महामारी के दौरान में गर्भवती होना और बच्चे को जन्म देना... आखिर यह कैसे होगा?”

एक सहकर्मी, जो एक होने वाली मां और एक पंजीकृत नर्स भी हैं, उनके भेजे इस सवाल ने मुझे सोचने पर मजबूर कर दिया। ओबी-गाइन चिकित्सक के तौर पर मेरा ध्यान स्वाभाविक रूप से हेल्थ केयर साइंस पर रहता है। उनके ईमेल ने मुझे इस कोरोनोवायरस महामारी के बीच गर्भवती माताओं के आसपास स्वास्थ्य समस्याएं और स्वास्थ्य सेवा प्रणाली में आ रहे बदलाव की वजह से उनके सामने उठ खड़ी हुईं अनिश्चितताओं से रूबरू करवाया।

हालांकि कोविड-19 के बारे में तेजी से जानकारियां बढ़ रही हैं, फिर भी कई चीजों के बारे में कोई जानकारी नहीं है। स्वास्थ्य समूहों और अध्ययनों ने अब सलाह और प्रतीक्षारत परिवारों द्वारा पूछे जा रहे सवालों के जवाब देने शुरू कर दिए हैं

क्या गर्भवती महिलाओं को अधिक खतरा है?

अमेरिकन कॉलेज ऑफ ऑब्स्टेट्रिशियन एंड गायनेकोलॉजिस्ट्स के अनुसार अब तक कोविड-19 के आंकड़े गर्भवती महिलाओं को इस वायरस से ज्यादा खतरा होने की तरफ इशारा नहीं करते हैं। हालांकि, हमने फ्लू की स्थिति में देखा है कि अगर उन्हें श्वसन संक्रमण हो जाता है तो उनको नुकसान का अधिक खतरा होता है। गर्भावस्था के कारण शरीर में कई तरह के बदलाव होते हैं और कुछ हद तक इम्युनोकॉम्प्रोमाइज्ड अवस्था बन जाती है, जिससे संक्रमण हो सकता है जो अधिक चोट और क्षति में तब्दील हो सकती है।

क्या कोरोनोवायरस गर्भपात या अपरिपक्व प्रसूति का अधिक खतरा पैदा करता है?

गर्भावस्था के दौरान कोविड-19 होने पर गर्भपात होने की संभावना बढ़ती है या नहीं, इस बात को साबित करने के लिए अभी तक कोई अध्ययन नहीं किया गया है। हालांकि, कई अन्य बीमारियों के के दौरान ऐसा होने के प्रमाण उपलब्ध हैं। 2002-2003 में सार्स कोरोनावायरस महामारी के दौरान संक्रमित महिलाओं में गर्भपात का जोखिम थोड़ा अधिक पाया गया था, लेकिन ये केवल उनमें था, जो गंभीर रूप से बीमार थीं।

गर्भावस्था के दौरान फ्लू जैसे श्वसन संबंधी वायरल संक्रमण को जन्म के समय कम वजन और अपरिपक्व प्रसव जैसी समस्याओं से जोड़कर देखा जाता रहा है। इसके अलावा गर्भावस्था की शुरुआत में तेज बुखार होने से कुछ जन्मजात दोषों का खतरा बढ़ सकता है, हालांकि, व्यापक स्तर पर इस तरह के दोषों की आवृति अभी कम ही है।

क्या कोविड-19 से संक्रमित मां से उसके बच्चे को गर्भ में ही वायरस का संक्रमण हो सकता है?

ये आंकड़े तेजी से बढ़ रहे हैं। 26 मार्च को प्रकाशित दो पत्रों ने कोविड-19 से संक्रमित माताओं के 3 नवजात शिशुओं में कोरोनावायरस के एंटीबॉडीज का पता लगने के बारे में लिखा है। इस लिहाज से ये कहा जा सकता है कि वे गर्भ में ही इस वायरस के संपर्क में आ गए थे। हालांकि, ये वायरस उनके गर्भनाल रक्त में नहीं पाया गया और शोधकर्ताओं ने इस्तेमाल किए गए परीक्षण के प्रकार पर सवाल उठाए। पहले के एक अध्ययन में शोधकर्ताओं ने संक्रमित महिलाओं से पैदा हुए 6 अन्य शिशुओं के एमनियोटिक द्रव या नाल रक्त में कोविड-19 का कोई सबूत नहीं पाया। ऐसे में जब शोधपत्रों में केवल कुछ ही मामले शामिल रहते हैं, गर्भाशय में मां से बच्चे तक ऊर्ध्वाधर संचरण की कमी को गर्भावस्था में इन्फ्लुएजा जैसे अन्य सामान्य श्वसन वायरल बीमारियों के अनुरूप माना जाएगा।

एक-दो दिन के नवजात शिशुओं में भी संक्रमण की कुछ रिपोर्टें मिली हैं। लेकिन उन मामलों में यह माना जा रहा है कि प्रसव के बाद माता या परिवार के किसी सदस्य के निकट संपर्क के माध्यम से शिशु में संक्रमण पहुंचा। इस वायरस को एक खांसी या छींक के माध्यम से प्रेषित किया जा सकता है, जिससे नवजात पर वायरस से भरी बूंदें फैल सकती हैं।

प्रसवपूर्व जांच में किस तरह का बदलाव आ रहा है?

मरीजों, देखभाल करने वालों और चिकित्सा कर्मचारियों के बीच कोविड-19 के प्रसार को नियंत्रित करने के लिए प्रसव पूर्व देखभाल कुछ समय के लिए अलग सी लग सकती है। आमतौर पर, एक गर्भवती महिला को प्रसवपूर्व लगभग 14 बार हॉस्पिटल आना पड़ता है। इसे टेलीमेडिसिन के व्यापक इस्तेमाल से लगभग आधा किया जा सकता है। ग्रामीण परिवेश में रह रहे रोगियों के लिए टेलीमेडिसिन को पहले से ही अमेरिकन कॉलेज ऑफ ओब्स्टेट्रिशियन और स्त्री रोग विशेषज्ञों का समर्थन प्राप्त है। अब, महामारी की वजह से आभासी सेवा समाधानों की अनिवार्यता बढ़ रही है। गर्भवती महिलाएं उच्च रक्तचाप, मधुमेह और संकुचन जैसी अवस्थाओं की टेलीमेडिसिन द्वारा घर पर ही निगरानी करने में सक्षम हैं और इसका इस्तेमाल एंडोक्रिनोलॉजिस्ट और आनुवंशिक परामर्शदाता जैसे गर्भावस्था सलाहकार भी कर सकते हैं।

सोनोग्राम के लिए मिलने की आवृत्ति भी बदल सकती है। सोसाइटी ऑफ मैटरनल फेटल मेडिसिन का कहना है कि गर्भावस्था के दौरान स्वास्थ्य और सुरक्षा को खतरे में डाले बिना इस समय "नियमित" अल्ट्रासाउंड की आवृति को कम करना सुरक्षित है। बेशक, कुछ खास तरह के मरीजों, जैसे कि जुड़वां बच्चे या संदिग्ध जन्मजात दोष वाले शिशु को अधिक पारंपरिक जांच की आवश्यकता हो सकती है।

प्रसव के दौरान मुझे कैसी उम्मीदें रखनी चाहिए?

व्यक्ति से व्यक्ति में संचरण को कम करने के लिए अस्पताल जो कर सकते हैं वो कर रहे हैं। इसा यह भी मतलब है कि प्रसव को भी अलग तरह से देखा जा रहा है। कुछ अस्पताल शिफ्ट की शुरुआत में सभी मेडिकल स्टाफ की तापमान की जांच सहित मुआयना कर रहे हैं।

आगंतुकों को भी रोका जा रहा है। हाल ही में न्यूयॉर्क के एक अस्पताल ने कोरोनोवायरस से संबंधित जोखिम का हवाला देते हुए जन्म देने वाली मरीजों के लिए नो-विजिटर नीति लगा दी, जो उनके साथियों पर भी लागू होती है। यह निश्चित रूप से वैसा नहीं हैं जैसा गर्भवती महिलाओं ने अपने प्रसव के लिए सोचा होगा, लेकिन इस व्यापक संचारी रोग के समय में ये ही वास्तविकता है।

अगर मैं कोविड-19 हूं, तो क्या मुझे सिजेरियन डिलिवरी कराने की जरूरत पड़ेगी?

नहीं, कोविड-19 संक्रमित होने की वजह से सिजेरियन डिलिवरी की कोई जरूरत नहीं पड़ती है। जब बात कोविड-19 की आती है, तो इस बात का कोई सबूत नहीं मिलता है कि सामान्य प्रसव या फिर सिजेरियन में से कौन-सा तरीका ज्यादा सुरक्षित है। हालांकि, अभी भी सीमित आंकड़े ही उपलब्ध हैं, लेकिन सामान्य प्रसव के दौरान नवजात को अन्य प्रकार के कोरोनो वायरस संक्रमण होने की बात सामने नहीं आई है।

अमेरिकन कॉलेज ऑफ ऑब्स्टेट्रिशियन एंड गायनेकोलॉजिस्ट्स और सोसायटी ऑफ मैटरनल फेटल मेडिसिन, दोनों का मानना है कि ज्यादातर मामलों में प्रसव के समय को मां के COVID-19 परीक्षण के आधार पर नहीं तय किया जाना चाहिए। गर्भावस्था की शुरुआत में संक्रमित हो चुकीं महिलाएं, जो ठीक हो चुकी हैं, उन्हें अपने प्रसव शेड्यूल में कोई बदलाव नहीं लाना चाहिए। वहीं, अगर कोई दूसरा चिकित्सकी कारण न हो तो गर्भावस्था में बाद में संक्रमित महिलाओं को तब तक के लिए प्रसव को स्थगित करने का प्रयास करना चाहिए, जब तक उनका कोविड-19 टेस्ट निगेटिव नहीं आ जाता है।

बच्चे को जन्म देने के बाद मैं मुझे कितने समय के लिए अस्पताल में रहना पड़ेगा? और अगर मैं कोविड -19 से संक्रमित हूं, तब क्या होगा?

अस्पताल से जल्द से छुट्टी मिल जाने की उम्मीद है। एसीओजी का कहना है कि सामान्य प्रसव के बाद 24 से 48 घंटे की जगह 12 से 24 घंटे के भीतर अस्पताल से डिस्चार्ज करने पर विचार किया जा सकता है, ताकि अनजाने जोखिम और संक्रमण के खतरे को कम किया जा सके। वहीं, सिजेरियन मामलों में महिला के स्वास्थ्य के आधार पर प्रसव के 2 दिन बाद अस्पताल से छुट्टी दी जा सकती है।

कोविड-19 से संक्रमित मांओं के लिए सेंटर्स फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेन्शन ने सलाह दी है कि उनके शिशुओं को उनसे अलग रखा जाए, जिसे एक आदर्श बात नहीं समझा जाता है। इसका मतलब यह हो सकता है कि मां और शिशु को कम से कम छह फीट की दूरी पर रखकर दोनों के बीच एक पर्दा खींचा जाए। सीडीसी यह सुझाव भी देता है कि मां का बुखार जाने के 72 घंटे बाद तक बच्चे को उससे दूर रखा जाना चाहिए। अगर कमरे में बच्चे की देखभाल के लिए कोई दूसरा स्वस्थ व्यक्ति मौजूद नहीं है और मां कोरोना से संक्रमण की संदिग्ध है या फिर जांच में वह पॉजिटिव पाई गई है, तब ऐसी स्थिति में उसे बच्चे को दूध पिलाने और उसके पास जाने से पहले हर बार चेहरे पर मास्क लगाना चाहिए और हाथों की सफाई का ध्यान रखना चाहिए।

इस समय क्या घर में प्रसव अस्पताल से ज्यादा सुरक्षित है?

अगर कोई महिला अपने बच्चे को जन्म देने के लिए अस्पताल या बर्थिंग सेंटर चुनती है, तो उसकी देखरेख के लिए वहां स्वास्थ्य देखभाल प्रदाताओं की एक समर्पित टीम होगी, जो उसे और उसके बच्चे को कोविड-19 से बचाने के लिए प्रशिक्षित होगी और किसी भी तरह की अप्रत्याशित जटिलताओं को संभाल सकेगी। घर पर आगंतुकों के आने-जाने पर उतनी रोकटोक नहीं होती है, जिससे एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति के संपर्क के जरिए कोविड-19 के संक्रमण का खतरा भी ज्यादा होता है। इस लिहाज से घर पर प्रसव उतना सुरक्षित नहीं है। हालांकि, एसीओजी ने इस जोखिम पर कोई विशेष बयान नहीं जारी किया है। लेकिन, यूनाइटेड किंगडम के रॉयल कॉलेज ऑफ ऑब्सटेट्रिशियन और गायनेकोलॉजिस्ट ने कोविड-19 के संपर्क में आ चुकीं महिलाओं का प्रसव घर पर कराने के खिलाफ बयान दिए हैं।

COVID-19 संक्रमित होने के बावजूद क्या मैं अपने बच्चे को स्तनपान करा सकती हूं?

अब तक ऐसे जितने मामले सामने आए हैं, उनके मुताबिक COVID-19 से संक्रमित महिलाओं के स्तन के दूध में वायरस होने के कोई सबूत नहीं मिले हैं। हालांकि, इसके बाद भी सावधानियां बरतने की सिफारिश की जाती है। स्तनपान को प्रोत्साहित किया जाता है, क्योंकि यह शिशु के लिए एंटीबॉडी संरक्षण का एक संभावित महत्वपूर्ण स्रोत है। सीडीसी की सिफारिश है कि अस्थायी अलगाव के दौरान वे महिलाएं जो अपने बच्चे को स्तनपान कराना चाहती हैं, उन्हें पंप के जरिए दूध निकालकर बच्चे तक पहुंचाने के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। इस दौरान पंप या बोतल के किसी भी हिस्से को छूने से पहले मां को अपने हाथ धोने चाहिए। इसके साथ ही यह सिफारिश भी की जाती है कि अगर कोई और स्वस्थ महिला मौजूद हो तो संभव होने पर वह बच्चे को दूध पिलाए।

बच्चे का जन्म होना एक ऐसा महत्वपूर्ण अवसर है, जिसका जश्न महामारी के दौरान भी मनाया जाना चाहिए। इसमें आप खुद को स्वस्थ रखते हुए अपना योगदान दें। अपने हाथों को धोएं, सामाजिक दूरी बनाए रखें और गर्भावस्था के दौरान अपने स्वास्थ्य देखभाल प्रदाताओं के साथ संपर्क में रहें। हो सकता है कि आपने इसकी कल्पना नहीं की हो, लेकिन आपके पास अपने बच्चों को सुनाने के लिए काफी कहानियां होंगी।

(यह लेख द कन्वरसेशन से विशेष अनुबंध के तहत प्रकाशित)