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क्या जंगल के कटने से फैलता है मलेरिया?

अध्ययनकर्ताओं ने पाया कि पहले 2 वर्षों में वनों की कटाई की गतिविधियों के बाद, इलाके के गांवों में मलेरिया के संक्रमण में वृद्धि हुई, लेकिन बाद के वर्षों में इसमें कमी आई।

By Dayanidhi

On: Wednesday 10 March 2021
 
Deforestation impacts on rates of malaria infection: study
Photo : Wikimedia Commons Photo : Wikimedia Commons

एक नए अध्ययन में कहा गया है कि जंगलों की कटाई से दक्षिणपूर्व एशिया में मलेरिया संक्रमण में शुरुआत में वृद्धि हो सकती है, लेकिन आगे चलकर इसमें कमी आ सकती है।

इस अध्ययन का उद्देश्य मलेरिया संक्रमण से खुद को बचाने तथा संक्रमण को खत्म करने लिए लोगों को शिक्षित करना है। क्षेत्र में मलेरिया की रोक-थाम संबंधी कार्यक्रमों के लिए बेहतर रणनीति विकसित करने में मदद करना है।

मच्छरों द्वारा मनुष्यों में मलेरिया परजीवी फैलाने के चलते संक्रमण पैदा होता है जो गंभीर और कभी-कभी घातक हो सकता है। दक्षिण पूर्व एशिया में मेकांग नदी के किनारे के क्षेत्र में, कई निवासी आसपास के जंगलों में शिकार करते हैं और लकड़ी काटते हैं, जिससे उनमें संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है। क्षेत्र में हाल ही में हुए मलेरिया के प्रकोपों को वनों की कटाई से भी जोड़ा गया है।

कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी ऑफ सैन फ्रांसिस्को (यूसीएसएफ) में स्नातक छात्र फ्रेंकोइस रेरोल कहते हैं कि देश अपने क्षेत्र में मलेरिया नियंत्रण और जंगलों के द्वारा इसके फैलने को कम करने का प्रयास करते हैं। मलेरिया की दरों पर वनों की कटाई के प्रभाव को समझना आवश्यक है।

मलेरिया संचरण पर वनों की कटाई के प्रभावों को बेहतर ढंग से समझने के लिए, रेरोल और उनके सहयोगियों ने ग्रेटर मेकांग के भीतर दो इलाकों में 2013 से 2016 तक वन कवर के आंकड़े और ग्राम-स्तरीय मलेरिया के आंकड़े दोनों की जांच की।

उन्होंने पाया कि पहले 2 वर्षों में वनों की कटाई की गतिविधियों के बाद, इलाके के गांवों में मलेरिया के संक्रमण में वृद्धि हुई, लेकिन बाद के वर्षों में इसमें कमी आई। यह प्रवृत्ति ज्यादातर मलेरिया परजीवी प्लास्मोडियम फाल्सीपेरम के संक्रमण से प्रेरित थी।

आसपास के गांवों में लगभग 1-10 किलोमीटर के दायरे में वनों की कटाई से मलेरिया की दर प्रभावित नहीं हुई, लेकिन गांवों के आसपास के 30 किलोमीटर के दायरे में मलेरिया की दर बढ़ गई। यह अध्ययन ईलाइफ नामक पत्रिका में प्रकाशित हुआ है।

अध्ययनकर्ता का कहना है कि वनों की कटाई का मानव व्यवहार पर प्रभाव पड़ सकता है। हमें संदेह है कि जंगल में लंबी दूरी तय करने वाले लोगों का मच्छरों से अधिक संपर्क हुआ हो जिसके परिणामस्वरूप मलेरिया के संक्रमण में वृद्धि हुई हो। इस तरह ये वनों की रक्षा करने वालों को भी खतरे में डालते हैं।

इससे पहले, दक्षिण अमेरिका में अमेज़ॅन पर किए गए अध्ययन में वनों की कटाई के बाद पहले 6-8 वर्षों में मलेरिया संक्रमण में वृद्धि देखी गई थी, बाद में मलेरिया की दर में गिरावट आई। यह समय और क्षेत्रीय अंतर के कारण हो सकता है।

अमेज़ॅन में पिछले अध्ययनों में बाहरी लोगों द्वारा जंगल के अंदर वनों की कटाई की गई, जबकि वर्तमान अध्ययन में समुदाय लंबे समय से जंगल के किनारों पर रह रहे हैं और अपने निर्वाह के लिए कृषि पर भरोसा करते हैं।

यूसीएसएफ मलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम की अगुवाई करने वाले एडम बेनेट कहते हैं कि हमारे अध्ययन से पता चलता है कि मलेरिया संक्रमण पर वनों की कटाई का प्रभाव पड़ता है। यह अध्ययन मलेरिया रोग उन्मूलन के लिए रणनीतियां बनाने में सहायता कर सकता है।