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27 साल में 92 फीसदी बढ़े हार्ट फेल के मामले, दूसरे नंबर पर भारत

1990 से 2017 के बीच हार्ट फेलियर के मरीजों की संख्या में जो वृद्धि हुई है उसमें से करीब 29.9 फीसदी चीन और 16.6 फीसदी भारत के थे

By Lalit Maurya

On: Tuesday 16 February 2021
 

दुनिया भर में हार्ट फेल के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। 1990 से 2017 के बीच इनमें करीब 91.9 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई है। शोध के अनुसार वैश्विक स्तर पर 1990 में जहां 3.35 करोड़ मरीजों में हार्ट फेल के मामले पाए गए, यह संख्या 2017 में बढ़कर 6.43 करोड़ पर पहुंच गई। इनमें से 2.95 करोड़ मामले पुरुषों में और 3.48 करोड़ मामले महिलाओं में सामने आए थे।

यदि पिछले 27 वर्षों के आंकड़ों को देखें तो उनके अनुसार हार्ट फेल के मरीजों की संख्या में सबसे ज्यादा वृद्धि भारत और चीन में हुई है। इस अवधि में हार्ट फेल के मरीजों की संख्या में जो वृद्धि हुई है, उसमें से करीब 29.9 फीसदी चीन और 16.6 फीसदी भारत के थे। जिसका मतलब है कि अकेले भारत और चीन में विश्व के 46.5 फीसदी नए मामले सामने आए हैं। यह स्पष्ट तौर पर इस बात को दर्शाता है कि एशिया में यह समस्या तेजी से अपने पैर पसार रही है।

शोधकर्ता इसके लिए बढ़ती आबादी, धूम्रपान, वायु प्रदूषण और स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाने वाले व्यवहार को जिम्मेवार मान रहे हैं। यह जानकारी यूरोपियन जर्नल ऑफ प्रिवेंटिव कार्डियोलॉजी में प्रकाशित शोध में सामने आई है। यह शोध ग्लोबल बर्डन ऑफ डिजीज स्टडी के आंकड़ों पर आधारित है, जिसमें 1990 से 2017 के बीच 195 देशों में हार्ट फेलियर के मामलों का विश्लेषण किया गया है।

इस शोध के प्रमुख शोधकर्ता और यॉर्क यूनिवर्सिटी से जुड़े निकोला ब्रागाज़ी के अनुसार "हमारे शोध ने इस आम राय को चुनौती दी है कि हृदय रोग पूरी तरह से नियंत्रण में है। इस दिशा में हो रही तरक्की और उपलब्धियों के बावजूद दुनिया भर में हार्ट फेलियर की समस्या बढ़ रही है।"

शोध से पता चला है कि दुनिया के कई क्षेत्रों में हार्ट फेलियर के मामलों में भारी अंतर है। आयु के आधार पर  देखें तो 1990 से 2017 के बीच उच्च एसडीआई वाले देशों में इसके प्रसार में 20.3 फीसदी की कमी आई है। वहीं इसके विपरीत निम्न से मध्य एसडीआई वाले देशों में इसके प्रसार में वृद्धि देखी गई है। इस आधार पर देखें तो दुनिया भर में इसके प्रसार में करीब 7.2 फीसदी की कमी दर्ज की गई है।

अध्ययन से पता चला है कि 1990 के बाद से हार्ट फेलियर के कारण विकलांगता में जीवन गुजार रहे मरीजों की संख्या करीब दोगुनी हो गई है, जबकि उम्र के आधार पर इसके प्रसार की दर में स्थिरता बनी हुई है। अध्ययन के अनुसार हार्ट फेलियर के जो लक्षण होते हैं उससे रोगी में दुर्बलता आ सकती है। सांस की कमी, थकान और शरीर में तरल की अधिकता मरीजों की खड़े होने, पैदल चलने, काम करने या खुद की देखभाल करने की क्षमता पर असर डाल सकती है। 

क्या होता है हार्ट फेल होना

हार्ट फेल होना उस स्थिति को कहते हैं जब ह्रदय अपना काम ठीक से नहीं कर पाता, जिसका मतलब है कि ह्रदय शरीर के अन्य अंगो तक पर्याप्त मात्रा में रक्त नहीं पहुंचा पाता है। इस स्थिति में हार्ट की रक्त पंप करने की गति कम हो जाती है। इसके अलावा जब किसी व्यक्ति की मांसपेशियां बहुत अधिक सख्त हो जाती हैं, तो रक्त का प्रवाह बाधित हो जाता है। इससे भी हार्ट फेल होने की स्थिति बनती है।