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एक दूसरे से अलग हैं दुनिया के 60 शहरों में पाए गए सूक्ष्मजीव: अध्ययन

शोधकर्ताओं ने 10,928 नए वायरस और 748 नए बैक्टीरिया की खोज की, जो अभी तक इनसे संबंधित किसी भी डेटाबेस में मौजूद नहीं हैं।

By Dayanidhi

On: Thursday 27 May 2021
 
दुनिया के 60 शहरों में पाए गए सूक्ष्मजीव एक दूसरे से अलग हैं: अध्ययन
Photo : Wikimedia Commons Photo : Wikimedia Commons

एक अंतरराष्ट्रीय संघ ने शहरी माइक्रोबायोम के अब तक के सबसे बड़े वैश्विक अध्ययन के बारे में खुलासा किया है, जो कई शहरों की हवा और सतह दोनों में फैले हुए हैं। माइक्रोबायोम किसी विशेष वातावरण में पाए जाने वाले सूक्ष्मजीव हैं। अंतरराष्ट्रीय परियोजना के तहत दुनिया भर के 60 शहरों के सार्वजनिक परिवहन प्रणालियों और अस्पतालों से एकत्र किए गए नमूनों का अनुक्रम और विश्लेषण किया गया है।

अध्ययन पहचाने गए सभी सूक्ष्मजीवों (माइक्रोबियल) की प्रजातियों का विश्लेषण और पूरी जानकारी प्रदान करता है। इसमें हजारों वायरस और बैक्टीरिया तथा दो आर्किया अथवा आर्कबैक्टीरिया शामिल हैं जो इनसे संबंधित डेटाबेस में नहीं पाए गए हैं। अध्ययन जर्नल सेल में प्रकाशित हुआ है।

वेइल कॉर्नेल मेडिसिन (डब्ल्यूसीएम) के प्रोफेसर क्रिस्टोफर मेसन कहते हैं कि हर शहर में रोगाणुओं की अपनी एक विशिष्ट पहचान होती है जो इसके बारे में जानकारी प्रदान करती है। मेसन ने कहा हम आपके जूते से आपके बारे में पता लगा सकते हैं, कि आप दुनिया के किस शहर से है, उसके बारे में 90 फीसदी सटीकता से बता सकते हैं।

निष्कर्ष तीन वर्षों के दौरान छह महाद्वीपों के शहरों से 4,728 नमूनों पर आधारित है, जो क्षेत्रीय रोगाणुरोधी प्रतिरोध की विशेषता रखते हैं। यह शहरी माइक्रोबियल पारिस्थितिकी तंत्र की पहली व्यवस्थित विश्वव्यापी सूची का प्रतिनिधित्व करते हैं। विभिन्न शहरों में अलग-अलग तरह के सूक्ष्मजीव (माइक्रोबियल) पाए गए है।

विश्लेषण से 31 प्रजातियों का एक मुख्य समूह सामने आया है इनमें शहरी क्षेत्रों के 97 फीसदी नमूने में यह पाए गए हैं। शोधकर्ताओं ने शहरी सूक्ष्मजीवों की 4,246 ज्ञात प्रजातियों की पहचान की, लेकिन उन्होंने यह भी पाया कि किसी भी बाद के नमूने में अभी भी ऐसी प्रजातियां मिलती रहेंगी जो पहले कभी नहीं देखी गई हैं। शहरी वातावरण में पाए जाने वाले सूक्ष्मजीवों (माइक्रोबियल) की विविधता और जैविक कार्यों से संबंधित खोजों की क्षमता पर प्रकाश डालती हैं।

अध्ययनकर्ताओं ने बताया कि यह परियोजना 2013 में शुरू हुई थी, जब मेसन ने न्यूयॉर्क सिटी मेट्रो सिस्टम में सूक्ष्मजीवों के नमूने एकत्र करना और उनका विश्लेषण करना शुरू किया था। अपने पहले निष्कर्ष प्रकाशित करने के बाद, दुनिया भर के शोधकर्ताओं ने उनसे संपर्क किया जो अपने शहरों में इसी तरह के अध्ययन करना चाहते थे।

उन्होंने नमूने एकत्र करने के लिए एक मसौदा विकसित किया और यूट्यूब पर दिशा-निर्देश को लेकर एक वीडियो डाला। नमूने डीएनए और आरएनए-मुक्त स्वैब के साथ एकत्र किए गए थे। इसके बाद इन्हें विश्लेषण के लिए डब्ल्यूसीएम की एक प्रयोगशाला में भेजा गया था।

अनुक्रमों का अधिकांश विश्लेषण और इससे जुड़ी हुई चीजों को पिट्सबर्ग में एक एक्सट्रीम साइंस एंड इंजीनियरिंग डिस्कवरी एनवायरनमेंट (एक्सएसईडीई) सुपरकंप्यूटर पर किया जाता है। जिससे 10,928 वायरस और 748 बैक्टीरिया की खोज हुई जो अभी तक इनसे संबंधित किसी भी डेटाबेस में मौजूद नहीं हैं।

2015 में मेसन ने अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर शहरी बायोम के लिए मेटाडिजाइन तैयार किया, जो तब से कठोर सतहों के अलावा हवा, पानी और सीवेज से नमूने एकत्र कर सकती है। समूह हर साल 21 जून को आयोजित ग्लोबल सिटी सैंपलिंग डे (जीसीएसडी) जैसी परियोजनाओं की देखरेख करता है।

2016 से पहले और बाद में रियो डी जनेरियो के शहर की सतहों और इसके मच्छरों के व्यापक सूक्ष्मजीव विश्लेषण सहित व्यापक अध्ययन किया है। 2020 में शुरू की गई एक अन्य परियोजना, घरेलू बिल्लियों में सार्स-सीओवी-2 और अन्य कोरोना वायरस के प्रसार की जांच पर केंद्रित है और 2021 टोक्यो ओलंपिक के लिए भी एक परियोजना की योजना बनाई गई है।

नए शोध में जिन संक्रमणों के बारे में पता है तथा जिनके बारे में पता नहीं है, उनके प्रकोप का पता लगाने और विभिन्न शहरी वातावरणों में एंटीबायोटिक प्रतिरोधी रोगाणुओं के प्रसार का अध्ययन किया जा रहा हैं। यह सूक्ष्मजीवों के विकास के बारे में नई खोजों में भी योगदान दे सकता है।

स्विट्जरलैंड में मेटाएसयूबी शोधकर्ताओं आंद्रे काहल्स और गुन्नार रैश ने एक खोज योग्य, वैश्विक डीएनए अनुक्रम पोर्टल भी जारी किया है। जो सभी ज्ञात आनुवंशिक अनुक्रमों (मेटाएसयूबी डेटा सहित) को अनुक्रमित करता है, जो किसी का भी खाका तैयार कर सकता है। ज्ञात या नए खोजे गए आनुवंशिक तत्व पृथ्वी पर उनके स्थान के लिए और नए सूक्ष्मजीवों के परस्पर प्रभाव और इनके कार्यों की खोज में सहायता कर सकते हैं।

मेसन कहते हैं कि पृथ्वी पर लाखों प्रजातियां हैं, लेकिन हमारे पास केवल 1 से 2 लाख पूर्ण जीनोम हैं। यह बताते हुए कि नई प्रजातियों की खोज सूक्ष्मजीवों के परिवार की संरचना निर्माण में मदद कर सकती है, यह देखने के लिए कि यह कैसे अलग है या प्रजातियां एक दूसरे से संबंधित हैं।

मेसन ने कहा कि अब तक हमने जो आंकड़े एकत्र किए है, उसके आधार पर, हमें पहले ही 8 लाख से अधिक नए सीआरआईएसपीआर संरचना मिल चुकी हैं। इसके अतिरिक्त, निष्कर्ष बायोसिंथेटिक जीन क्लस्टर (बीजीसी) से निकाले गए नए एंटीबायोटिक और छोटे अणुओं की उपस्थिति की ओर इशारा करते हैं जो दवा विकास के लिए अहम हैं।

सीआरआईएसपीआर का मतलब क्लस्टर्ड रेगुलर इंटरस्पेस शॉर्ट पैलिंड्रोमिक रिपीट है, अर्थात दोहराए जाने वाले डीएनए अनुक्रम, जिन्हें सीआरआईएसपीआर कहा जाता है।