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वैज्ञानिकों ने बनाया नया उपकरण, सटीकता से लगा सकता है मुंह के कैंसर का पता

ओरलस्कैन नामक यह इमेजिंग डिवाइस इतना छोटा है कि इसे हाथ में पकड़कर कैंसर की स्क्रीनिंग और डिटेक्शन की जा सकती है

By Lalit Maurya

On: Wednesday 28 October 2020
 

वैज्ञानिकों ने एक नया उपकरण बनाया है, जो सटीकता के साथ मुंह के कैंसर का पता लगा सकता है| यह उपकरण केरल के तिरुवनंतपुरम में श्री चिरा तिरुनल इंस्टीट्यूट फॉर मेडिकल साइंसेज एंड टेक्नोलॉजी द्वारा बनाया गया है| यह बड़ी सटीकता से कैंसर का पता लगा सकता है| यह उपकरण इतना छोटा है कि इसे हाथ में पकड़कर उपयोग किया जा सकता है| इंस्टीट्यूट ने इस डिवाइस को ओरलस्कैन नाम दिया है| यह एक तरह का इमेजिंग डिवाइस है, जिसकी मदद से कैंसर की स्क्रीनिंग और डिटेक्शन किया जा सकता है|

इस डिवाइस की मदद से सर्जन सबसे उपयुक्त साइट से बायोप्सी कर सकते हैं| जिसके कारण कैंसर का सटीकता से पता लगाया जा सकता है| इस वजह से कई बार बायोप्सी नहीं पड़ती| साथ ही इससे रिपोर्ट में होने वाली गड़बड़ी भी दूर हो जाती है|

कंपनी ने इस डिवाइस की कीमत 5.9 लाख रुपए रखी है| हालांकि यह कीमत देखने में कुछ ज्यादा लग सकती है, लेकिन चूंकि यह एक बार किया जाने वाला खर्च है जिसमें फिर अलग से खर्च करने की जरुरत नहीं रहती| इस तरह यह अस्पताल और प्रयोगशालाओं के लिए एक बार का निवेश है, जिसे लम्बे समय तक काम में लाया जा सकता है| इस उपकरण पर देश के छह अलग-अलग अस्पतालों में परिक्षण किए जा रहे हैं| इस उपकरण को 28 अक्टूबर 2020 को लांच किया गया है|

भारत में हैं दुनिया के एक तिहाई मुंह के कैंसर के मरीज

दुनिया भर के लिए कैंसर एक बड़ी समस्या है| आज दुनिया में जितने भी कैंसर के मामले सामने आते हैं, उनमें से करीब 30 फीसदी मुंह के कैंसर के होते हैं| भारत के लिए यह समस्या कितनी गंभीर है इसका अंदाजा आप इसी बात से लगा सकते हैं, कि दुनिया के करीब एक तिहाई मुंह के कैंसर के मामले भारत में ही सामने आते हैं|

भारत में हर साल ओरल कैंसर के 80,000 से अधिक नए मामले सामने आते हैं। जिनका पता लगाने में इतनी देर हो जाती है कि उसकी वजह से कई लोगों को अपनी जान से हाथ धोना पड़ता है|

वर्तमान में इसका पता लगाने के लिए मुंह की जांच की जाती है, जिसे एक टॉर्च की मदद से किया जाता है| इसी की मदद से इस कैंसर की अवस्था को जानने की कोशिश की जाती है| हालांकि कैंसर की प्रारंभिक अवस्था को जानने में यह विधि ज्यादा कारगर सिद्ध नहीं होती है| यहां तक कि अनुभवी चिकित्सकों को भी इस बात का पता नहीं लगता है कि वो किस जगह से बायोप्सी करें| इस वजह से बायोप्सी के खर्च में वृद्धि हो सकती है| इसके साथ ही रिपोर्ट में कई कमियां होती है जिससे बीमारी की पहचान में देरी हो जाती है| ऐसे में यह डिवाइस इस बीमारी की पहचान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है|

ओरलस्कैन को मेक इन इंडिया पहल के अंतर्गत तैयार किया गया है| जिसे विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) की नेशनल इनिशिएटिव फॉर डेवलपिंग एंड हारनेसिंग इनोवेशंस (निधि) योजना की सहायता से तैयार किया गया है। इस डिवाइस को पूरी तरह से भारत में डिजाइन और विकसित किया गया है।