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इस्तेमाल खाद्य तेल से बनेगा बायोडीजल, 60 हजार गांवों में लगेंगे प्लांट

बार-बार तेल का इस्तेमाल करने से बीमारियां हो सकती हैं। ऐसे में, एक बार इस्तेमाल हो चुके तेल को इकट्ठा करके गांवों में लगे प्लांट में बायोडीजल बनाया जाएगा

By Trilochan Bhatt

On: Monday 27 January 2020
 
1. देहरादून में यूज्ड कुकिंग ऑयल से बायोडीजल बनाने का वैज्ञानिक प्रयोग का प्रदर्शन करते सीएसआईआर-आईआईपी के वैज्ञानिक। फोटो: त्रिलोचन भट्ट
1. देहरादून में यूज्ड कुकिंग ऑयल से बायोडीजल बनाने का वैज्ञानिक प्रयोग का प्रदर्शन करते सीएसआईआर-आईआईपी के वैज्ञानिक। फोटो: त्रिलोचन भट्ट 1. देहरादून में यूज्ड कुकिंग ऑयल से बायोडीजल बनाने का वैज्ञानिक प्रयोग का प्रदर्शन करते सीएसआईआर-आईआईपी के वैज्ञानिक। फोटो: त्रिलोचन भट्ट

कई बार इस्तेमाल कर दिया गया खाने का तेल स्वास्थ्य और पर्यावरण के लिए गंभीर संकट बन गया है। होटलों, रेस्त्रांओं और हलवाइयों द्वारा बार-बार इस्तेमाल किये जाने के कारण यह तेल जहां लोगों के स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा पैदा कर रहा है, वहीं दूसरी ओर पूरी तरह काला पड़ जाने के बाद इस तेल का निस्तारण भी बड़ी समस्या बन गया है। खुली जगहों, नालों और नदियों में फेंक दिये जाने से यह तेल पर्यावरण को नुकसान पहुंचा सकता है।

देहरादून स्थित वैज्ञानिक एवं औद्योगिक शोध काउंसिल-भारतीय पेट्रोलियम संस्थान (सीएसआईआर-आईआईपी) ने इस समस्या से निपटने के लिए शहरों के साथ ही देश के 60 हजार गांवों में इस तेल से बायोडीजल बनाने वाले प्लांट लगाने की योजना बनाई है। आईआईपी के अधिकारियों को मानना है कि इससे घरों से निकलने वाले यूज्ड कुकिंग ऑयल का भी बायोडीजल बनाने में इस्तेमाल किया जा सकेगा। शहरों में मोबाइल प्लांट शुरू करने की भी योजना है, ताकि खाने-पीने की चीजें बनाने वाले छोटे और मध्यम स्तर के व्यवसायियों को भी इस योजना का हिस्सा बनाया जा सके।

आईआईपी के प्रिंसिपल साइंटिस्ट नीरज अत्रे कहते हैं कि कई शोधों के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि खाने का तेल बार-बार इस्तेमाल किये जाने से उसमें कई हानिकारक तत्व पैदा हो जाते हैं। ये कैंसर, हाई ब्लड प्रेशर, लीवर संबंधी बीमारियों और मानसिक रोगों का कारण बन सकते हैं। यही वजह है कि भारतीय खाद्य सुरक्षा मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) की ओर से देशभर में मुहिम चलाई जा रही है कि व्यवसायी खाने के तेल का तीन से अधिक बार इस्तेमाल न करें। डॉ. अत्रे कहते हैं कि इस तेल का क्या किया जाए, यह एक बड़ी समस्या है और भारतीय पेट्रोलियम संस्थान ने इसका हल ढूंढ निकाला है।

भारतीय खाद्य सुरक्षा मानक प्राधिकरण के आंकड़े बताते हैं कि वर्ष 2017 में देशभर में 2300 करोड़ किलोग्राम खाद्य तेल इस्तेमाल किया गया। इसका अर्थ यह हुआ कि उस वर्ष देश में हर दिन 290 करोड़ किलोग्राम खाद्य तेल इस्तेमाल किया गया। यानी कि प्रति व्यक्ति प्रति माह 1.50 किलोग्राम तेल इस्तेमाल किया गया। इस आंकड़े के विश्लेषण करके अनुमान लगाया गया है कि वर्ष 2030 तक भारत में प्रति वर्ष खाद्य तेल की खपत 3400 करोड़ किलोग्राम तक पहुंच जाएगी।

सीएसआईआर-आईआईपी के निदेशक डॉ. अंजन रे कहते हैं कि देशभर में लगभग 6 लाख गांव हैं। हमारा इरादा 10 प्रतिशत गांवों में इस तरह के छोटे प्लांट लगाने का है। वे कहते हैं कि यह कोई भारी भरकम प्लांट नहीं होता। 200 लीटर प्रति बैच यूज्ड कुकिंग ऑयल को प्रोसेस करने का प्लांट मात्र 25 लाख रुपये में लगाया जा सकता है और एक दिन में 1000 लीटर तेल प्रोसेस किया जा सकता है। वे बताते हैं कि 1000 लीटर यूज्ड कुकिंग ऑयल से 800 लीटर बायोडीजल तैयार हो जाता है। 

सीएसआईआर-आईआईपी द्वारा देहरादून में हाल ही में यूज्ड कुकिंग ऑयल से बायोडीजल बनाने का प्लांट शुरू कर दिया गया है। देहरादून स्थित सोशल डेवलपमेंट फॉर कम्युनिटी (एसडीसी) फाउंडेशन ने व्यवसायियों से कुक्ड ऑयल एकत्रित करके इस प्लांट को उपलब्ध करवाने की जिम्मेदारी ली है। पिछले दिनों फाउंडेशन और आईआईपी के अधिकारियों के मौजूदगी में यूज्ड कुकिंग ऑयल की गाड़ी प्लांट के लिए रवाना की गई। इस गाड़ी को रिपर्पज यूज्ड कुकिंग ऑयल (रुको) एक्सप्रेस नाम दिया गया है। इसके अलावा संस्थान छत्तीसगढ़ के रायपुर में छत्तीसगढ़ बायोफ्यूल डेवलपमेंट अथॉरिटी के साथ मिलकर यूज्ड कुकिंग ऑयल प्लांट चला रहा है।

सीएसआईआर-आईआईपी के निदेशक डॉ. अंजन अत्रे कहते हैं कि यूज्ड कुकिंग ऑयल से बायोडीजल बनाने से एक ओर जहां इस्तेमालशुदा खाद्य तेल से निस्तारण की समस्या हल होगी वहीं दूसरी ओर इससे बायोडीजल का आयात भी 10 प्रतिशत तक कम किया जा सकता है।