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विश्व मलेरिया दिवस : नेपाल-भूटान समेत 25 देशों को मलेरिया मुक्त करने के लिए डब्लूएचओ ने शुरु की नई पहल

जिन देशों को मलेरिया से निजात मिली है, उन देशों में प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल को लेकर मजबूत प्रणाली है जो ज्यादा से ज्यादा लोगों की मलेरिया रोकथाम, निदान और उपचार सेवाओं तक पहुंच सुनिश्चित करती है

By Lalit Maurya

On: Thursday 22 April 2021
 

नेपाल, भूटान, दक्षिण अफ्रीका, बोत्सवाना, ईरान सहित 25 देशों को मलेरिया मुक्त करने के लिए डब्लूएचओ ने एक नई पहल ई-2025 शुरु की है| जिसका लक्ष्य अगले 5 वर्षों में 25 और देशों को मलेरिया मुक्त करना है| इस पहल के तहत डब्लूएचओ इन देशों को मलेरिया मुक्त करने के लिए विशेष समर्थन और तकनीकी मार्गदर्शन प्रदान करेगा|

इससे पहले 2017 में शुरू की गई पहल ई-2020 के तहत डब्ल्यूएचओ ने 2020 तक 21 देशों को मलेरिया मुक्त करने का लक्ष्य रखा था| विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा जारी नई रिपोर्ट से पता चला है कि इन 21 में से 8 देशों अल्जीरिया, बेलीज, काबो वर्डे, चीन, अल सल्वाडोर, ईरान, मलेशिया और पराग्वे में मलेरिया का एक भी स्वदेशी मामला सामने नहीं आया है| हालांकि 2020 के दौरान मलेशिया में परजीवी प्लास्मोडियम नोलेसी के चलते लगभग 2600 लोग संक्रमित हो गए थे| आमतौर पर यह परजीवी बंदरों में पाया जाता है| इसके साथ ही कई अन्य देशों में भी मलेरिया मुक्ति की दिशा में अच्छी खासी प्रगति हुई है, जैसे तिमोर-लेस्ते में केवल एक स्वदेशी मामला सामने आया है, जबकि भूटान, कोस्टा रिका और नेपाल में 100 से भी कम मामले सामने आए हैं|

एंटीबायोटिक रेसिस्टेन्स के बढ़ते खतरे के बावजूद ग्रेटर मेकांग क्षेत्र में भी मलेरिया उन्मूलन की दिशा में काफी प्रगति हुई है| इस क्षेत्र का लक्ष्य 2030 तक मलेरिया को पूरी तरह खत्म करना है| क्षेत्र के छह देशों कंबोडिया, चीन, लाओस, म्यांमार, थाईलैंड और वियतनाम में 2000 से 2020 के बीच मलेरिया के मामलों में करीब 97 फीसदी की कमी आई है| वहीं इनसे होने वाली मौतों में भी 99 फीसदी की कमी दर्ज की गई है, जो 6,000 से घटकर 15 पर पहुंच गई हैं|

दुनिया के जिन 87 देशों  में मलेरिया फैला हुआ है, उनमें से 46 देशों ने 2019 के दौरान 10 हजार से भी कम मामलों की सूचना दी है जबकि 2000 में केवल 26 देशों में ऐसा हुआ था| वहीं 2020 के अंत तक 24 देशों ने सूचना दी है कि उनके यहां 3 या उससे अधिक वर्षों से मलेरिया का कोई मामला सामने नहीं आया है| जिनमें से 11 देशों को डब्ल्यूएचओ ने मलेरिया मुक्त घोषित कर दिया है|

वर्ल्ड मलेरिया रिपोर्ट 2020 के अनुसार भारत में भी 2017 की तुलना में 2019 के दौरान मामलों में 60 फीसदी की कमी आई है| दूसरी ओर दुनिया भर में भी मलेरिया से होने वाली मौतों में भी कमी दर्ज की गई है, जोकि 2000 में यह 7.36 लाख से घटकर 2019 में 4.09 लाख रह गई हैं।

रिपोर्ट के अनुसार जिन देशों को मलेरिया से निजात मिली है, उन देशों में प्राथमिक स्वास्थ्य सम्बन्धी देखभाल को लेकर मजबूत प्रणाली है, जो ज्यादा से ज्यादा लोगों की मलेरिया रोकथाम, निदान और उपचार सेवाओं तक पहुंच सुनिश्चित करती है| यहां रहने वाले सभी लोगों के लिए स्वास्थ्य के बेहतर अवसर उपलब्ध कराए गए हैं| मजबूत सामाजिक जुड़ाव के साथ-साथ मजबूत डेटा सिस्टम को भी इस सफलता का श्रेय जाता है। कई देश जिन्होंने मलेरिया से जंग जीती है, वे दूरदराज और दुर्गम क्षेत्रों में इस बीमारी का पता लगाने और उसका इलाज करने के लिए स्वयंसेवी स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं के समर्पित नेटवर्क पर निर्भर रहे हैं।

87 देशों में दर्ज किए गए थे मलेरिया के मामले

हालांकि दुनियाभर में मलेरिया उन्मूलन की दिशा में उल्लेखनीय प्रगति हुई है, इसके बावजूद 2019 के दौरान 87 देशों में मलेरिया के 22.9 करोड़ मामले सामने आए थे| वहीं इस बीमारी के चलते 4.09 लाख लोगों को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा था| दुःख की बात है कि इन सब मौतों में से दो तिहाई मौतें अकेले उप-सहारा अफ्रीका में हुई  थी, जिसका शिकार 5 वर्ष से कम उम्र के बच्चे हुए थे|

आंकड़ों के अनुसार 2019 के दौरान अकेले अफ्रीका, दुनिया भर में मलेरिया से होने वाली 94 फीसदी मामलों और मौतों का बोझ ढो रहा है| जबकि 3 फीसदी मामले दक्षिण-पूर्व एशिया, 2 फीसदी पूर्वी भूमध्यसागर और एक फीसदी से भी कम मामले पश्चिमी प्रशांत क्षेत्र और अमेरिका में सामने आए थे| हालांकि दुनिया भर में 39 देश मलेरिया मुक्त घोषित हो चुके हैं पर यह जरुरी नहीं है कि एक बार मलेरिया मुक्त होने के बाद यह बीमारी दोबारा नहीं आ सकती, इसलिए इस पर लगातार निगरानी जरुरी है|

यह आंकड़ें इस बात का सबूत है कि अभी भी दुनिया को पूरी तरह मलेरिया मुक्त करने की मंजिल काफी दूर है| जिस तरह से दुनिया कोरोना महामारी का सामना कर रही है, उसने मलेरिया के खिलाफ जारी जंग पर असर डाला है| आज पूरे विश्व का ध्यान कोरोना से लड़ने पर है| इस बीच अन्य बीमारियों के प्रति चेतना में कमी आई है| अनुमान है कि यदि मलेरिया के लिए जरुरी दवा उपलब्ध न हुई तो 2018 की तुलना में मलेरिया से मरने वालों की संख्या अफ्रीका में दोगुनी हो सकती है|

कई देशों ने इस दिशा में प्रयास भी किए हैं, पर डब्लूएचओ का सर्वे बताता है कि दुनिया के लगभग एक तिहाई देशों ने 2021 की पहली तिमाही के दौरान मलेरिया रोकथाम, निदान और उपचार सेवाओं में व्यवधान की सूचना दी है। ऐसे में जरुरी है कि देश कोरोना के साथ-साथ अन्य बीमारियों और स्वास्थ्य से जुड़ी अन्य जरुरी सेवाओं पर भी ध्यान दें| पर यह तभी मुमकिन होगा जब देश अपनी स्वास्थ्य प्रणाली को मजबूत करने के साथ ही हर व्यक्ति तक स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच सुनिश्चित करेंगे|