Agriculture

भारी बारिश से महाराष्ट्र में 70 लाख हेक्टेयर जमीन पर खड़ी फसल बर्बाद

महाराष्ट्र में हुई बेमौसमी भारी बारिश के कारण 36 जिलों में खड़ी फसल तो बर्बाद हो ही गई, बल्कि जो किसान फसल कट  चुके थे, वे भी अपनी फसल को बाजार तक नहीं पहुंचा पाए 

 
By Ashwin Aghor
Last Updated: Friday 08 November 2019
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फणनवीस बर्बाद फसल को देखते हुए। फोटो: अश्विन अघोर
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फणनवीस बर्बाद फसल को देखते हुए। फोटो: अश्विन अघोर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फणनवीस बर्बाद फसल को देखते हुए। फोटो: अश्विन अघोर

महाराष्ट्र में बेमौसम बारिश ने 70 लाख हेक्टेयर भूमि पर फसलों को नुकसान पहुंचाया है। महाराष्ट्र के वित्त मंत्री सुधीर मुनगंटीवार ने 6 नवंबर, 2019 को मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस द्वारा बुलाई गई बैठक में भाग लेने के बाद संवाददाताओं को यह जानकारी दी।

उन्होंने कहा कि 70 लाख हेक्टेयर पर फसलें नष्ट हो गई हैं। इसमें से 60 लाख हेक्टेयर का पंचनामा (मूल्यांकन) पूरा हो चुका है और मुआवजा तुरंत जारी किया जाएगा।

सरकारी अधिकारियों के अनुसार, राज्य के 36 जिलों में से 5000 करोड़ रुपए से अधिक का नुकसाने होने का अनुमान है।

हजारों किसान जो पहले ही फसल काट चुके थे, उन्हें भी नुकसान उठाना पड़ रहा है, क्योंकि वे बाजार तक फसल नहीं पहुंचा सके और कटी हुई फसल भी नष्ट हो गई।

महाराष्ट्र के मराठवाड़ा, कोंकण और पश्चिमी महाराष्ट्र में पिछले एक महीने से लगातार बेमौसमी भारी बारिश हो रही है। इससे मराठवाड़ा क्षेत्र में खरीफ की लगभग 85 प्रतिशत फसल नष्ट हो गई है।

पश्चिमी महाराष्ट्र में, पुणे, सांगली, सतारा, कोल्हापुर और सोलापुर प्रभावित हैं। पुणे के संभागीय आयुक्त दीपक म्हैसकर के अनुसार  भारी बरसात के कारण संभाग में लगभग 1.36 लाख हेक्टेयर पर लगी फसल नष्ट हो गई है।

सांगली जिले में लगभग 65,267 हेक्टेयर खड़ी फसलें, सोलापुर में 36,345 हेक्टेयर, पुणे में 21,681 हेक्टेयर, सतारा में 11,800 हेक्टेयर और कोल्हापुर में 1055 हेक्टेयर भूमि नष्ट हो गई है।

कोंकण में, धान मुख्य फसल है, जो लगभग पूरी तरह से नष्ट हो गई है। यहां के धान उत्पादक  100 फीसदी मुआवजे की मांग कर रहे हैं।

कपास, अंगूर, सोयाबीन, मक्का, बाजरा, धान और ज्वार जैसी फसलें उगाने वाले किसानों को बारिश के कारण लगभग 100 प्रतिशत फसल का नुकसान हुआ है।

हालांकि, यह दावा किया जा रहा है कि बेशक भारी बारिश से खरीफ की फसल नष्ट हो गई, लेकिन रबी की फसल जैसे अरहर, चना और गेहूं को इससे फायदा होगा।

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने राज्य के अधिकारियों को दावा निपटान की प्रक्रिया में तेजी लाने के निर्देश दिए हैं। कहा गया है कि अगर किसान व्हाट्सएप पर खोई हुई फसल की तस्वीरें भेजते हैं, तब भी दावों को मंजूरी दी जाएगी।

उन्होंने कहा कि मुआवजे की राशि किसानों के बैंक खातों में जमा की जाएगी, क्योंकि फसल के बाद के नुकसान का अनुमान लगाया गया है।

राज्य सरकार ने किसानों की राहत के लिए 10,000 करोड़ रुपए रखे हैं, लेकिन फड़नवीस ने केंद्र सरकार से अतिरिक्त सहायता की मांग की है। हालांकि, मुआवजे का वितरण तुरंत शुरू हो जाएगा।

राज्य में लगभग 50 लाख किसानों के पास फसल बीमा है। बीमा कंपनियों को तुरंत दावे निपटाने के निर्देश दिए गए हैं। राजस्व मंत्री चंद्रकांत पाटिल ने इसे जल्द से जल्द पूरा करने के आदेश जारी किए हैं।

सरकार ने प्रभावित किसानों के बीच 2-3 रुपये प्रति किलोग्राम की रियायती दर पर खाद्यान्न वितरित करने का भी फैसला किया है। बैंकों को निर्देश दिया गया है कि वे जबरन कर्ज न वसूलें।

वित्त मंत्री मुनगंटीवार ने कहा कि पशुओं के लिए पर्याप्त चारे की व्यवस्था भी की जाएगी। साथ ही, रबी की फसल अच्छी होने की संभावना के चलते प्रशासन से कहा गया है कि किसानों को रबी की फसल की बुआई में किसी तरह की दिक्कत न हो, इसका भी इंतजाम किया जाए।

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