Governance

कैसे तैयार होता है केंद्रीय बजट?

बजट प्रभाग प्रति वर्ष अगस्‍त-सितंबर के महीनों में आगामी वित्त वर्ष का केंद्रीय बजट तैयार करने की प्रक्रिया शुरू करता है 

 
By DTE Staff
Last Updated: Friday 01 February 2019

प्रक्रिया की शुरुआत में बजट प्रभाग प्रति वर्ष अगस्‍त के आखिरी सप्‍ताह या सितंबर के पहले पखवाड़े में वार्षिक बजट परिपत्र जारी करता है। अधिकांश देशों की तरह, भारत में बजट प्रक्रिया के चार विशेष चरण हैं-

  • बजट तैयार करना: आगामी वित्‍त वर्ष के लिए आय और व्‍यय का अनुमान तैयार करना;
  • बजट मंजूर करना: वित्त विधेयक और विनियोजन विधेयक मंजूर करके विधानपालिका द्वारा प्रस्‍तावित बजट का अनुमोदन;
  • बजट लागू करना: सरकार द्वारा वित्त विधेयक और विनियोजन विधेयक के प्रावधान लागू करना, आय एकत्र करना व विधानपालिका के अनुमोदन के अनुसार विभिन्‍न सेवाओं के लिए इन्‍हें संवितरित करना; तथा
  • बजट के कार्यान्‍वयन की समीक्षा: विधानपालिका की ओर से सरकार के वित्तीय कार्यों की लेखा परीक्षा।

प्रक्रिया अगस्‍त-सितंबर में शुरू होती है

केंद्र सरकार में वित्त मंत्रालय के अंतर्गत आने वाले आर्थिक कार्य विभाग में बजट प्रभाग है। यह प्रभाग प्रति वर्ष अगस्‍त-सितंबर के महीनों में आगामी वित्त वर्ष का केंद्रीय बजट तैयार करने की प्रक्रिया शुरू करता है। प्रक्रिया की शुरुआत में बजट प्रभाग प्रति वर्ष अगस्‍त के आखिरी सप्‍ताह या सितंबर के पहले पखवाड़े में वार्षिक बजट परिपत्र (सर्कुलर) जारी करता है। इस वार्षिक बजट परिपत्र में केंद्र सरकार के मंत्रालयों/ विभागों द्वारा तैयार किए जाने वाले बजट अनुमान के विवरण के रूप और अंतर्वस्‍तु से संबंधित विस्‍तृत निर्देश शामिल होते हैं।

अनुमान, संशोधित अनुमान और वास्‍तविक आंकड़े

यह भी उल्‍लेखनीय है कि बजट तैयार करने की इस प्रक्रिया के दौरान मंत्रालयों को अपनी आय और व्‍यय से संबंधित तीन तरह के आंकड़े उपलब्‍ध कराने होते हैं। ये हैं: बजट अनुमान, संशोधित अनुमान और वास्‍तविक आंकड़े। मान लीजिए, कैलेंडर वर्ष 2011 की दूसरी छमाही में बजट तैयार करना है। केंद्र सरकार सितंबर 2011 से फरवरी 2012 की अवधि के दौरान वर्ष 2012-13 के लिए बजट तैयार करेगी। इस मामले में, वर्ष 2012-13 की अनुमानित प्राप्तियों/ व्‍यय के लिए संसद का अनुमोदन मांगा जाएगा जिसे बजट अनुमान कहा जाएगा।

इसी समय केंद्र सरकार वर्ष 2012-13 के अपने बजट में चालू वित्त वर्ष 2011-12 के संशोधित अनुमान प्रस्तुत करेगी। यहां उल्‍लेखनीय है कि सरकार 2011-12 के संशोधित अनुमान के लिए संसद का अनुमोदन नहीं मांगेगी लेकिन ये संशोधित अनुमान सरकार को वित्त वर्ष 2011-12 के पहले छ: महीनों के दौरान वर्ष 2011-12 के बजट के कार्यान्‍वयन के आधार पर विभिन्‍न मंत्रालयों के बीच अपनी निधि का पुन: आबंटन करने का अवसर देंगे।

अंतत: मंत्रालय पिछले वित्त वर्ष 2011-12 के लिए अपनी वास्‍तविक आय और व्‍यय की जानकारी भी देंगे। इस प्रकार वर्ष 2012-13 के बजट अनुमान, वर्ष 2011-12 के संशोधित अनुमान और वर्ष 2010-12 की वास्‍तविक आय और व्‍यय शामिल होंगे।

क्या थी पूर्ववर्ती योजना आयोग की भूमिका

केंद्र सरकार के मंत्रालय अपनी संबंधित योजनागत स्‍कीम के बारे में केंद्रीय योजना आयोग (जिसे भंग कर नीति आयोग बनाया गया है) के साथ विचार-विमर्श करने के बाद ही आगामी वित्त वर्ष के बजट अनुमान के लिए योजनागत व्‍यय हेतु बजट अनुमान उपलब्‍ध कराएंगे। योजना आयोग कुल बजटीय सहायता का आकार तय करने के लिए वित्त मंत्रालय पर निर्भर करता है। यह बजटीय सहायता केंद्र सरकार की आगामी वार्षिक योजना के बजट में उपलब्‍ध कराई जाएगी। सिद्धांत रूप से प्रत्‍येक वार्षिक योजना की निधि समूची पंचवर्षीय योजना के अनुमोदित आकार में से होनी चाहिए। हालांकि व्‍यवहार में, वार्षिक योजना के लिए कुल बजटीय सहायता का आकार आगामी वित्त वर्ष के लिए वित्त मंत्रालय के पास उपलब्‍ध संभावित निधि पर भी आधारित होता है।

घाटे को कम करने की जरूरत

पिछले कुछ वर्षों में वित्त मंत्रालय राजकोषीय उत्‍तरदायित्‍व और प्रबंधन अधिनियम तथा इसके नियमों का हवाला देकर केंद्र सरकर के राजकोषीय घाटे और राजस्‍व घाटे को कम करने की जोर-शोर से मांग कर रहा है। अत: योजना आयोग और केंद्र सरकार की इस अधिनियम की कानूनी बाधाओं से बचने की अभिलाषा के कारण केंद्र सरकार के लिए राजस्‍व घाटा शून्‍य (कुल राजस्‍व व्‍यय कुल राजस्‍व आय से एक रुपया भी अधिक नहीं होना) तथा राजकोषीय घाटा सकल घरेलू उत्‍पाद के 3 प्रतिशत से कम दिखाना अनिवार्य हो गया है। इसका अर्थ है कि एक वित्त वर्ष में सरकार का नया ऋण उस वर्ष देश के सकल घरेलू उत्‍पाद के 3 प्रतिशत से अधिक नहीं होना चाहिए।

आखिरी चरण

इसके साथ ही, बजट तैयार करने के आखिरी चरण में राजस्‍व अर्जित करने वाले केंद्र सरकारी मंत्रालय वर्तमान वित्त वर्ष (संशोधित अनुमान) और आगामी वित्‍त वर्ष (बजट अनुमान) में अपने राजस्‍व के अनुमान वित्त मंत्रालय को उपलब्‍ध कराते हैं। इसके बाद, सामान्‍यत: जनवरी में अनुमानित प्राप्तियों को अंतिम रूप देने पर अधिक ध्‍यान दिया जाता है। आगामी वित्त वर्ष में व्‍यय को पूरा करने के लिए संसाधनों की कुल आवश्‍यकता के मद्देनजर वित्त मंत्रालय आगामी वित्त वर्ष के लिए राजस्‍व प्राप्तियों पर ध्‍यान देता है।

बजट तैयार करने के आखिरी चरण में, वित्त मंत्री मंत्रालय द्वारा तैयार बजट प्रस्‍तावों की जांच करते हैं तथा जरूरत पड़ने पर उनमें बदलाव करते हैं। इस चरण में वित्त मंत्री प्रधानमंत्री से परामर्श करते हैं तथा केंद्रीय मंत्रिमंडल को भी जानकारी देते हैं। यदि बजट के बारे में किसी अन्‍य मंत्रालय और वित्त मंत्रालय के बीच कोई मतभेद होता है तो उसे भी मंत्रिमंडल में सुलझाया जाता है।

अंतिम चरण में, वित्त मंत्रालय का बजट प्रभाग बजट में प्रस्‍तुत किए जाने वाले सभी आंकड़ों को समेकित करता है तथा अंतिम बजट दस्‍तावेज तैयार करता है। नेशनल इन्फोर्मेटिक्स सेंटर (एनआईसी) बजट संबंधी आंकड़े समेकित करने की प्रक्रिया में बजट प्रभाग की मदद करता है। यह प्रक्रिया पूरी तरह से कम्‍प्‍यूटरीकृत है। इस प्रक्रिया के अंत में वित्त मंत्री संसद में केंद्रीय बजट प्रस्‍तुत करने के लिए भारत के राष्‍ट्रपति से अनुमति लेते हैं।

संविधान के अनुसार, राष्‍ट्रपति द्वारा निर्धारित दिन पर केंद्रीय बजट लोक सभा में प्रस्‍तुत किया जाता है। परंपरा के अनुसार वित्त मंत्री फरवरी के आखिरी कार्य दिवस पर लोकसभा में केंद्रीय बजट प्रस्‍तुत करते हैं। वित्त मंत्री बजट प्रस्‍तुत करते समय भाषण देते हैं। वित्त मंत्री द्वारा लोकसभा में अपना बजट भाषण समाप्‍त करने के बाद ही वार्षिक बजट विवरण राज्‍यसभा में प्रस्‍तुत किया जाता है। लोकसभा में वित्त विधेयक पेश होने के बाद सांसदों को बजट दस्‍तावेज उपलब्‍ध कराया जाता है और सदन उस दिन के लिए स्‍थगित कर दिया जाता है। यह उल्‍लेखनीय है कि भारत में बजट प्रक्रिया के एक पहलू में पारदर्शिता का अभाव है।

एक ओर जहां विधानपालिका द्वारा बजट मंजूर करने तथा उसके कार्यान्‍वयन की समीक्षा करने की प्रक्रिया पारदर्शी है, वहीं दूसरी ओर सरकार द्वारा बजट तैयार करने की पूरी प्रक्रिया बंद दरवाजों के पीछे होती है।

(सौजन्‍य: सेंटर फॉर बजट एंड गवर्नेंस अकाउंटेबिलिटी (सीबीजीए)। यह संगठन गैर सरकारी सार्वजनिक नीतियों और शासन की जवाबदेही पर काम करता है)  

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