Environment

4000 साल से मिट्टी के कटाव को बढ़ा रहे हैं इंसान, अब दिख रहा है असर

अध्ययन के मुताबिक, जंगलों के कटाव और कृषि एवं इंसानों के रहने के लिए भूमि उपयोग में परिवर्तन किया गया। इस कारण औद्योगिकीकरण से बहुत पहले ही मिट्टी का कटाव शुरू हो गया था

 
By Lalit Maurya
Last Updated: Wednesday 30 October 2019
Photo: Samrat Mukharjee
Photo: Samrat Mukharjee Photo: Samrat Mukharjee

धरती पर मिटटी की उपस्थिति मनुष्य से लेकर फसलों तक हर प्रकार के जीवन का आधार है। हजारों सालों से जलवायु और पृथ्वी की प्लेटों में हो रही हलचल मिट्टी के अपक्षय और क्षरण को नियंत्रित करती रही हैं। मिट्टी का कटाव न केवल पारिस्थितिक तंत्र की उत्पादकता को घटा देता है, साथ ही यह प्रकृति में चल रहे पोषक तत्वों के आदान प्रदान की क्रिया में भी फेरबदल कर देता है। जिसके चलते यह जलवायु और समाज को सीधे तौर पर प्रभावित करता है ।

शोधकर्ताओं की एक टीम ने दुनिया भर में 600 से अधिक झीलों में जमा तलछट का विश्लेषण किया है और मिट्टी के कटाव के अस्थायी परिवर्तनों को दर्ज करने में सफलता हासिल की है। वैज्ञानिकों ने पाया कि वैश्विक स्तर पर झील में तलछट का जमाव लगभग 4,000 साल पहले काफी बढ़ गया था। उसी समय पेड़ों के आवरण में कमी दर्ज की गई। जैसा कि पोलन रिकॉर्डों द्वारा दिखाया गया है, जोकि स्पष्ट रूप से वनों की कटाई की ओर संकेत करता है।

अध्ययन से पता चलता है कि मनुष्यों द्वारा किये जा रहे कार्यों और भूमि उपयोग में होने वाले परिवर्तनों ने औद्योगिकीकरण से बहुत पहले ही मिट्टी के कटाव को तेज कर दिया था। हजारों सालों से जलवायु और धरती की प्लेटों में आ रहा उतर चढ़ाव बड़े पैमाने पर मृदा क्षरण के लिए मुख्य रूप से जिम्मेदार रहा है। हालांकि स्थानीय स्तर पर मनुष्यों द्वारा किये जा रहे क्रियाकलाप मृदा क्षरण के लिए जिम्मेदार रहे हैं, लेकिंग अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया था कि मानव द्वारा किए गए मृदा अपरदन का वैश्विक स्तर पर भी प्रभाव पड़ता है।

क्या छुपा है इतिहास के पन्नों में

इस सवाल को हल करने के लिए, मैक्स प्लैंक इंस्टीट्यूट के भूविज्ञानी जीन-फिलिप जेनी के नेतृत्व में अंतर्राष्ट्रीय वैज्ञानिकों की एक टीम ने इतिहास के पन्नों में पीछे जाकर मिट्टी के कटाव का अध्ययन किया है। उन्होंने दुनिया भर की करीब 632 झीलों में ड्रिल करके तलछट के नमूनों की जांच की है, जो पिछले दशकों के दौरान वैज्ञानिकों द्वारा एकत्र किए गए थे। झील के तलछट को मृदा अपरदन की गतिविधियों का प्राकृतिक अभिलेखागार माना जाता है। डॉ जेनी ने बताया कि "साल दर साल मिट्टी और चट्टान के टुकड़े तलछट के रूप में परत दर परत जमा हो जाती है, जो झीलों के तल पर संरक्षित रहते हैं। 14C रेडियोकार्बन तकनीक का उपयोग करके वैज्ञानिकों ने तलछट की परतों की आयु और तलछट के संचय होने की दर का पता लगाया है । मैक्स प्लैंक इंस्टीट्यूट के ग्रुप लीडर और इस अध्ययन के पर्यवेक्षक डॉ नूनो कारवालहिस ने बताया कि "विश्लेषण के अनुसार 632 झीलों में से 35 फीसदी झीलों में आश्चर्यजनक रूप से लगभग 4,000 साल पहले तलछट में बढ़त देखी गयी।"

वैज्ञानिकों के अनुसार इस तलछट के बढ़ने का कारण पेड़ों के बचे हिस्सों के जमाव का बढ़ना था, जो कि भूमि उपयोग में बदलाव के कारण हुआ था। इसके पीछे की वजह आबादी के लिए घरों के निर्माण और कृषि के लिए किया गया था । इस पर और किये गए सांख्यिकीय विश्लेषणों ने इस बात की पुष्टि कर दी है कि वैश्विक स्तर पर भूमि उपयोग में आने वाला परिवर्तन झीलों में एकत्र हुए तलछट के लिए मुख्य रूप से जिम्मेदार था। जो कि मिट्टी के कटाव का धोतक है। डाटा को और करीब से देखने पर शोधकर्ताओं को इसके विषय में और दिलचस्प तथ्य पता चले जैसे समय के साथ मानव बस्तियों में होने वाले सामाजिक-आर्थिक विकास का प्रभाव तलछट पर भी दिखाई देता है।

उदाहरण के लिए, यूरोप की तुलना में उत्तरी अमेरिका में मिट्टी के कटाव की शुरुआत बाद में हुई। जिसके पीछे की बड़ी वजह उपनिवेशीकरण हो सकती है।  इसके विपरीत, 23 फीसदी साइटों में मिट्टी के कटाव में कमी संभवत: 3,000 साल पहले विशेष रूप से रोमन और चीनी साम्राज्यों में पानी के उपयोग और नदी प्रबंधन में होने वाली वृद्धि से जुड़ी हुई थी।

कुल मिलकर इस अध्ययन से पता चलता है कि झील के जलग्रहण क्षेत्र में बड़े पैमाने पर पेड़ों के काटने के कारण मृदा अपरदन हुआ था। इसके अलावा पिछले चार हजार सालों के दौरान मनुष्यों द्वारा वनों की कटाई के चलते मिट्टी के कटाव में तेजी से वृद्धि हुई थी। जेनी ने बताया कि हालांकि "अभी हाल ही में ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन ने अचानक अपना प्रभाव दिखाना शुरू कर दिया है पर मानवीय गतिविधियों ने 4,000 साल पहले ही वैश्विक पर्यावरण को प्रभावित करना शुरू कर दिया था।”

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