Forests

जंगल बचाने वाले देशी समुदायों पर बेदखली का संकट: रिपोर्ट

धरती को बंजर होने से बचाने के लिए काम कर रही संयुक्त राष्ट की संस्था यूएनसीसीडी की रिपोर्ट में यह बात कही गई है

 
By Kundan Pandey
Last Updated: Saturday 31 August 2019
Photo: Sayantan Bera
Photo: Sayantan Bera Photo: Sayantan Bera

संयुक्त राष्ट्र कन्वेंशन टू कॉम्बैट डेजर्टिफिकेशन (यूएनसीसीडी) रिपोर्ट में कहा गया है कि कई सरकारें वन संरक्षण के नाम पर अरबों खर्च कर रही हैं, फिर भी वे देशी और स्थानीय समुदायों का मुकाबला नहीं कर पा रही हैं।

2 सितंबर से शुरू होने वाले कंवेशन से पहले फॉरेस्ट एंड ट्रीज: लैंड डिग्रेडेशन न्यूट्रैलिटी नाम की यह रिपोर्ट जारी की गई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि देशी व वनवासी समुदाय लगभग 40 प्रतिशत वन क्षेत्र का संरक्षण कर रहे हैँ। वे अपने वनभूमि में लगभग 300 बिलियन टन कार्बन का प्रबंधन करते हैं। इसके लिए वनवासी कोई निवेश भी नहीं करते हैं। दूसरी ओर, विभिन्न देशों की सरकारें भारी निवेश के बाद भी लगभग इतना ही काम कर पा रही हैं।

रिपोर्ट में इस बात पर दुख जताया गया है कि वनों का संरक्षण करने वाले इन समुदायों के योगदान को कोई मान्यता नहीं दी जा रही है। बल्कि उन्हें अपना जीवन जीने और अधिकार हासिल करने के लिए संघर्ष करने को मजबूर किया जा रहा है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि दुनिया के आधे से अधिक भूमि का प्रबंधन देशी व स्थानीय समुदाय कर रहे हैं, जबकि केवल 10 प्रतिशत के पास ही मालिकाना अधिकार हैं। उनके योगदान के लिए पुरस्कार पाने के बजाय, ये समुदाय संरक्षित क्षेत्रों से जबरन बेदखली का शिकार हो रहे हैं, इसके लिए उनके साथ हिंसात्मक व्यवहार तक किया जाता है।

रिपोर्ट में इन समुदायों के साथ-साथ महिलाओं को संरक्षण, स्थायी उपयोग और वन परिदृश्य की बहाली के लिए समान पहुंच और लाभ साझा करने के पक्ष में तर्क दिया गया है। रिपोर्ट में महिलाओं की भूमिका को महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है और कहा गया है कि वनों को बनाए रखने में महिलाओं का ज्ञान और प्रबंधन महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, फिर भी वानिकी पुरुष प्रधान क्षेत्र है।

संयुक्त राष्ट्र का सम्मेलन (सीओपी) 14 भारत में 2 सितंबर से 14 सितंबर तक आयोजित किया जा रहा है। अभी भूमि और जंगल के क्षरण से संबंधित और भी कई रिपोर्ट्स आने की संभावना है। वन और अन्य भूमि के क्षरण के कारण प्रति वर्ष लगभग 10.6 ट्रिलियन डॉलर खर्च हो रहा है, जो वैश्विक जीडीपी का 17 प्रतिशत है। यूएनसीसीडी की रिपोर्ट में कहा गया है कि यह दुनिया भर में प्रति व्यक्ति लगभग 1,400 डॉलर है।

यूनसीसीडी के तहत 120 देशों ने 2030 तक लैंड डिग्रेडेशन न्यूट्रलिटी (LDN) का स्वैच्छिक लक्ष्य निर्धारित किया है। इसके तहत, विश्व समुदाय ऐसी स्थिति को प्राप्त करना चाहता है जहां भूमि संसाधनों की मात्रा और गुणवत्ता स्थिर बनी रहे।

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