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बैलाडीला मामले की जांच शुरू, आदिवासियों व ग्राम सचिव ने दर्ज कराए बयान

दंतेवाड़ा के बैलाडीला इलाके की खदान 13 अदानी एंटरप्राइजेज को दिए जाने का विरोध कर रहे आदिवासियों की सुनवाई शुरू हो गई है

 
Last Updated: Wednesday 17 July 2019
ग्राम सभा मे अपना बयान दर्ज करते हुए ग्रामीण और जांच अधिकारी। फोटो: मंगल कुंजम
ग्राम सभा मे अपना बयान दर्ज करते हुए ग्रामीण और जांच अधिकारी। फोटो: मंगल कुंजम ग्राम सभा मे अपना बयान दर्ज करते हुए ग्रामीण और जांच अधिकारी। फोटो: मंगल कुंजम

मंगल कुंजम 

दंतेवाड़ा के बैलाडीला इलाके की खदान 13 अदानी एंटरप्राइजेज को दिए जाने का विरोध कर रहे आदिवासियों की सुनवाई शुरू हो गई है। अभी राज्य सरकार आदिवासियों के फर्जी ग्राम सभा के आरोपों की जांच कर रही है। दंतेवाड़ा के एसडीएम नूतन कुमार कवर ने आदिवासियों के साथ-साथ तत्कालीन ग्राम सचिव के बयान दर्ज किए। दो बार सुनवाई टल चुकी है। कुल 29 लोगों के ही बयान दर्ज किए गए।

ग्राम सभा में अपना बयान देने पहुंचे गुड्डी कुंजाम ने बताया कि मेरा भी नाम  2014 के ग्राम सभा मे दर्ज किया गया है, जबकि मैं उस समय कुआकोंडा होस्टल में पढ़ाई कर रहा था और मेरी उम्र 18 साल भी नहीं हुई थी। मैं पढ़ा लिखा भी हूं, जबकि ग्राम सभा में मेरे नाम के आगे अंगूठा लगा हुआ है। कुंजाम ने आरोप लगाया कि सचिव और कंपनी के अधिकारियों ने फर्जी ग्राम सभा रिपोर्ट बना कर प्रस्ताव पारित कर दिया। सामाजिक कार्यकर्ता बालू भावनी ने भी जांच अधिकारी को बताया कि 2014 में कोई भी ग्राम सभा नहीं हुई थी।

तत्कालीन सचिव बसन्त नायक का बयान भी दर्ज किया गया है।  बसंत नायक ने बताया कि ग्राम सभा तो हुई थी, लेकिन इस बारे में राज्य सरकार की ओर से कोई आदेश नहीं आए थे और ना ही कोई नोडल अधिकारी इस ग्राम सभा के लिए सरकार के तरफ से आया था। नायक ने कहा कि एनएमडीसी के अधिकारियों के बार-बार दबाव बनाने के कारण उन्होंने ग्राम सभा बुलाई थी। हालांकि वह इस बात पर अड़े रहे कि ग्राम सभा हुई थी और जो साइन किए गए हैं, वे असली हैं।

जांच अधिकारी एसडीएम नूतन कुमार कवर ने बताया कि 29 लोगों का बयान दर्ज किया गया है और बाकी जो बचे है उनको जिला प्रशासन और राज्य सरकार के आला अधिकारियों को सूचना दिया जाएगा और फिर उसके बाद बचे हुए लोगों का बयान दर्ज होगा, जिला प्रशासन भी चाहता है। जितना जल्दी जांच हो  हम सरकार को रिपोर्ट सौपेंगे और जो जांच हुई है उस पर अभी खुलासा करना उचित नही है जब पूरी जांच होगी सारे रिपोर्ट पेश किया जाएगा और ग्रामीण लोगों के सहयोग के बिना पूरा जांच होना संभव नही है,वो सहयोग करंगे थो जल्द पूरी जांच होगी ?

क्या है मामला

दरअसल, यह लड़ाई काफी पुरानी है। बैलाडीला बस्तर संभाग के दंतेवाडा जिले में स्थित है, जो छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से तक़रीबन 375 किमी दूर है। बैलाडीला एक बहुत ही खूबसूरत पर्वत श्रृंखला है, जिसका पर्वत की सतह दिखने में किसी बैल के कूबड़ की तरह दिखती है इसलिए इसे बैलाडीला कहा जाता है। बैलाडीला जितनी खुबसूरत पर्वत श्रृंखला है, इसका गर्भ उतनी ही लौह अयस्क के भण्डार से समृद्ध है। यहाँ पिछले पांच दशक से ज्यादा समय से यहाँ एनएमडीसी द्वारा लौह अयस्क की खुदाई करके दुनिया भर में निर्यात किया जा रहा है।

एनएमडीसी ( नेशनल मिनरल डेवलॉपमेंट कारपोरेशन ) और सीएमडीसी ( छत्तीसगढ़ मिनरल डेवलॉपमेंट कारपोरेशन ) ने 2008 में एक संयुक्त उपक्रम की शुरुआत की जिसका नाम एनसीएल ( एनएमडीसी-सीएमडीसी ) रखा गया. जिसे 2015 में 10 मिलियन मेट्रिक टन लौह अयस्क उत्खनन के लिए पर्यावरण क्लीयरेंस मिल गया. बैलाडीला का यह 13 नंबर भण्डार का लीज एरिया 413.74 हेक्टेयर क्षेत्र में फैला हुआ है जहाँ 326 मेट्रिक टन का उच्च गुणवत्ता पूर्ण लौह अयस्क का भण्डार है। इसके बाद एनसीएल ने यहाँ पर उत्खनन के पूर्व उत्खनन लायक विकास के लिए एक ग्लोबल टेंडर आमंत्रित किया जिसमें करीब 10 कंपनियों ने हिस्सा लिया जिनमें से अडानी इंटरप्राइजेज ( एइएल) को 2018 में माइनिंग कंट्रक्टर के बतौर चुन लिया गया। यह ठेका अगले 25 साल के लिए दिया गया है।

एफआरए अनुपालन और पंचायत (अनुसूचित क्षेत्रों के लिए विस्तार) अधिनियम, 1996 के तहत ग्राम सभा से अनापत्ति प्रमाण पत्र प्राप्त करने का प्रावधान था। आदिवासियों का आरोप है कि फर्जी ग्राम सभा दिखा कर इस परियोजना को दिलाई गई। जिसकी सुनवाई चल रही है।

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