Climate Change

भारत समेत दुनिया के कई देशों ने कहा महसूस हो रहा है जलवायु परिवर्तन : सर्वे

ज्यादातर देशों ने कहा है कि जलवायु परिवर्तन के दुष्प्रभावों को कम करने के लिए कठोर कदम उठाने होंगे। वहीं, कई एशिया और प्रशांत क्षेत्र के देश इसे विश्व युद्ध का खतरा भी मानते हैं। 

 
By Vivek Mishra
Last Updated: Wednesday 18 September 2019

दुनिया के कई देश जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को महसूस करने लगे हैं और वे इसका प्रमुख कारण मनुष्य की गतिविधियों को ही मानते हैं। दुनिया के 28 देशों में ऐसा मानने वाले सबसे अधिक भारत में है। “यू गव” के ताजा सर्वेक्षण और अध्ययन में ऐसा मानने वाले सबसे ज्यादा (71 फीसदी) भारतीय ही हैं।

28 देशों में करीब 30 हजार लोगों के जवाब से तैयार यू गव का ताजे अध्ययन में कहा गया है कि सबसे कम (35 फीसदी) नॉर्वे और सऊदी अरब के जवाब यह बताते हैं कि जलवायु परिवर्तन की प्रमुख वजह मनुष्य गतिविधियां हैं। हालांकि, नार्वे के ही 36 फीसदी और सऊदी अरब के 48 फीसदी जवाब जलवायु परिवर्तन में मनुष्य को आंशिक तौर पर ही जिम्मेदार मानते हैं।  

 अमेरिका में 38 फीसदी यह मानते हैं कि जलवायु परिवर्तन मनुष्य गतिविधियों की ही देन है, जबकि 37 फीसदी आंशिक तौर पर और 9 फीसदी जलवायु परिवर्तन को स्वीकारते हैं लेकिन मनुष्य को जिम्मेदार नहीं मानते। वहीं, 28 देशों में 0 से लेकर 6 फीसदी तक ऐसे जवाब आए हैं जो जलवायु परिवर्तन को ही नहीं मानते। साथ ही सभी देशों के 01 फीसदी से 09 फीसदी तक ऐसे लोग हैं जो यह तो मानते हैं कि जलवायु परिवर्तन हो रहा लेकिन मनुष्य की गतिविधियों को इसके लिए जिम्मेदार नहीं मानते।

सर्वे के पहले हिस्से में जलवायु परिवर्तन और उसकी वजह को लेकर चार सवाल पूछे गए थे। देखिए यहां आंकड़े और भारत समेत 28 देशों के जवाब :

सभी देशों के ज्यादातर लोग यह भी मानते हैं कि जलवायु परिवर्तन की उनकी जिंदगी पर बड़ा या मध्यम असर डाल सकता है। सर्वे के मुताबिक फिलपींस के 75 फीसदी (सबसे ज्यादा) वोट इस पक्ष में हैं कि जलवायु परिवर्तन से उनकी जिंदगी पर बड़ा असर पड़ सकता है। ऐसा मानने वालों में दूसरे स्थान पर वियतनाम है, जहां के 74 फीसदी वोट इसी पक्ष में हैं। तीसरे स्थान पर भारत है जहां 70 फीसदी मत इस पक्ष में हैं कि जलवायु परिवर्तन उनकी जिंदगी पर बड़ा प्रभाव डाल सकता है। जबकि ज्यादा प्रभाव के सवाल पर चीन में महज 26 फीसदी और अमेरिका में महज 24 फीसदी मत हैं। सबसे कम डेनमार्क के 10 फीसदी मत ऐसा मानते हैं। एशिया और प्रशांत क्षेत्र के देशों का सबसे ज्यादा मानना है कि जलवायु परिवर्तन न सिर्फ आर्थिक नुकसान कर सकता है बल्कि विस्थापन, विश्व युद्ध और विुलप्ति जैसे दंश भी लोगों को झेलने पड़ सकते हैं। जबकि यूरोप और अमेरिकी देशों के लोग विश्व युद्ध, विस्थापन और विलुप्ति को नहीं मानते हैं।

सर्वे में जलवायु परिवर्तन के विरुद्ध लड़ाई को लेकर सक्षमता पर भी सभी देशों से सवाल पूछे गए थे। इस हिस्से में ज्यादातर देशों ने जलवायु परिवर्तन के दुष्प्रभावों को कम करने के लिए सख्त कदम उठाने की बात पर जोर दिया है। सबसे ज्यादा स्पेन (82 फीसदी) ने यह मत जाहिर किया है कि जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए कठोर कदम उठाने पड़ेंगे। वहीं, 80 फीसदी मत के साथ कतर दूसरे स्थान पर और 79 फीसदी मतों के साथ तीसरे स्थान पर मौजूद चीन ने भी जलवायु परिवर्तन से लड़ाई के लिए कठोर कदम उठाने की बात कही है। वहीं, इस सूची में 19वें स्थान पर भारत भी है जो 61 फीसदी मतों के साथ यह मानता है कि जलवायु परिवर्तन से लड़ाई के लिए कठोर कदम उठाने होंगे।

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