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30 किलोमीटर प्रति दशक की दर से तटों के करीब आ रहे हैं विनाशकारी तूफान

एक तरफ यह विनाशकारी तूफान तटों के ज्यादा करीब आते जा रहे हैं, दूसरी तरफ इनकी संख्या में भी वृद्धि हो रही है

By Lalit Maurya

On: Tuesday 02 February 2021
 

पिछले 40 वर्षों में कहीं ज्यादा ताकतवर उष्णकटिबंधीय चक्रवात तटों के करीब आते जा रहे हैं। जिससे पहले से अधिक विनाश और नुकसान की संभावनाएं जताई जा रही हैं। वैज्ञानिकों का अनुमान है कि यह तूफान 3 किलोमीटर प्रति वर्ष की दर से तटों के करीब आते जा रहे हैं।

इस शोध से जुड़े प्रमुख शोधकर्ता शुआइ वांग के अनुसार इन उष्णकटिबंधीय चक्रवातों को आम तौर पर हरिकेन और टाइफून के नाम से भी जाना जाता है। पिछले 40 वर्षों में यह तूफान तेजी से तटों की ओर बढ़ रहे हैं। इससे दुनियाभर में तटों पर रहने वाले लोगों पर खतरा बढ़ रहा है। यह जितना ज्यादा समय तटों के करीब बिताएंगे उतना ही ज्यादा वहां रहने वाले लोगों के लिए हानिकारक होगा। इन तूफानों के कारण आने वाले दशकों में लोगों पर इनका गहरा असर पड़ने की सम्भावना है। इम्पीरियल कॉलेज लंदन द्वारा किया यह शोध अंतराष्ट्रीय जर्नल साइंस में प्रकाशित हुआ है।

पिछले शोधों से पता चला है कि इन चक्रवातों की अधिकतम तीव्रता ध्रुवों की ओर और अधिक पाई जाती है। लेकिन यह जरुरी नहीं है, ध्रुवों पर आने वाले तूफान ज्यादा विनाशकारी होते हैं। इस नए शोध से पता चला है कि अधिकतम तीव्रता वाले चक्रवात पश्चिम की ओर पलायन कर रहे हैं, जो उन्हें तटों के करीब ला रहा है। जिससे उनके कारण होने वाले नुकसान की सम्भावना भी बढ़ रही है।

इसे समझने के लिए शोधकर्ताओं ने 1982 से 2018 के बीच तटों पर इन चक्रवातों की गतिविधियों और उनके बदलाव की जांच की है। एक तरफ यह चक्रवात तटों के ज्यादा करीब आते जा रहे हैं। दूसरी तरफ इनकी संख्या में भी वृद्धि हो रही है। प्रति दशक दो अतिरिक्त तूफानों के तटों के 200 किलोमीटर के दायरे में पहुंचने की सम्भावना है।

हालांकि इसका यह मतलब नहीं की हर तूफान तटों से टकराएगा, लेकिन तटों के करीब तक आनेवाले तूफान भी गहरा असर डाल सकते हैं। उदाहरण के लिए 2012 में आए सैंडी और 2019 में डोरियन को देखें तो दोनों ही तूफान टकराने से पहले काफी समय तक तटों अमेरिकी तट के आसपास थे।

क्या जलवायु में आ रहे बदलावों के कारण हो रहा है ऐसा

हालांकि यह किस कारण हो रहा है यह पूरी तरह स्पष्ट नहीं है पर वैज्ञानिकों का मानना है कि इन तूफानों के तटों के करीब आने में जलवायु परिवर्तन का हाथ हो सकता है। उनके अनुसार उष्णकटिबंधीय क्षेत्र के वायुमंडलीय पैटर्न में जो बदलाव आ रहा है वो संभवतः जलवायु परिवर्तन के कारण हो सकता है।

वैज्ञानिकों के अनुसार चक्रवातों का पश्चिम की ओर पलायन एक असंगत कारण का परिणाम है। जो वायुमंडल में अपने साथ चक्रवातों को भी अपने पथ पर ले जा रहा है। हालांकि इसके पीछे का कारण क्या है यह पूरी तरह से स्पष्ट नहीं है। यह वैसा ही कुछ हो सकता है जैसा चक्रवातों के ध्रुवीय प्रवास के समय होता है। बढ़ते तापमान के साथ वायुमंडलीय पैटर्न भी बदल रहा है। ऐसे में इन चक्रवातों का पथ भी बदल रहा है।

हर साल औसतन 80 से 100 चक्रवात उष्णकटिबंधीय महासागरों में बनते हैं जो प्रशांत, अटलांटिक और हिन्द महासागर और उसके आसपास के क्षेत्रों को प्रभावित करते हैं। जिसके कारण अरबों डॉलर का नुकसान होता है।

हाल ही में यूएन द्वारा प्रकाशित "एमिशन गैप रिपोर्ट 2020" से पता चला है कि यदि तापमान में हो रही वृद्धि इसी तरह जारी रहती है, तो सदी के अंत तक यह वृद्धि 3.2 डिग्री सेल्सियस के पार चली जाएगी। ऐसे में इसके विनाशकारी परिणाम झेलने होंगे। इसका व्यापक असर इन चक्रवाती तूफानों पर भी पड़ेगा।