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क्या उत्तर भारत में बड़े भूकंप के संकेत दे रहे हैं छोटे-छोटे भूकंप?

विशेषज्ञों का अनुमान है कि बीते दो माह से लगातार आ रहे भूकंप से किसी बड़े भूकंप के आने से इंकार नहीं किया जा सकता

By Anil Ashwani Sharma, Varsha Singh, Ranvijay Singh

On: Tuesday 09 June 2020
 
सिस्मोग्राफ। फोटो: गेटीइमेज
सिस्मोग्राफ। फोटो: गेटीइमेज सिस्मोग्राफ। फोटो: गेटीइमेज

धरती कांपने (भूकंप) से कैसा भूचाल आता है, यह हम कच्छियों से पूछो, जब हमारे सामने हमारा पूरा का पूरा कस्बा (भुज, गुजरात) ही जमींदोज हो गया था। दिल्ली और उत्तर भारत मे पिछले दो माह से रह-रह कर आ रहे भूकंप के झटके हमें तब (भुज भूकंप, 2001) के धरती कांपने की रह-रह कर याद दिला रहे हैं। भूकंप की विभीषिका को कच्छ से दिल्ली आ बसीं धनवंतरी बेन (बदला हुआ नाम) से बेहतर कोई और नहीं बता सकता। आखिर तब उन्होंने अपना भरा पूरा परिवार ही खो दिया था।

पिछले दो माह से दिल्ली सहित पूरे उत्तर भारत में 14 बार भूकंप के झटके महसूस किए गए हैं। केंद्रीय पृथ्वी एवं विज्ञान मंत्रालय के अनुसार यह झटके रिक्टर स्केल पर बहुत हल्के स्तर के माने गए हैं और इससे बहुत अधिक खतरा नहीं है। हालांकि देश के अन्य विशेषज्ञों और भूकंप पर शोध करने वालों का कहना है कि यह एक बड़े भूकंप की आहट है।

पिछले करीब दो महीने में दिल्ली-एनसीआर भूकंप के लगातार झटके महसूस किए गए। 29 मई को रोहतक के पास आए भूकंप की तीव्रता 4.6 थी। इसके अलावा अन्य सभी 3.2 तीव्रता से कम के थे। जो भूकंप के लंबे इतिहास वाली दिल्ली के लिए चेतावनी की तरह हैं। वैज्ञानिक यहां किसी बड़े भूकंप की आशंका से इंकार नहीं कर रहे हैं। देहरादून में वाडिया इंस्टीट्यूट ऑफ हिमालयन जियोलॉजी के निदेशक डॉ कलाचंद सैन ने इस मुद्दे पर डाउन टु अर्थ को बताया कि इंडियन प्लेट्स के आंतरिक हिस्से में बसे दिल्ली-एनसीआर में भूकंप का लंबा इतिहास रहा है।

ध्यान रहे कि वर्ष 1720 में यहां 6.5 तीव्रता का भूकंप आया। 1956 में 6.7, 1960 में 6.0, 1966 में 5.8 तीव्रता के भूकंप दिल्ली ने झेला है। इसके बाद यहां इतनी तीव्रता के झटके नहीं आए। लेकिन छोटे भूकंप दिल्ली और आसपास के इलाकों में कई वर्षों से लगातार आ रहे हैं। भूकंप के लिहाज से ये पूरा क्षेत्र संवेदनशील है और सेस्मिक ज़ोन 4 में आता है। 

रिक्टर स्केल पर 3.0 से कम तीव्रता वाला भूकंप माइक्रो, 3 से 3.9 माइनर, 4 से 4.9 लाइट, 5 से 5.9 मॉडरेट, 6 से 6.9 स्ट्रॉन्ग, 7 से 7.9 मेजर और 8 से ज्यादा तीव्रता के भूकंप को ग्रेट भूकंप की श्रेणी में रखा गया है। सैन ने बताया, हम वक्त, जगह और तीव्रता का साफ तौर पर अंदाजा नहीं लगा सकते, मगर यह मानते हैं कि यहां एनसीआर क्षेत्र में लगातार भूकंप के झटके आ रहे हैं, जो दिल्ली में एक बड़े भूकंप की वजह बन सकती है।

वहीं भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण के पूर्व सहायक महानिदेशक और भूकंप विशेषज्ञ डॉ. प्रभास पांडे कहते हैं, ''भूकंप को लेकर हम काई ठीक-ठीक भविष्‍यवाणी नहीं कर सकते, लेकिन इन झटाकों के पीछे तीन स्‍थ‍ितियां बन रही हैं। पहला यह कि इस तरह के छोटे झटके लगातार आएंगे और फिर कुछ दिनों में स्‍थ‍िति सामान्‍य हो जाएगी। दूसरी स्‍थ‍िति यह बनती है कि लगातार छोटे झटके आएं और फिर एक बड़ा भूकंप आए। लेकिन इस स्‍थ‍िति में पांच से सात छोटे भूकंप आते हैं और फिर बड़ा भूकंप आ जाता है, जबकि दिल्‍ली में पिछले दो महीने में 14 छोटे भूंकप आ चुके हैं। पांडे के अनुसार तीसरी स्‍थ‍िति यह बनती है कि दिल्‍ली-एनसीआर के भूकंप किसी दूर के इलाके में आने वाले बड़े भूकंप के बारे में बता रहे हों।

वहीं इस संबंध में भारतीय मौसम विभाग में भूकंप जोखिम मूल्यांकन केंद्र ने अगाह किया है कि दिल्ली-एनसीआर में इमारतों के मानक जल्द से जल्द बदले जाएं। दिल्‍ली में भूकंप की संभावना हमेशा बनी रहती है। यही वजह है कि दिल्‍ली को सीस्मिक जोन-4 में रखा गया है। दुनिया की ही तरह भारत में भी भूकंप के संभावित क्षेत्रों को 5 सीस्‍मिक जोन में बांटा गया है। पांचवा जोन सबसे खतरनाक होता है उसके बाद जोन 4 आता है और दिल्ली और आसपास का क्षेत्र इसी जोन के अंतर्गत आता है। और जहां फॉल्ट लाइन होती है, वहीं पर भूकंप का अधिकेंद्र बनता है। 


फॉल्ट एक तरह के भूगर्भीय दरार होते हैं, जहां से होकर भूकंपीय तरंगें गुजरती हैं। ऐसे फॅाल्ट सिस्टम की वजह से छह से 6.5 तीव्रता का भूकंप आने की आशंका बनी रहती है। यह भूकंप भारी तबाही मचा सकता है। मध्य हिमालयी क्षेत्र में भूकंप आया तो दिल्ली-एनसीआर, आगरा, कानपुर, लखनऊ, वाराणसी और पटना तक का इलाका प्रभावित हो सकता है।

कलाचंद सैन ने चेतावनी दी है कि एनसीआर क्षेत्र में लगातार सीस्मिक ऐक्टिविटी हो रही है और इससे दिल्‍ली में एक बड़ा भूकंप आ सकता है। सभी विशेषज्ञों का अनुमान है कि भूकंप आया तो करीब 400 किलोमीटर का इलाका होगा प्रभावित होगा। किसी भी बड़े भूकंप का 300 से 400 किलोमीटर की रेंज तक दिखता है। ध्यान रहे कि 2001 में भुज में आए भूकंप ने करीब 400 किमी दूर अहमदाबाद में भी बड़े पैमाने पर तबाई मचाई थी।