88 जिलों में बिल्कुल भी नहीं हुई मॉनसून पूर्व बारिश, 12 राज्यों में सूखे जैसे हालात

विशेषज्ञों ने कहा कि मॉनसून पूर्व बारिश न होने से सब्जी फसलों को नुकसान होता है और खरीफ फसलों की तैयारियां प्रभावित होती हैं

By Raju Sajwan

On: Wednesday 18 May 2022
 
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फोटो : विकिमीडिया कॉमन्स फोटो : विकिमीडिया कॉमन्स

देश में मॉनसून 2022 ने दस्तक दे दी है। अब तक मॉनसून को सामान्य माना जा रहा है, लेकिन मॉनसून पूर्व (प्री मॉनसून) बारिश बेहद असामान्य रही है। 1 मार्च से 17 जून तक के आंकड़े बताते हैं कि देश में वैसे तो सामान्य से केवल 7 प्रतिशत बारिश कम हुई है, लेकिन बारिश का वितरण बेहद असामान्य ढंग से हुआ है।

देश के 88 जिलों (13 प्रतिशत) में बिल्कुल भी बारिश नहीं हुई है, जबकि 242 जिलों (35 प्रतिशत) में भारी कम और 124 जिलों (18 प्रतिशत) कम बारिश हुई है।

भारतीय मौसम विभाग की परिभाषा कहती है कि सामान्य के मुकाबले 20 से 59 प्रतिशत कम बारिश होने को कम (डेफिसिएट) कहा जाता है, जबकि सामानय के मुकाबले 60 से 99 प्रतिशत बारिश कम होने की स्थिति को भारी कम (लार्ज डेफिसिएट) कहा जाता है। 

मौसम विभाग के आंकड़े बताते हैं कि केवल 13 प्रतिशत (91 जिलों) में सामान्य बारिश हुई है, लेकिन 13 प्रतिशत (92) जिले ऐसे हैं, जहां बहुत ज्यादा (लार्ज एक्सेस) बारिश हुई है और वहां बाढ़ के हालात बने हुए हैं। जबकि 57 जिलों (8 प्रतिशत) में अधिक बारिश हुई है।

राज्यों की अगर बारिश की बात करें तो 1 मार्च से 17 मई 2022 के बीच 12 राज्यों में बहुत कम बारिश हुई है, जबकि सात राज्यों में कम बारिश हुई है। जबकि केवल तीन राज्यों में ही सामान्य बारिश हुई है, जबकि आठ राज्यों में बहुत ज्यादा बारिश हुई है और 6 राज्यों में ज्यादा बारिश हुई है। केंद्र शासित क्षेत्र दादर नगर हवेली में बिल्कुल भी बारिश नहीं हुई।

मॉनसून पूर्व बारिश सबसे कम गुजरात में हुई है। गुजरात में 97 फीसदी कम बारिश हुई है। हालांकि राज्य में इस अवधि में सामान्य तौर पर 2.6 मिलीमीटर बारिश होती है, लेकिन इसमें से केवल 0.1 मिमी बारिश ही हुई है। गुजरात के 33 में से 25 जिलों में बिल्कुल भी बारिश नहीं हुई।

1 मार्च से 17 मई के बीच पंजाब में सामान्य से 90 फीसदी कम बारिश हुई तो हिमाचल प्रदेश में 85 फीसदी, हरियाणा में 87 फीसदी, राजस्थान में 78 फीसदी, उत्तर प्रदेश में 75 फीसदी जम्मू कश्मीर में 78 फीसदी, महाराष्ट्र में 73 फीसदी, दिल्ली में 87 फीसदी बारिश कम हुई है।

उत्तर प्रदेश के 21 जिलों में बिल्कुल भी बारिश नहीं हुई। जबकि महाराष्ट्र के 15 जिले, मध्य प्रदेश के 13 जिले, राजस्थान के 5 जिले, हरियाणा के चार जिलों में बिल्कुल भी बारिश नहीं हुई है।

दरअसल इनमें से कुछ राज्य ऐसे हैं, जहां अधिकतर दक्षिण पूर्व मॉनसून के दौरान ही बारिश होती है, लेकिन इन राज्यों में मॉनसून पूर्व बारिश भी काफी मायने रखती है।

विशेषज्ञ कहते हैं कि मॉनसून पूर्व बारिश न होने की वजह से उत्तर भारत के इन राज्यों में भीषण गर्मी पड़ रही है। अगर बारिश हो जाती तो गर्मी कम हो जाती।

मौसम विभाग के कृषि मौसम विज्ञान डिवीजन के हेड रह चुके नाबांसु चट्टोपाध्याय ने डाउन टू अर्थ से कहा कि मार्च-अप्रैल में मॉनसून पूर्व बारिश न होने के कारण ही तापमान बहुत अधिक  पड़ा, जिसके चलते न केवल रबी की फसलों को नुकसान हुआ, बल्कि रबी और खरीफ के बीच जायद फसल के अलावा सब्जियों की खेती करने वाले किसानों को नुकसान झेलना पड़ रहा है।

वह कहते हैं कि अगर मॉनसून पूर्व बारिश सही मात्रा में हो जाती है तो सब्जी किसानों को दो से तीन बार सिंचाई नहीं करनी पड़ती है। इससे उनकी लागत कम हो जाती है। लेकिन बारिश न होने पर सिंचाई पर उनका खर्च बढ़ जाता है, जिसकी वजह से न केवल उन्हें नुकसान होता है, बल्कि सब्जियां महंगी भी होती है।

चट्टोपाध्याय कहते हैं कि मॉनसून पूर्व बारिश में कमी का असर खरीफ की फसलों पर भी पड़ता है। यदि मॉनसून पूर्व बारिश पर्याप्त हो तो खरीफ की फसलों को काफी सहयोग मिल जाता है। खासकर धान की फसल लगाने वाले किसान नमी होने के कारण पहले से खेतों को तैयार करने लगते हैं।

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