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बैठे-ठाले: आपदा के अपराधी

अचानक हाथीराम ने पानी कि ओर इशारा करते हुए कहा, “वह देखिए जनाब, वे रहे इस तबाही को अंजाम देने वाले मुख्य अपराधी”

By Sorit Gupto

On: Tuesday 09 March 2021
 

सोरित / सीएसई हवलदार हाथीराम का खुशी का ठिकाना नहीं था। वह झूमते हुए अपने तम्बू की ओर चले आ रहे थे। तम्बू के पास आकर उन्होंने चारों ओर देखा। दूर तक सन्नाटा और खर्राटों की आवाजें थीं।

कौन थे हवालदार हाथीराम? वह कहां थे? और जहां थे, वहां वह उस वक्त क्या कर रहे थे?

अब सुनिए खबरें विस्तार से- चमोली में आई तबाही की तफ्तीश करने के लिए देश-विदेश के विशषज्ञों के दल रैणी गांव के बॉर्डर पर तम्बू गाड़कर जम गए थे। हवालदार हाथीराम भी इन्हीं में से एक थे जिन्हें बतौर स्पेशल इन्वेस्टिगेटिंग ऑफिसर और स्पेशल ड्यूटी भेजा गया था। हाथीराम ने अपने तम्बू के साथ लगे तम्बू के अंदर मुंडी डालकर कहा, “सरजी! अपराधी का पता चल गया है!”

उनकी इस बात से उस तम्बू में सो रहे उनके सीनियर यानी दरोगा साहब कान खड़े हो गए और वह हड़बड़ा कर उठ बैठे।

“सरजी मैंने पता कर लिया है कि इस तबाही के पीछे किसका हाथ है। यह एक सोची समझी अंतरराष्ट्रीय साजिश है।”

दरोगा ने हाथीराम से कहा, “थोड़ा तफसील से बताओ।”

हाथीराम ने जेब से डायरी निकाल ली और पढ़ना शुरू किया, “मैंने अपनी तहकीकात की शुरुआत रैणी गांव से की। मेरी पूछताछ में गांव ने कबूल किया कि इस वारदात में उसका एक साथी भी शामिल है।”

“कौन है उसका साथी?”

“नाम ऋषिगंगा है। पूरा नाम ऋषिगंगा हाइड्रो इलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट। यह नाम तो खालिस विदेशी है। नाम सुनकर मेरा माथा ठनका कि हो न हो नाम विदेशी है तो इस षड्यंत्र के तार विदेश तक फैले हैं। मैं तो ऋषिगंगा हाइड्रो इलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट पर कई धाराएं लगाकर अरेस्ट करने वाला था पर बेचारा बुरी तरह घायल था, इसलिए गिरफ्तार नहीं किया। बस थोड़ी “पूछताछ” करते ही उसने कबूल कर लिया कि उसके कुछ और भी साथी हैं जिनका नाम ग्लेशियर है। लो जी, एक और विदेशी। मैंने उसकी निशानदेही पर कई ग्लेशियर को हवालात में डाल दिया। दो दिन हवालात में उनसे तसल्ली से पूछताछ की तो ग्लेशियर ने कबूल किया कि यह एक अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क है जिसे दो लोग चलाते हैं। उनका नाम क्लाइमेट चेंज और ग्लोबल वार्मिंग है। कोई व्यक्ति है जिसका नाम सीओटू एमिशन है। वह इन दोनों का बॉस है। ऑपरेशन चमोली की तैयारी काफी दिनों से चल रही थी जनाब।”

“मान गए तुमको!” दरोगा जी ने हाथीराम की पीठ थपथपाते हुए कहा, “पर जब तक इस गिरोह के सरगना के बारे में पता करके उसे गिरफ्तार नहीं किया जाता तब तक हम ऐसे अपराधों पर अंकुश नहीं लगा सकेंगे” दरोगा जी ने कहा।

“कोई बड़ा अपराधी मालूम होता है। पर आप बेफिक्र रहें। मैंने एक मुखबिर का पता लगाया है। वह स्थानीय बाशिंदा है और नाम है मुरेंदा झील। पहाड़ों के बीच में एक गुप्त जगह पर उसे मैंने नजरबन्द कर रखा है। उसके पास जाने से हमें मुख्य अपराधी के बारे में पता चल जाएगा।”

थोड़ी ही देर में दोनों मुरेंदा झील पहुंच गए जो चमोली दुर्घटना के बाद पहाड़ों के बीच बन गई थी।

दोनों चुपचाप खड़े थे। आसमान में बड़ा-सा चांद खिला था।

अचानक हाथीराम ने पानी कि ओर इशारा करते हुए कहा, “वह देखिए जनाब, वे रहे इस तबाही को अंजाम देने वाले मुख्य अपराधी।”

हाथीराम का इशारा झील के शांत पानी में दो परछाइयों की ओर था जो उनकी अपनी परछाइयां थीं। दो इंसानों की परछाइयां...