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मॉनसून से राजस्थान में फसल को भारी नुकसान, एमपी में सबसे अधिक मौतें

कभी बारिश न होने के कारण जहां सूखा पड़ता था, जलवायु परिवर्तन की वजह से वहां अब बाढ़ आने लगी है। इस बार यह सिलसिला काफी बढ़ गया और बाढ़ से राजस्थान को सबसे अधिक नुकसान हुआ

By Anil Ashwani Sharma, Raju Sajwan

On: Thursday 21 November 2019
 
यह तस्वीर अक्टूबर 2017 की है। राजस्थान के जालौर जिले में आई बाढ़ की वजह से ऐसे हालात बन गए थे (फोटो: आदित्यन पीसी / सीएसई)
यह तस्वीर अक्टूबर 2017 की है। राजस्थान के जालौर जिले में आई बाढ़ की वजह से ऐसे हालात बन गए थे (फोटो: आदित्यन पीसी / सीएसई)
यह तस्वीर अक्टूबर 2017 की है। राजस्थान के जालौर जिले में आई बाढ़ की वजह से ऐसे हालात बन गए थे (फोटो: आदित्यन पीसी / सीएसई)

“राजस्थान में बाढ़” कहना अपने आप में एक हंसी का पात्र बनने के लिए काफी है। लेकिन डाउन टू अर्थ  ने आज से दो साल पहले यानी सितंबर, 2017 में ही अपनी एक रिपोर्ट में यह कहा था, “राजस्थान का मरुस्थली इलाका असामान्य बारिश से जूझ रहा है। बाढ़ न केवल नियमित होती जा रही है बल्कि विनाशकारी रूप भी धर रही है।” अब इस बात को केंद्र सरकार ने भी मान ली है।

लोकसभा में प्रश्नकाल के दौरान 19 नवंबर,2019 को पूछे गए प्रश्न के जवाब केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद ने बताया कि 2019 में मॉनसून के दौरान 1 जून से 14 नवंबर के बीच बाढ़, बादल फटने और भूस्खलन के कारण 2391 लोगों की मौत हुई, जबकि 15729 पशुओं की मौत हुई। 8,00,067 मकान टूट गए और 63.975 हेक्टेयर फसलों का नुकसान हुआ। 

मॉनसून की वजह से सबसे अधिक 674 लोगों की मौत हुई, लेकिन राजस्थान में सबसे अधिक फसलों का नुकसान हुआ है। यहां 27.36 हेक्टेयर में लगी फसल का नुकसान हुआ है, जबकि यहां 126 लोगों की मौत हुई और 28415 पशुओं की भी मौत हुई और 28415 मकान क्षतिग्रस्त हुए। मध्य प्रदेश में 6.04 लाख हेक्टेयर में बोई फसल मॉनसून के दौरान बर्बाद हो गई। 

इस बात को ध्यान में रखते हुए गृह राज्य मंत्री ने बताया कि बाढ़ और वर्षा जनित आपदाओं के बाद भारत सरकार ने 19 अगस्त 2019 को निर्णय लिया हे कि इन आपदाओं से  निपटने के लिए राजस्थान सहित 14 राज्यों में आईएमसीटी यानी अंतर मंत्रालयी केंद्रीय दल का गठन किया गया। इस दल की रिपोर्ट के आधार पर संबंधित राज्य को आपदाओं से हुई क्षति का आंकलन किया जाता है।

डाउन टू अर्थ की रिपोर्ट में कहा गया था कि पिछले 15 सालों से यहां बारिश 15 फीसदी की दर से बढ़ रही है। लेकिन 2016 में 849.2 मिमी तो यहां औसत से 300 फीसदी अधिक बारिश हुई। इस साल भी औसत से 200 फीसदी से अधिक बारिश रिकॉर्ड की गई है। इसका कारण है हवा के स्वरूप (विंड पैटर्न) में तेजी से बदलाव। यह क्षेत्र समुद्र से बहुत अधिक दूरी (यह दूरी लगभग 350 सौ किलोमीटर) पर नहीं है। इसके कारण वातावरण में तेजी से आर्द्रता आ रही है। मानसून का स्वरूप अब पश्चिम की ओर हो रहा है। इसकी वजह से इस पश्चिमी भाग में बहुत ज्यादा तूफान आ रहे हैं। यही नहीं इस इलाके के तापमान में भी तेजी से इजाफा हो रहा है।” इस वर्ष राजस्थान व गुजरात के शुष्क क्षेत्र में जून में भारी बारिश हुई। तब जयपुर के आपदा और राहत विभाग के सचिव हेमंत गेरा ने कहा कि इस साल पश्चिमी राजस्थान के पाली, सिरोही, जालौर, बाड़मेर सबसे अधिक बाढ़ प्रभावित जिले हैं।

 

मॉनसून के दौरान किन राज्यों में हुई कितनी मौतें

राज्य                 मौतें

मध्य प्रदेश         674 लोग

महाराष्ट्र             253 लोग

प. बंगाल           227 लोग

गुजरात             195 लोग

उत्तर प्रदेश        133 लोग

राजस्थान          126 लोग

केरल               125 लोग

बिहार               133 लोग

असम               103 लोग

उत्तराखंड          80 लोग 

कहां कितनी फसल हुई बर्बाद

राज्य              नुकसान हेक्टेयर में

राजस्थान            27.36 लाख

कर्नाटक             9.35 लाख

मध्य प्रदेश          6.04 लाख

उत्तर प्रदेश          8.88 लाख

महाराष्ट्र             4.17 लाख

 क्यों आ रही है राजस्थान में बाढ़, विस्तार से पढ़ें 

डूबता राजस्थान