Pollution

उच्च हिमालयी क्षेत्र औली में बहते सीवर से खड़े हुए कई सवाल

उत्तराखंड के उच्च हिमालयी क्षेत्र में हुई शाही शादी के बाद हालत बिगड़ गए हैं, कूड़े के ढेर और सीवर से पर्यटन के साथ-साथ पर्यावरण को नुकसान पहुंच रहा है

 
By Trilochan Bhatt
Last Updated: Friday 28 June 2019
औली में शाही शादी के एक सप्ताह के बाद वहां सीवर का पानी बाहर बह रहा है। फोटो: त्रिलोचन भट्ट
औली में शाही शादी के एक सप्ताह के बाद वहां सीवर का पानी बाहर बह रहा है। फोटो: त्रिलोचन भट्ट औली में शाही शादी के एक सप्ताह के बाद वहां सीवर का पानी बाहर बह रहा है। फोटो: त्रिलोचन भट्ट

 

उत्तराखंड में चमोली जिले के उच्च हिमालयी क्षेत्र औली में एक महंगे शादी समारोह को निपटे अब एक सप्ताह से ज्यादा समय बीत गया है, लेकिन यह शादी समारोह अब भी चर्चाओं में बना हुआ है। इस बड़े आयोजन के पर्यावरणीय और आर्थिक पक्ष को लेकर काफी कुछ कहा और लिखा जा चुका है, लेकिन अब नये सिरे से इसके चर्चा में आने की वजह वे मीडिया रिपोर्ट हैं, जिनमें कहा गया है कि इस समारोह के लिए बनाये गये अस्थाई सैप्टिक टैंक ओवरफ्लो हो रहे हैं और सीवेज औली की खूबसूरत हिमालयी ढलानों में बह रहा है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि यह सीवेज न सिर्फ औली में पर्यटकों की आवाजाही को प्रभावित कर रहा है, बल्कि इससे औली से लेकर जोशीमठ तक बीमारियां फैलने की आशंका बन गई है।

हिमालयी क्षेत्रों में पर्यावरण पर काम करने वाली संस्था गति फाउंडेशन के अध्यक्ष अनूप नौटियाल कहते हैं कि अब नया सवाल यह है कि सरकार औली से सबक लेकर आगे इस तरह के आयोजनों के लिए कोई नीति बनाएगी या फिर भविष्य में ऐसे आयोजन इसी तरह के अराजक माहौल में आयोजित किये जाएंगे। नौटियाल के अनुसार जिस हालात में यह आयोजन करवाया गया और जिस तरह  सैकड़ों टन मलबे के बाद अब सीवेज ढलानों पर बहने वाली मीडिया रिपोर्ट आ रही हैं, वह स्वास्थ्य के साथ ही पर्यावरण के लिए भी नुकसानदेह है। पहला सवाल तो यह है कि जो 167 क्विंटल कूड़ा अब तक उठाया जा चुका है, जाहिर है इसमें सबसे ज्यादा प्लास्टिक कूड़ा होगा, वह डंप कहां किया जा रहा है। नौटियाल के अनुसार इस कूड़े का वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण करने की पूरे पहाड़ में कहीं कोई व्यवस्था नहीं है, इसलिए तय है कि यह कूड़ा आने वाले कई सालों तक पर्यावरण के लिए बड़ी चुनौती खड़ी करेगा।


पर्यावरण कार्यकर्ता ऋषभ श्रीवास्तव कहते हैं कि वेडिंग डेस्टिनेशन (शादी समारोह स्थल) भी पर्यटन का ही एक हिस्सा है, यदि हम उत्तराखंड को पर्यटन प्रदेश मानते हैं कि इस तरह के आयोजन हाई एंड टूरिज्म के मद्देनजर करने ही होंगे, लेकिन इसके लिए व्यवस्थाएं जुटानी होंगी। वेडिंग डेस्टिनेशन के नाम पर किसी हिमालयी बुग्याल को इस तरह पूंजीपतियों के हवाले कर दिया जाएगा तो इसके दुष्परिणाम तो सामने आएंगे ही। इस तरह के आयोजन एक निर्धारित नीति के तहत ही किये जाने चाहिए। औली जैसे आयोजन से किसी को कोई लाभ नहीं होने वाला है, सिवाय बर्बादी के।

स्थानीय निवासी एडवोकेट रमेश चन्द्र सती कहते हैं कि कुछ लोग इस आयोजन को रोजगार से जोड़ रहे हैं और इसका समर्थन कर रहे हैं, जबकि सच्चाई यह है कि इस शाही शादी से क्षेत्र में किसी को स्थाई तो दूर अस्थाई रोजगार भी नहीं मिला है। 

जोशीमठ नगर पालिका परिषद के पूर्व सदस्य प्रकाश नेगी कहते हैं कि वे स्वयं स्थिति का जायजा लेकर लौटे हैं। जो मीडिया रिपोर्ट में कहा गया है, स्थितियां उससे भी ज्यादा खराब हैं। उनका कहना है कि अब तक 188 क्विंटल कूड़ा उठाया जा चुका है और समारोह स्थल पर अब भी चारों ओर कूड़े के ढेर लगे हुए हैं। लगभग 100 क्विंटल कूड़ा अभी भी वहां है। पिछले कुछ दिनों से इस क्षेत्र में लगातार बारिश हो रही है। जिस औली में पहले बारिश होने पर मखमली घास और मुलायम हो जाती थी, वहां बारिश के बाद चारों तरफ कीचड़ है। सेप्टिक टैंक बारिश होने के कारण उफन रहे हैं और कीचड़ के साथ औली की ढलानों पर बह रहे हैं। यहां अब भी सौ से ज्यादा मजदूर हैं, जो टैंट अन्य सामान समेट रहे हैं। इन मजदूरों के लिए शौचालय नहीं है और ये अब खुले में ही शौच कर रहे हैं। 

स्थानीय निवासी और टूरिस्ट गाइड संतोष कुंवर औली की स्थिति से बेहद निराश हैं। उनका कहना है कि जिस तरह से अनियोजित तरीके से यह शादी की गई उसके तात्कालिक दुष्परिणाम तो एक हफ्ते में ही दिखने शुरू हो गये हैं। सीवेज औली को गंदा कर रहा है और इस सीजन में जबकि औली पर्यटकों से खचाखच भरा रहता है, कोई भी वहां जाने के लिए तैयार नहीं है। वे इस स्थिति के लिए नगर पालिका को भी जिम्मेदार मानते हैं। कुंवर का कहना है कि यदि नगर पालिका ने गुप्ता बंधुओं से सफाई के नाम पर 5 लाख 54 हजार रुपये जमा करवाये हैं, लेकिन आयोजन निपटने के तुरंत बाद सेप्टिक टैंकों की सफाई शुरू नहीं करवाई गई। इसी बीच बरसात शुरू हो गई और सेप्टिक टैंक ओवरफ्लो होने लगे। वे कहते हैं कि डीएम के हस्तक्षेप के बाद अब जाकर सेप्टिक टैंकों की सफाई हो रही है। 

नगर पालिका परिषद जोशीमठ के अध्यक्ष शैलेन्द्र सिंह पंवार कहते हैं कि स्थितियां वैसी नहीं हैं, जैसी कही जा रही हैं। सफाई का 90 प्रतिशत काम हो चुका है और अब सिर्फ 10 प्रतिशत काम बाकी है। 5 लाख 54 हजार रुपये पार्टी से पहले ही जमा करवा दिये गये थे, लेकिन इससे ज्यादा पैसा लग रहा है, इसे भी पार्टी से ही वसूल किया जाएगा। मजदूरों के खुले में शौच करने की बात को पालिका अध्यक्ष गलत बताते हैं, उनका कहना है कि वहां अब कोई मजदूर नहीं रह रहा है। 

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