Agriculture

एक तिहाई भारत में कम हुई बारिश फिर भी नहीं घटा धान का मोह

6 सितंबर 2019 तक के आंकड़े बताते हैं कि उत्तर भारत के राज्यों में औसत से कम बारिश हुई है, लेकिन बिहार-झारखंड को छोड़कर शेष राज्यों में धान की बुआई पर असर नहीं पड़ा

 
By Raju Sajwan
Last Updated: Thursday 12 September 2019
Photo: Agnimirh Basu
Photo: Agnimirh Basu Photo: Agnimirh Basu

सितंबर में कई राज्यों में भारी बारिश की खबरें हैं, लेकिन पूरे देश में मानसून की स्थिति का आकलन किया जाए तो केवल 44 फीसदी हिस्से में सामान्य बारिश हुई है, जबकि 36 फीसदी हिस्से में सामान्य से कम या काफी कम बारिश हुई है। हालांकि, कुल मिलाकर देखें तो पूरे देश में सामान्य से 1 फीसदी अधिक बारिश हो चुकी है। बावजूद इसके, कम बारिश वाले राज्यों में धान की बुआई को लेकर लोभ कम नहीं हुआ है। यहां तक कि भूजल स्तर को देखते हुए राज्य सरकारों ने धान की बुआई का लक्ष्य भी कम कर दिया था, लेकिन इसका असर देखने को नहीं मिला। 

कृषि विभाग द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक, 4 सितंबर 2019 तक देश में 742.3 मिलीमीटर बारिश रिकॉर्ड की गई, जबकि सामान्य बारिश 737.8 मिमी होनी चाहिए। यानी कि, 4 सितंबर तक देश में सामान्य से 1 फीसदी अधिक बारिश हो चुकी है। लेकिन यही आंकड़े बताते हैं कि बारिश का पैटर्न ठीक नहीं रहा। जहां बारिश हुई है तो सामान्य से काफी अधिक हुई है और जहां बारिश नहीं हुई तो वहां काफी कम हुई है। देश में लगभग 240 जिले ऐसे हैं, जहां सामान्य से कम या काफी कम बारिश हुई है।

240 में से 18 जिले ऐसे हैं, जहां बारिश की बहुत कम बारिश हुई है। यानी कि ये वे जिले हैं, जहां सामान्य के मुकाबले 60 से 99 फीसदी तक कम बारिश हुई है। इनमें मणिपुर के 6, उत्तर प्रदेश के 3, हरियाणा के 2, जम्मू कश्मीर के 2, बिहार, झारखंड, तमिलनाडु, आसाम, नागालैंड का 1-1 जिला शामिल है। इस स्थिति को सूखे जैसे हालात भी कहा जाता है। हालांकि सूखे की आधिकारिक घोषणा सरकार द्वारा की जाती है। 

कृषि विभाग के आंकड़े बताते हैं कि 4 सितंबर तक देश के 222 जिलों में 20 से 60 फीसदी तक बारिश सामान्य से कम हुई है, उनमें भी उत्तर प्रदेश सबसे ऊपर है। यहां के 39 जिलों में कम बारिश हुई है। जबकि बिहार के 21, झारखंड के 14, हरियाणा के 16, छतीसगढ़ के 10, तमिलनाडु के 10, पश्चिम बंगाल के 14 जिलों में सामान्य से कम बारिश हुई।

वहीं, कृषि विभाग के आंकड़े बताते हैं कि 6 सितंबर तक पिछले साल के मुकाबले 10.48 लाख हेक्टयर में बुआई नहीं हुई है। सबसे अधिक धान की बुआई प्रभावित हुई है। 6 सितंबर तक 6.17 लाख हेक्टेयर में बुआई कम हुई है। इसी तरह दलहन, तिलहन भी पिछले साल के मुकाबले कम बुआई हुई है।

लेकिन यहां आंकड़े दिलचस्प इसलिए हैं कि कई राज्य धान की बुआई कम करना चाहते हैं, वहां कम बारिश के बावजूद धान की बुआई अधिक हुई है। इस मामले में कृषि प्रधान राज्य हरियाणा के आंकड़े बेहद दिलचस्प हैं। इस राज्य में केवल 21 जिले हैं और इनमें से केवल 3 जिले ऐसे हैं, जहां सामान्य बारिश हुई है। जबकि दो जिलों में सामान्य से काफी कम बारिश हुई है। इसके बावजूद यहां फसल की बुआई ठीकठाक हुई है। हरियाणा सरकार ने गिरते भूजल स्तर को बचाने के लिए धान की खेती का लक्ष्य घटा दिया था और किसानों को दूसरी फसल उगाने पर इंसेंटिव देने की घोषणा की थी।  इस साल हरियाणा में 12 लाख हेक्टेयर में धान की बुआई का लक्ष्य रखा गया था, जबकि 6 सितंबर तक 13.06 लाख हेक्टेयर में धान की बुआई की जा चुकी है।

वहीं, उत्तर प्रदेश में भी धान की बुआई लक्ष्य से अधिक हो चुकी है। यहां इस साल 60 लाख हेक्टेयर का लक्ष्य रखा गया था, लेकिन 6 सितंबर तक 60.05 लाख हेक्टेयर में बुआई की जा चुकी है। इसी तरह राज्य में गन्ने की बुआई भी ठीक ठाक हुई है।  यहां 22.44 लाख हेक्टेयर के मुकाबले 24.94 लाख हेक्टेयर में गन्ने की बुआई का अनुमान है।

ऐसे में, बिहार-झारखंड ऐसे राज्य हैं, जहां धान की बुआई काफी कम हुई है। 6 सितंबर तक आंकड़े बताते हैं कि बिहार में 5.06 लाख हेक्टेयर में धान की बुआई कम हुई है, जबकि झारखंड में 2.35 लाख हेक्टेयर में धान की बुआई नहीं हो पाई है। इसका कारण मानसून की शुरुआत में ही कुछ इलाकों में बाढ़ आना बताया जा रहा है। 

हालांकि धान उत्पादक राज्य पंजाब में इस बार बारिश ठीक हुई है। पंजाब के 20 में से 11 जिलों में सामान्य बारिश हुई है और एक जिले में बहुत ज्यादा और एक जिले में सामान्य से अधिक बारिश हुई है। केवल पांच जिले ऐसे हैं, जहां सामान्य से कम बारिश हुई है। यहां सरकार की कोशिश है कि धान की बुआई कम की जाए, क्योंकि भूजल स्तर लगातार गिर रहा है। बावजूद इसके, इस बार भी धान के प्रति पंजाब के किसानों का मोह कम नहीं हुआ है। पिछले साल यहां 29.20 लाख हेक्टेयर में धान की बुआई की गई थी। सरकार ने इसे कम 29 लाख हेक्टेयर किया था, लेकिन 6 सितंबर तक किसान 29.20 लाख हेक्टेयर बुआई कर चुके हैं।

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