Agriculture

20 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में कम हुई धान की बुआई, बिहार-बंगाल सबसे पीछे

खरीफ सीजन में इस साल धान की बुआई सबसे अधिक प्रभावित हुई है 

 
By Raju Sajwan, Pushya Mitra
Last Updated: Tuesday 27 August 2019
Photo: Salahuddin
Photo: Salahuddin Photo: Salahuddin

खरीफ सीजन का आधे से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन चालू खरीफ सीजन में फसलों की बुआई का आंकड़ा पिछले साल के मुकाबले 8 फीसदी कम दर्ज किया गया है। सबसे अहम बात यह है कि पिछले कुछ सालों से धान की खेती में कमी का सिलसिला और तेजी से बढ़ गया है। इस बार अब तक 20.5 लाख हेक्टेयर में धान की बुआई कम हुई है। इसकी बड़ी वजह मानसून में देरी बताई जा रही है।

केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय की ओर से जारी आंकड़ों में 23 अगस्त तक के खरीफ फसलों की बुआई के आंकड़े जारी किए गए हैं। इन आंकड़ों के मुताबिक 23 अगस्त 2019 तक देश भर में 975.16 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में बुआई की गई है, जबकि 2018 में इस दिन तक 997.67 लाख हेक्टेयर बुआई की गई थी।  इस तरह पिछले साल के मुकाबले इस साल अब तक 8.27 फीसदी कम बुआई हुई है।

किसानों ने सबसे अधिक धान की बुआई में कमी कर दी है। आंकड़े बताते हैं कि 2018 में 357.97 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में बुआई की गई थी, लेकिन इस साल 23 अगस्त तक 334.92 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में ही बुआई की गई है। वैसे सामान्य तौर पर 396.25 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में धान की बुआई की जाती है। दिलचस्प बात यह है कि जिन राज्यों में  धान की बुआई सबसे कम हुई है, उनमें बिहार सबसे अव्वल है। बिहार में अब तक 26.56 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में धान की बुआइ की गई है, जबकि पिछले साल 31.48 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में धान की बुआई की गई थी, जो कि सामान्य से 5.75 लाख हेक्टेयर कम है।

एक और दिलचस्प आंकड़ा है कि पश्चिम बंगाल में भी पिछले साल के मुकाबले धान की बुआई इस साल कम हुई है। यहां पिछले साल 39.68 लाख हेक्टेयर में धान की बुआई की गई थी, लेकिन इस साल अब तक 34.58  लाख हेक्टेयर में ही धान बुआई की गई है। यहां सामान्य से 4.03 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में कम बुआई की गई है। ये आंकड़े दिलचस्प इसलिए अधिक हैं, क्योंकि इन दोनों राज्यों में लोग चावल बहुत अधिक खाते हैं। बावजूद इसके धान की बुआई साल दर साल कम हो रही है।

जहां तक इन राज्यों में मानसून का सवाल है तो अगस्त में बाढ़ का सामना कर चुके बिहार में अभी भी सामान्य से 11 फीसदी कम बारिश हुई है। मौसम विभाग के आंकड़ों के मुताबिक 21 अगस्त तक बिहार में सामान्य बारिश 708 मिमी होनी चाहिए, लेकिन 627 मिमी हुई है। हालांकि पिछले साल के मुकाबले इस साल बारिश बढ़ी है, पिछले साल 22 अगस्त तक 564 मिमी ही बारिश हुई थी।

बंगाल का हाल बिहार से भी ज्यादा खराब है। यहां 21 अगस्त तक सामान्य से 29 फीसदी कम बारिश हुई है। यहां सामान्य बारिश 811 मिमी है, लेकिन अब तक 575 मिमी बारिश हुई है। इसके अलावा झारखंड में भी इस साल अब तक 4.34 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में धान की बुआई कम हुई है। यहां भी समान्य से काफी कम बारिश हुई है। धान बुआई में कमी के लिए कम बारिश को बड़ा कारण माना जाता रहा है।

बिहार में खेती से जुड़े मसलों पर काम करने वाले विशेषज्ञ इश्तेयाक अहमद कहते हैं कि कम बारिश होने पर किसान धान की खेती करने से परहेज करते हैं, क्योंकि पानी की कमी से खर पतवार की समस्या हो जाती है। विकल्प के रूप में किसानों ने मक्के का रुख किया है, हालांकि दक्षिण बिहार के किसानों ने खेत खाली छोड़ दिये हैं ताकि अगतीया(समय से पूर्व) सब्जियों की खेती कर सकें। जिसमें बेहतर मुनाफे की गुन्जयिश रहती है।

उत्तर बिहार में जुलाई महीने में आने वाली बाढ़ की वजह से ऐसा आभास हुआ था कि यहां इस बार जल संकट नहीं होगा। मगर आँकड़े बताते हैं कि इस बार भी राज्य में बारिश कम हुई है। 26 अगस्त तक सिर्फ 653 मिमी बारिश हुई है जबकि इस वक़्त तक 763 बारिश हो जानी चाहिये थी। दक्षिण बिहार और झारखंड के जिलों में खास कर बारिश कम हुई है। अगर जहां हुई भी है असमय हुई है और तेज बारिश हुई है। इसलिये किसान धान की फसल लगाने से परहेज कर रहे हैं।

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