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धूम्रपान से हर साल वायुमंडल में मिलते हैं13.5 करोड़ किलोग्राम प्रदूषित कण

अध्ययन से अब यह पुष्टि हुई है कि पार्टिकुलेट मैटर (पीएम) का एक छोटा भाग तंबाकू के धुएं से आता है, इसलिए हवा तंबाकू के धुएं से भी प्रदूषित होती है।

By Dayanidhi

On: Monday 15 February 2021
 
Air is also polluted by tobacco smoke: study

माल्टा विश्वविद्यालय के रसायन विज्ञान विभाग के डॉ. नोएल एक्विलीना और प्रोफेसर इमैनुएल सिनाग्रा के द्वारा एक अध्ययन किया गया है। यह अध्ययन इस बात की पुष्टि करता है कि कई जहरीले घटकों के अलावा एयरबोर्न पार्टिकुलेट मैटर (पीएम) या कण प्रदूषण भी तंबाकू के धुएं से भी प्रदूषित होते हैं।

इस अध्ययन ने शोधकर्ताओं के 30 वर्षों के इंतजार को खत्म किया। 2016 में दुनिया भर में लगभग 6 ट्रिलियन सिगरेटों का उपयोग किया गया था। दुनिया भर में जाने-अंजाने दूसरों द्वारा किया जाने वाला धूम्रपान (सेकेंड हैंड स्मोक (एसएचएस)) अकेले सिगरेट पीने से, लगभग 2.2 करोड़ किलोग्राम निकोटीन और लगभग 13.5 करोड़ किलोग्राम पार्टिकुलेट मैटर (पीएम) हर साल वायुमंडल में मिलता है।

सेकेंड हैंड स्मोक (एसएचएस) पार्टिकुलेट मैटर (पीएम) के उपयोग का पर्यावरणीय परिस्थितियों के तहत और कम सांद्रता में इसका पता लगाया जा सकता है। इस उद्देश्य के लिए, ऐतिहासिक रूप से कई अध्ययनों ने परिवेशी सेकेंड हैंड स्मोक के हवा तक पहुंच को दिखाने के लिए एक सबूत (मार्कर) खोजने की कोशिश की। जो 1991 से मुख्य सबूत के रूप में निकोटीन था।

बाद के अध्ययनों ने पुष्टि की है कि निकोटीन विशेष रूप से गैसीय अवस्था में भी पाया जाता है जबकि सेकेंड हैंड स्मोक के कणों की इस अवस्था के संपर्क को अबतक कम करके आंका गया था। अन्य पदार्थों से अलग-अलग समय पर अन्य सेकेंड हैंड स्मोक घटकों के साथ जुड़ता है। इसकी अलग-अलग सतहों पर सोखने की दर अधिक होती है और जब धूम्रपान अधिक नहीं होता है तो यह सतहों पर से आसानी से कम हो जाता है।

इसका मतलब था कि निकोटीन पार्टिकुलेट मैटर (पीएम) में सेकेंड हैंड स्मोक (एसएचएस) के सबूत के रूप में पर्याप्त नहीं था। पिछले 3 दशकों में, इसके 16 अलग-अलग निशानों/मार्करों को जानने की कोशिश की गई और इनका परीक्षण किया गया लेकिन सभी आवश्यक मार्कर विशेषताओं को पूरा करने के तरीके में विफल रहे।

2013 में डिवीजन ऑफ कार्डियोलॉजी, क्लिनिकल फार्माकोलॉजी प्रोग्राम ने पाया कि तंबाकू के पत्तों और तंबाकू के धुएं में ट्राईपीरिडीन एल्कलॉइड पाया जाता है। इसकी स्थिरता कम होने के कारण, यह मुख्य रूप से पार्टिकुलेट मैटर में जो कि सेकेंड हैंड स्मोक (एसएचएस) और तंबाकू के धुएं में इसका पता लगाया जा सकता है। यह माना गया था कि निकोटेलिन को एसएचएस के लिए किए गए पहले परीक्षण की तुलना में वातावरण में इन कणों के अधिक स्थिर होने की आशंका है। यह अध्ययन एनवायर्नमेंटल इंटरनेशनल नामक पत्रिका में प्रकाशित हुआ है। 

परीक्षण के नमूने इन कणों के वायुमंडल में स्थिर रहने के सबसे महत्वपूर्ण तथ्य को उजागर करते हैं, इसलिए इनकी गणना की जा सकती है। विज्ञान संकाय द्वारा इसे 2018 में माल्टा विश्वविद्यालय, सुश्रीडा परिसर में मोबाइल एयर क्वालिटी लेबोरेटरी उपकरण का उपयोग करके एकत्र किया गया है। वायुमंडलीय परिस्थितियों को सत्यापित करने के लिए स्थानीय मौसम संबंधी आंकड़ों के साथ इसको जोड़ा गया। वास्तविक समय में निगरानी किए गए एक समूह का उपयोग किया गया था, जिसके नमूना लेने के दौरान यह फिल्टर पर निकोटेलिन की स्थिरता को प्रभावित कर सकता है।

अध्ययन से पता चला है कि:

सेकेंड हैंड स्मोक (एसएचएस) में निकोटेलीन को तंबाकू के धुएं से बनने वाले पार्टिकुलेट मैटर पाए गए हैं

यह कम सांद्रता और जनसंख्या घनत्व और तंबाकू के उपयोग के अनुसार अपनी उपस्थिति दिखाता है

एयरबोर्न पार्टिकुलेट मैटर में तंबाकू के धुएं के कण का औसत भार 0.06 फीसदी है।

2010 में, वैश्विक मृत्यु दर के लगभग 1 फीसदी के लिए सेकेंड हैंड स्मोक (एसएचएस) के खतरे को जिम्मेदार ठहराया गया था। 5 वर्ष से कम उम्र के बच्चों में श्वसन संबंधी संक्रमण, वयस्कों में इस्केमिक हृदय रोग और वयस्कों और बच्चों में अस्थमा से संकेत मिलता है कि एसएचएस के संपर्क से कई तरह के खतरे हो सकते हैं।

हालांकि एयरबोर्न पीएम आम तौर पर कई प्रदूषकों से भरा होता है जो विभिन्न स्रोतों के कारण उत्परिवर्तन, जीनोटॉक्सिक और कार्सिनोजेनिक (कैंसर फैलाने वाले) हो सकते हैं, अब यह पुष्टि की गई है कि पीएम का एक छोटा भाग विशेष रूप से तंबाकू के धुएं से आता है, इसलिए हवा तंबाकू के धुएं से भी दूषित होती है।

यद्यपि इसका भार तत्काल खतरे के रूप में बहुत कम प्रतीत होता है, इसने वर्तमान में धूम्रपान न किए जाने वाले वातावरण में भी पार्टिकुलेट मैटर में सांस लेने से सेकेंड हैंड स्मोक/ थर्डहैंड स्मोक (टीएचएस) के संभावित पुराने खतरे पर एक नया मानक स्थापित किया है।

इस अध्ययन का महत्व यह है कि इसने पार्टिकुलेट मैटर (पीएम) में मौजूद शक्तिशाली तम्बाकू से भरे विशिष्ट कार्सिनोजेन (कैंसर फैलाने वाले) पर शोध करने के लिए एक प्रवेश द्वार खोला है।  यह फेफड़े के कैंसर को लेकर एक महत्वपूर्ण मार्ग दिखाता हैं। थर्डहैंड स्मोक (टीएचएस) घटक हैं जो तंबाकू के धुएं और इसके स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभावों से जुड़े मामलों को सामने लाता है। तम्बाकू के धुएं के संपर्क पर आने के ध्यान देने की आवश्यकता है, जिसमें त्वचा से, हाथ से मुंह में जाने और सहायक कणों को निगलना इनमें सांस लेना शामिल हैं जो सतहों से पुन: उत्सर्जन के बाद बनते हैं।