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65 हजार करोड़ रुपए का दिल्ली बजट : वायु प्रदूषण की महामारी के लिए सिर्फ 52 करोड़

केजरीवाल सरकार ने अपने बजट भाषण में कहा कि सरकार ने अगले पांच सालों में वायु प्रदूषण की मात्रा दो-तिहाई कम करने का लक्ष्य रखा है

By Vivek Mishra

On: Tuesday 24 March 2020
 
Photo: Samrat Mukharjee
Photo: Samrat Mukharjee Photo: Samrat Mukharjee

राष्ट्रीय राजधानी के पर्यावरणीय और प्रदूषण से जुड़े मुद्दे इस वर्ष भी अनसुलझे रह सकते हैं। हो सकता है कि दिल्ली सर्दियों के दौरान इस वर्ष भी ऑड-ईवन और वायु प्रदूषण के आपात स्तरों के दौरान लॉकडाउन रहे। दिल्ली सरकार ने वित्त वर्ष 2020-2021 के लिए  65,000 करोड़ रुपये के बजट का प्रस्ताव किया है लेकिन इसमें पर्यावरण व प्रदूषण में सुधार के लिए लिए कुल बजट में आधे फीसदी से भी कम का प्रस्ताव रखा है। आम लोगों के लिए सब्सिडी वाली बिजली-पानी की सुविधा इस वित्त वर्ष में भी जारी रहेगी।

बीते वित्त वर्ष में संशोधित बजट 54,800 करोड़ रुपये था, जबकि कुल बजट का प्रस्ताव 60 हजार करोड़ रुपये का था।

नोवेल कोविड-19 संक्रमण के भय वाले माहौल के बीच 23 मार्च, 2019 को बिना चर्चा के ही दिल्ली बजट प्रस्ताव पास हुआ। बजट में दिल्ली ब्रांडिंग नारे के साथ “केजरीवाल मॉडल ऑफ गवर्नेंस” के नाम से बजट की ब्रांडिंग की गई। ताजा कोरोना संक्रमण से लड़ाई के लिए 3 करोड़ रुपये के बजट का प्रावधान किया गया है। जबकि अगले वित्त वर्ष के लिए 50 करोड़ रुपये का प्रावधान करने का प्रस्ताव है।

दिल्ली बजट में “प्रदूषण नियंत्रण और पर्यावरण प्रबंधन योजना” के तहत वायु प्रदूषण से लड़ने के लिए 30 करोड़ रुपये का प्रस्ताव किया गया है। इस प्रावधान से दिल्ली में स्मॉग टावर लगाए जाएंगे। दरअसल स्मॉग टावर लगाने के लिए बीते वर्ष सुप्रीम कोर्ट ने ही सरकार को निर्देश दिए थे। वहीं, स्मॉग टावर के परिणाम पर पर्यावरण के जानकार पहले ही उंगली उठा चुके हैं। इसके परिणाम इतने सकारात्मक नहीं  पाए गए हैं।  

वहीं, इस बार दिल्ली बजट में 2 करोड़ रुपये की लागत से वायु प्रदूषण की रोकथाम और पर्यावरणीय नियमों पर अमल कराने के लिए एन्वयॉयरमेंट मार्शल नियुक्त करने की घोषणा हुई है।

केजरीवाल सरकार ने अपने बजट भाषण में यह दोहराया गया है कि सरकार के प्रयासों से  बीते वर्षों में वायु प्रदूषण में 25 फीसदी की कमी आई है और अगले पांच सालों में दो-तिहाई कम करने का लक्ष्य तय किया गया है। जागरुकता संबंधी सघन अभियान चलाने के लिए 20 करोड़ के प्रावधान की घोषणा हुई है।

इस तरह आधे फीसदी से भी कम कुल 52 करोड़ रुपये का प्रावधान दिल्ली की हवा को बेहतर बनाने के लिए किया गया है। 

वहीं, आउटकम बजट में बताया गया कि 2019, दिसंबर तक औद्योगिक ईकाइयां, पावर प्लांट, होटल आदि के जरिए उत्सर्जन के कुल 700 नमूने लिए जाने थे हालांकि सिर्फ 381 चिमनियों से उत्सर्जन की ही जांच  गई। इसमें एक भी विफल नहीं पाया गया। तय लक्ष्य का सिर्फ पचास फीसदी ही जांच संभव हुई।   

डाउन टू अर्थ ने बीते वर्ष, 2019 में हर तीन मिनट में पांच वर्ष से कम उम्र के एक बच्चे की मौत का विस्तृत विश्लेषण और ग्राउंड रिपोर्ट प्रकाशित की थी। इस मामले को संसद में भी उठाया गया। हालांकि, इस महामारी को अब भी उपेक्षित ही समझा जा रहा है।  

वन व हरित क्षेत्र, कीकर मुक्ति पर चुप्पी

वन व हरित क्षेत्र दायरे के मामले में दिल्ली सरकार ने कहा कि 2015 में 299.7 वर्ग किलोमीटर से यह बढ़कर 324.44 वर्ग किलोमीटर हो गई है। 2017 में दिल्ली सरकार ने राष्ट्रीय राजधानी को कीकर मुक्त बनाने का ऐलान किया था। अभी तक इस दिशा में कोई ठोस काम नहीं हो पाया है।  

2019 के आउटकम बजट के मुताबिक पूरे वर्ष में 1690 पार्क के लिए जहां 500 रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन को वित्तीय सहायता दी जानी थी वहीं, कुल 405 आरडब्ल्यूए को ही वित्तीय सहायता दी गई।

हरित क्षेत्र का दायरा बढ़ाने के लिए दिल्ली सरकार ने कुल 22 एजेंसियों से इस वित्त वर्ष में 40 लाख पौधे लगवाने की बात कही है लेकिन इसके लिए किसी तरह के फंड का जिक्र नहीं किया है।

पेयजल, यमुना और भू-जल 

दिल्ली सरकार ने जलापूर्ति और स्वच्छता के लिए बीते वित्त वर्ष के संशोधित बजट से 70 फीसदी ज्यादा बजट इस वित्त वर्ष के लिए प्रस्ताव किया गया है। इस वर्ष कुल बजट का 12.6 फीसदी यानी 3724 करोड़ रुपये का प्रस्ताव इसी मद में है। हालांकि, यह बढ़ा हुआ बजट अनाधिकृत कॉलोनियों, सीवर ट्रीटमेंट प्लांट, इंटरसेप्टर सीवरेज के लिए किया गया है। इसके अलावा दिल्ली जल बोर्ड 22 जलाशयों में सीवेज का उपचार करके पानी भरने की कवायद भी करेगी।

सरकार ने कहा कि अगले पांच वर्ष के भीतर दिल्ली के हर घर 24 घंटे स्वच्छ पेयजल पहुंचाने की बात दोहराई है। वहीं, पूरी दिल्ली में 3,341 बल्क वाटर मीटर लगाने की घोषणा भी की गई है। यमुना तट पर 4 एमजीडी क्षमता वाले 4 डिसेंट्रलाइज्ड वाटर ट्रीटमेंट प्लांट लगाने की घोषणा हुई है।

सिंचाई और बाढ़ नियंत्रण के तहत यमुना नदी को प्रदूषित करने वाला नजफगढ़, पूरक नाला और शाहदरा नाले प्रदूषित हो रहे हैं। इन नालों को साफ करने की बात बजट में की गई है हालांकि, इस वित्त वर्ष में नजफगढ़ नाले की सफाई से इसका आगाज किया जाएगा।

इस परियोजना के तहत ढ़ांसा बॉर्डर से बसई दारापुर पुल तक 45 किलोमीटर तक भू-जल स्तर बढ़ाने के लिए सतह की भंडारण क्षमता में वृद्धि के लिए गाद निकालने, नालों को गहरा करने, बांध व पार्क बनाने के लिए अगले तीन वर्ष में 2000 करोड़ रुपये खर्च होंगे। हालांकि, इस वित्त वर्ष में कुल 410 करोड़ रुपये खर्च होंगे।

बीते वर्ष शुरू की गई भू-जल स्तर में सुधार के लिए 1000 एकड़ क्षेत्र में पल्ला यमुना बाढ़ क्षेत्र में जलाशय के निर्माण की योजना के तहत सिर्फ 17.76 एकड़ क्षेत्र में काम हो पाया है। इस वर्ष परियोजना को पूरा करने के लिए 10 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।

 

 परिवहन  जारी है नई बसों का इंतजार

वायु प्रदूषण को कम करने क लिए सार्वजनिक परिवहन को मजबूत करने की मांग जब-तब उठती आई है लेकिन बीते दस वर्षों से दिल्ली की सड़कों पर नई बसें नहीं आ सकी हैं। मेट्रो किराए को सस्ता किए जाने के संबंध में किसी प्रकार के मदद की घोषणा नहीं की गई।  इस मद में 4328 करोड़ रुपये का कुल प्रावधान किया गया है। इनमें 250 करोड़ रुपये बहुप्रतीक्षित डीटीसी बसों और 1100 करोड़ रुपये क्लस्टर बसों के लिए है। इसके अलावा इलेक्ट्रिक बसों के लिए महज 50 करोड़ रुपये का बजट रखा गया है। मेट्रो के चौथे चरण का विस्तार करने के लिए 900 करोड़ रुपये का प्रस्ताव किया गया है।

 

स्वास्थ्य  अस्पताल के बेडों की क्षमता दोगुनी से ज्यादा करने का ऐलान

दिल्ली सरकार ने इस वित्त वर्ष के लिए स्वास्थ्य क्षेत्र का कुल बजट 7,704 करोड़ रुपये रखा है। यह कुल बजट का 13.4 फीसदी है। वहीं, सरकार ने कहा है कि वे 16 नए अस्पतालों के साथ  मौजूदा अस्पतालों को उन्नत करते हुए यहां बेडों की संख्या को 10 हजार से बढ़ाकर 26 हजार तक पहुचाएंगे। दिल्ली सरकार ने 2020-21 के बजट में  शिक्षा, स्वास्थ्य और सब्सिडी को ध्यान रखा है लेकिन हर बार की तरह पर्यावरण सुधार के कार्यक्रमों को प्राथमिकता में सबसे नीचे रखा है। खासतौर से वायु प्रदूषण को कम करने के लिए किसी नए और अन्वेषी ऐलान की उम्मीद लोगों को थी।