फरीदाबाद में 32 अंक बढ़कर 333 पर पहुंचा एक्यूआई, देहरादून में भी जानलेवा हुई हवा

हर गुजरते दिन के साथ फरीदाबाद में प्रदूषण का कहर बढ़ता जा रहा है। जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक बढ़कर 333 पर पहुंच गया है

By Lalit Maurya

On: Monday 22 January 2024
 

फरीदाबाद में वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) बढ़कर 333 पर पहुंच गया है। कल यानी 21 जनवरी 2024 को फरीदाबाद में वायु गुणवत्ता सूचकांक 301 दर्ज किया गया था, जबकि इससे पहले 20 जनवरी 2024 को जारी आंकड़ों से पता चला है कि उस दिन प्रदूषण का स्तर 233 रिकॉर्ड किया गया था।

वायु प्रदूषण के मामले में देहरादून भी ज्यादा पीछे नहीं है, जहां हवा जहरीली बनी हुई है। आलम यह है कि वहां वायु गुणवत्ता सूचकांक 82 अंकों के उछाल के साथ बढ़कर 310 पर पहुंच गया है।

कुल मिलकर देखें तो देश के 19 शहरों में बढ़ते प्रदूषण से हालात बेहद खराब हैं, जहां एक्यूआई 300 के पार है। इनमें अगरतला (330), आसनसोल (304), बालासोर (346), भागलपुर (323), भुवनेश्वर (322), बीकानेर (316), बर्नीहाट (308), चंडीगढ़ (330), छपरा (303), कटक (332) आदि शहर शामिल हैं।

वहीं यदि दिल्ली की बात करें तो कल के मुकाबले वहां प्रदूषण के स्तर में गिरावट जरूर आई है, लेकिन इसके बावजूद प्रदूषण का स्तर लोगों के बहुत ज्यादा बीमार करने के लिए पर्याप्त है। आंकड़ों की मानें तो देश के 63 शहरों में प्रदूषण से हालात बिगड़े हुए है। जहां वायु गुणवत्ता दमघोंटू बनी हुई है। दूसरी तरफ देश के महज 15 शहरों में हवा बेहतर है।

देश के सभी शहरों में कडपा में वायु गुणवत्ता सबसे साफ है, जहां सूचकांक 35 दर्ज किया गया है। हालांकि देखा जाए तो वहां भी वायु गुणवत्ता विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा तय मानकों पर पूरी तरह खरी नहीं है।

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा 22 जनवरी 2024 को जारी रिपोर्ट के मुताबिक, देश के 243 में से महज 15 शहरों में हवा 'बेहतर' (0-50 के बीच) रही। वहीं 61 शहरों में वायु गुणवत्ता 'संतोषजनक' (51-100 के बीच) थी, जबकि 104 शहरों में वायु गुणवत्ता 'मध्यम' (101-200 के बीच) रही।

बल्लभगढ़-भोपाल सहित 47 शहरों में प्रदूषण का स्तर दमघोंटू (201-300 के बीच) रहा, जबकि अगरतला-बालासोर सहित 15 शहरों में प्रदूषण का स्तर जानलेवा (301-400 के बीच) है। 

यदि दिल्ली की बात करें तो यहां वायु गुणवत्ता 'बेहद खराब' श्रेणी में है, जहां एयर क्वालिटी इंडेक्स 16 अंक बढ़कर 333 पर पहुंच गया है। दिल्ली के अलावा फरीदाबाद में इंडेक्स 333, गाजियाबाद में 274, गुरुग्राम में 245, नोएडा में 261, ग्रेटर नोएडा में 291 पर पहुंच गया है।

देश के अन्य प्रमुख शहरों से जुड़े आंकड़ों को देखें तो मुंबई में वायु गुणवत्ता सूचकांक 128 दर्ज किया गया, जो प्रदूषण के 'मध्यम' स्तर को दर्शाता है। जबकि लखनऊ में यह इंडेक्स 161, चेन्नई में 72, चंडीगढ़ में 330, हैदराबाद में 82, जयपुर में 172 और पटना में 287 दर्ज किया गया।  

देश के इन शहरों की हवा रही सबसे साफ 

देश के महज जिन 15 शहरों में वायु गुणवत्ता सूचकांक 50 या उससे नीचे यानी 'बेहतर' रहा, उनमें आइजोल 50, अमरावती 44, अरियालूर 43, बेलगाम 48, चामराजनगर 41, गंगटोक 44, कडपा 35, कोरबा 48, मदिकेरी 38, पालकालाइपेरुर 39, पुदुचेरी 43, थूथुकुडी 49, तिरुपति 49, उडुपी 43 और विजयपुरा 39 शामिल रहे।

वहीं अनंतपुर, अंकलेश्वर, बागलकोट, बरेली, बठिंडा, बेंगलुरु, बेतिया, भिलाई, ब्रजराजनगर, चेन्नई, छाल, चिकबलपुर, चिक्कामगलुरु, कोयंबटूर, कुड्डालोर, दावनगेरे, धारवाड़, एलूर, गडग , हसन, हुबली, हैदराबाद, इंफाल, कलबुर्गी, कन्नूर, कारवार, खन्ना, कोच्चि, कोहिमा, कोलार, कोप्पल, कुंजेमुरा, लातूर, महाड, मैहर, मंगलौर, मंगुराहा, मिलुपारा, मोतिहारी, मैसूर, नारनौल, नासिक, परभनी, रायपुर, रामानगर, रामनाथपुरम, सागर, सतना, शिवमोगा, सिलचर, शिवसागर, सूरत, टेंसा, तिरुवनंतपुरम, त्रिशूर, तिरुपुर, तुमिडीह, वाराणसी, वातवा, वृंदावन, और यादगीर आदि 47 शहरों में हवा की गुणवत्ता संतोषजनक रही, जहां सूचकांक 51 से 100 के बीच दर्ज किया गया। 

क्या दर्शाता है यह वायु गुणवत्ता सूचकांक, इसे कैसे जा सकता है समझा?

देश में वायु प्रदूषण के स्तर और वायु गुणवत्ता की स्थिति को आप इस सूचकांक से समझ सकते हैं जिसके अनुसार यदि हवा साफ है तो उसे इंडेक्स में 0 से 50 के बीच दर्शाया जाता है। इसके बाद वायु गुणवत्ता के संतोषजनक होने की स्थिति तब होती है जब सूचकांक 51 से 100 के बीच होती है। इसी तरह 101-200 का मतलब है कि वायु प्रदूषण का स्तर माध्यम श्रेणी का है, जबकि 201 से 300 की बीच की स्थिति वायु गुणवत्ता की खराब स्थिति को दर्शाती है।

वहीं यदि सूचकांक 301 से 400 के बीच दर्ज किया जाता है जैसा दिल्ली में अक्सर होता है तो वायु गुणवत्ता को बेहद खराब की श्रेणी में रखा जाता है। यह वो स्थिति है जब वायु प्रदूषण का यह स्तर स्वास्थ्य को गंभीर और लम्बे समय के लिए नुकसान पहुंचा सकता है।

इसके बाद 401 से 500 की केटेगरी आती है जिसमें वायु गुणवत्ता की स्थिति गंभीर बन जाती है। ऐसी स्थिति होने पर वायु गुणवत्ता इतनी खराब हो जाती है कि वो स्वस्थ इंसान को भी नुकसान पहुंचा सकती है, जबकि पहले से ही बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए तो यह जानलेवा हो सकती है। 

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