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दिल्ली वाले चुनाव से पहले नेताओं से ले रहे हैं साफ हवा का वादा

दिल्ली में 8 फरवरी को चुनाव हैं। इसबीच कई नागरिक समूह मिलकर सभी राजनीतिक पार्टियों और आम लोगों के बीच संवाद स्थापित कर रहे हैं। नेताओं से स्वच्छ हवा का वादा दिलवाकर उनकी जवाबदेही तय की जा रही है।

By Vivek Mishra

On: Monday 27 January 2020
 
Photo : Down to Earth
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वायु प्रदूषण हम औरतों और हमारे बच्चों के लिए घातक है। हमारे आस-पास बच्चे बीमार पड़ रहे हैं और इसी कारण वे बराबर स्कूल भी नहीं जा पाते। तमाम शोध और अध्ययन यह बता रहे हैं कि वायु प्रदूषण के कारण हमें किसी लंबी बीमारी का भी शिकार होना पड़ सकता है। ऐसे में जरूरी है कि हम महिलाएं न सिर्फ अपनी चुप्पी तोड़ें बल्कि वायु प्रदूषण के विरुद्ध आवाज उठाएं।

यह बाते रेखा झींगन की हैं। वे नागरिक संगठन सहज संभव की निदेशक हैं। दिल्ली चुनाव से पहले वे दिल्ली कैंटोन्मेंट के एक टाउन हॉल की पब्लिक मीटिंग में शामिल हुईं। उन्होंने वहां मौजूद सभी पार्टियों के जनप्रतनिधियों से कहा कि दिल्ली में वायु प्रदूषण एक हेल्थ एमरजेंसी है और इसका निदान भी ठोस तरीके से किया जाना चाहिए। यदि ऐसा नहीं होता है तो महिलाएं इसके विरुद्ध सड़कों पर उतरेंगी।  

वहीं, दिल्ली के एक दूसरे इलाके करावल नगर की टाउन हॉल मीटिंग में फेडरशेन ऑफ रिक्शापुलर एसोसिएशन के महासचिव विघ्नेश झा ने कहा कि इलेक्ट्रॉनिक रिक्शा चलाने वाले 24 घंटे घातक वायु प्रदूषण के दायरे में रहते हैं। दिल्ली के सार्वजनिक परिवहन में इलेक्ट्रॉनिक रिक्शा एक बड़ी भूमिका बना चुका है। इसके जरिए प्रदूषण की समस्या का भी कुछ हद तक निदान संभव है। इसे राजनीतिक पार्टियों के जरिए न सिर्फ बढ़ावा दिया जाना चाहिए बल्कि चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर आदि को लेकर कदम उठाए जाने चाहिए।

दरअसल दिल्ली में 8 फरवरी को चुनाव हैं। इसबीच कई नागरिक समूह मिलकर सभी राजनीतिक पार्टियों और आम लोगों के बीच संवाद स्थापित कर रहे हैं। नेताओं से स्वच्छ हवा का वादा दिलवाकर उनकी जवाबदेही तय की जा रही है। माई राइट टू ब्रीथ के तहत यह नागरिक आंदोलन किया जा रहा है। इसकी शुरुआत 27 जनवरी को करावल नगर से हुई है। यह दिल्ली की 15 विधानसक्षा क्षेत्रों के टाउन हॉल में होगी। इनमें मंगोलपुरी, आरकेपुरम, रिठाला, द्वारका, बदरपुर, विकासपुरी, पटपड़गंज, किरारी, लक्ष्मीनगर, नांगलोई, रोहिणी, घोंडा और कालकाजी शामिल हैं। 

माई राइट टू ब्रीद नागरिक संगठनों की ओर से कहा गया कि राजधानी दिल्ली दुनिया में सर्वाधिक प्रदूषित शहरों की सूची में शामिल है। वहीं महीन कणों वाले पार्टिकुलेट मैटर के प्रदूषण के चलते रोजाना करीब 80 लोगों की मौत होती है। वायु प्रदूषण की बहस को आम लोगों के बीच ले जाने की जरूरत है। इसीलिए चुनाव के समय में प्रत्याशियों की जवाबदेही और वायु प्रदूषण के मुद्दे पर आमजन को जागरुक किया जा रहा है।