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एनजीटी ने मध्यप्रदेश प्रदूषण बोर्ड को क्यों लगाई फटकार, जानें और भी बहुत कुछ

विभिन्न अदालतों में पर्यावरण से संबंधित मामलों की सुनवाई के दौरान क्या कुछ हुआ, यहां पढ़ें-

By Susan Chacko, Dayanidhi

On: Monday 14 September 2020
 

 

नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (एमपीपीसीबी) को मेसर्स ग्रासिम केमिकल डिवीजन लिमिटेड, बिरलाग्राम, नागदा, जिला उज्जैन, मध्य प्रदेश द्वारा प्रदूषण के आरोप की रिपोर्ट प्रस्तुत करने में देरी के लिए फटकार लगाई। जिसमें जल प्रदूषण, पर्यावरण और सार्वजनिक स्वास्थ्य को नुकसान होना बताया गया था।

एनजीटी ने उल्लेख किया कि कई बार याद दिलाने और एक वर्ष पूरा होने पर भी, एमपीपीसीबी द्वारा कोई रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं की गई। अब एसपीसीबी के सचिव को 12 अक्टूबर, 2020 को ट्रिब्यूनल के समक्ष रिपोर्ट के साथ मौजूद रहने का निर्देश दिया गया है।

 

मेरठ में ग्रीन बेल्ट पर अतिक्रमण 

नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने 11 सितंबर को मेरठ विकास प्राधिकरण (एमडीए) को अवैध अतिक्रमणों के खिलाफ तीन महीने के अंदर आगे की कार्रवाई करने का निर्देश दिया।

इसके अलावा, कार्रवाई की रिपोर्ट को एनजीटी द्वारा गठित इलाहाबाद उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश एस. वी. राठौर की अध्यक्षता वाली निरीक्षण समिति को 31 दिसंबर तक सौंपना होगा। तत्पश्चात, इस मामले की निगरानी निरीक्षण समिति द्वारा की जाएगी।

डॉ. अजय कुमार द्वारा आरक्षित भूमि के अतिक्रमण को लेकर अदालत में एक याचिजा दायर की गई थी। याचिका में कहा गया था कि खडौली, बागपत रोड ओवर ब्रिज, प्रस्तावित बस स्टैंड, राष्ट्रीय राजमार्ग -58, मेरठ के उपमार्ग (बाय-पास), मोदीपुरम से खिरवा बाय-पास रोड और भोला रोड पर, गांव सुदपुर में भूमि पर अतिक्रमण किया गया है। 

जिला मजिस्ट्रेट, मेरठ, एमडीए नगर आयुक्त, मेरठ और उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (यूपीपीसीबी) द्वारा मामले पर की गई कार्रवाई की रिपोर्ट प्रस्तुत की गई थी।

रिपोर्ट के माध्यम से ट्रिब्यूनल को सूचित किया गया कि एमडीए ने उत्तर प्रदेश शहरी योजना और विकास के तहत संबंधित प्रावधान के अनुसार मेरठ मास्टर प्लान 2021 में पार्कों, खुली जगहों और ग्रीन बेल्ट के लिए प्रस्तावित क्षेत्रों के साथ विभिन्न क्षेत्रों में अनधिकृत निर्माण के खिलाफ अधिनियम, 1973 के तहत 255 नोटिस जारी करके कार्रवाई की थी।

पूर्वोक्त प्रावधानों के अनुसार अनधिकृत अवैध निर्माण को सील करने और गिराने की कार्यवाही जारी है। अब तक 8 अनधिकृत निर्माणों को सील कर दिया गया है। 50 अनधिकृत निर्माणों को गिराने के आदेश पारित किए गए हैं - जिसमें कानून में निर्धारित अवधि के बाद इन्हें भी गिराया जाएगा।

 

देहरादून के चकराता मामले की सुनवाई

देहरादून के चकराता में टूनी चांदनी मोटर मार्ग निर्माण कार्य से उत्पन्न पत्थरों और कूड़ा-कर्कट के अवैज्ञानिक निपटान के मामले की सुनवाई 11 सितंबर को नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) के न्यायमूर्ति आदर्श कुमार गोयल और सोनम फेंटसो वांग्दी की पीठ ने की।

याचिकार्कता दर्शन टीका राम डोभाल ने बताया कि वन क्षेत्र में निर्माण कचरा डंप किया जा रहा था। सड़क के निर्माण के लिए जिम्मेदार उत्तराखंड लोक निर्माण विभाग (यूपीडब्ल्यूडी) आवश्यक सुरक्षा उपायों का पालन नहीं कर रहा है, जिसके परिणामस्वरूप पर्यावरण को नुकसान हो रहा है।

याचिकार्कता ने अपनी याचिका में सबूत के तौर पर अधिकारियों से इस बारे में की गई शिकायतों की प्रतियां और तस्वीरें भी प्रस्तुत कीं।

एनजीटी ने उत्तराखंड के प्रधान मुख्य वन संरक्षक (एचओएफएफ) और उत्तराखंड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से एक तथ्यात्मक और कार्रवाई की रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। इस मामले को फिर से 8 दिसंबर को अदालत के समक्ष सूचीबद्ध किया जाएगा।

बिना ट्रीटमेंट सीवेज का निपटान

नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने 11 सितंबर, 2020 को पंजाब पोल्यूशन कंट्रोल बोर्ड (पीपीसीबी) के उस निर्णय को गलत बताया जिसमें पीपीसीबी द्वारा ग्राम कोट खुर्द के बाहरी इलाके में एक तालाब में अपशिष्ट जल / अपशिष्ट को छोड़ने की अनुमति दी गई थी। एनजीटी ने इसे (जल प्रदूषण की रोकथाम और नियंत्रण) अधिनियम, 1974 का उल्लंघन बताया है।

आदेश में कहा गया है कि तालाब में अपशिष्ट जल को बिना उपचार किए नहीं छोड़ा जा सकता है। राज्य पीसीबी द्वारा यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए था कि भूजल दूषित हो। इसके अलावा, अदालत ने पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति जसबीर सिंह की अध्यक्षता वाली समिति से पूछा, जिसे इन पहलूओं, जिसमें पंजाब राज्य में कुछ पर्यावरणीय मुद्दों की निगरानी करने के लिए नियुक्त किया गया है।

4 मार्च के एनजीटी के आदेश में पीपीसीबी से ग्राम कोट खुर्द में आवासीय क्षेत्र से गंदे कीचड़ और सीवेज के पानी को निकालने के आरोप के संदर्भ में एक तथ्यात्मक और की गई कार्रवाई की रिपोर्ट मांगी गई थी। तदनुसार, पीपीसीबी ने 1 सितंबर को अपनी रिपोर्ट सौंपी, इसके बात पंचायती राज विभाग ने इस मामले पर निर्णय लिया।

निर्णय में गांव के बाहरी हिस्से में स्थित तालाब में छोड़े जाने वाले सीवेज प्रवाह को एक सीवेज लाइन से जोड़ने की योजना तैयार करना शामिल था।

अल्मोड़ा का मोटर मार्ग

उत्तराखंड के द्वाराहाट तहसील, जिला अल्मोड़ा, कोटिला-गवाड़-सुरैखेत मोटर मार्ग के निर्माण में पर्यावरणीय मानदंडों का उल्लंघन होने की शिकायत पर कार्रवाई करते हुए, एनजीटी ने 11 सितंबर को निर्देश दिया कि एक तथ्यात्मक और की गई कार्रवाई की पूरी रिपोर्ट प्रस्तुत की जानी चाहिए। उत्तराखंड के प्रधान मुख्य वन संरक्षक (एचओएफएफ), और राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (एसपीसीबी) रिपोर्ट के लिए जिम्मेदार होंगे।

अदालत ने निर्देश दिया कि समन्वय और अनुपालन के लिए पीसीसीएफ (एचओएफएफ), उत्तराखंड नोडल एजेंसी होगी और दो महीने के भीतर रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी।

आरोप लगाया गया था कि सड़क के निर्माण के दौरान बड़ी संख्या में पेड़ क्षतिग्रस्त हो रहे थे और अधिकारियों के पास दर्ज शिकायतों के बावजूद, कोई सुधारात्मक कार्रवाई नहीं की गई। उत्तराखंड वन विकास निगम द्वारा मेसर्स करैरा कंस्ट्रक्शन फर्म के माध्यम से सड़क का निर्माण किया जा रहा है। याचिकाकर्ता जगदीश चंद्र पांडे ने तस्वीरें और शिकायतों की प्रतियों भी प्रस्तुत की हैं।