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पर्यावरण मुकदमों की डायरी: घर से 200 मीटर की दूरी पर खनन के लिए हो सकता है ब्लास्ट

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने एनजीटी के समक्ष 'पत्थर खदान की अनुमति के लिए दूरी संबंधी मानदंड' पर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की।

By Susan Chacko, Dayanidhi

On: Monday 20 July 2020
 

हिमालयन फूड पार्क द्वारा जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क के पास किया जा रहा है नियमों का उल्लंघन

नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने 17 जुलाई, 2020 को उत्तराखंड पर्यावरण संरक्षण और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और जिला मजिस्ट्रेट, उधम सिंह नगर को जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क के पास पर्यावरणीय मानदंडों के उल्लंघन में संचालित हिमालयन फूड पार्क प्राइवेट लिमिटेड के मामले पर एक रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया।

आवेदक - विजय कुमार मल्होत्रा ने कहा था कि कॉम्प्लेक्स के चारों ओर तो ग्रीन बेल्ट विकसित की गई है और ही एक प्रभावी ट्रीटमेंट प्लांट स्थापित किया गया है। ग्रीन बेल्ट के विकास के लिए कोई अतिरिक्त भूमि भी उपलब्ध नहीं कराई गई है।

आवासीय भवनों से कम से कम 200 मीटर की दूरी पर हो सकती है पत्थर खदान

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) ने एनजीटी के समक्ष 'पत्थर खदान की अनुमति के लिए दूरी संबंधी मानदंड' पर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की।

रिपोर्ट 28 फरवरी के अदालती आदेश के मद्देनजर थी, जिसमें पत्थर की खदानों के लिए 50 मीटर की दूरी का हवाला दिया गया था, खासकर जब इसमें ब्लास्टिंग का उपयोग किया जाना हो।

एनजीटी का विचार था कि इस तरह की छोटी दूरी से "ध्वनि और वायु प्रदूषण, पर्यावरण और सार्वजनिक स्वास्थ्य पर घातक प्रभाव" हो सकता है और सीपीसीबी को निर्देश दिया गया है कि वह इन परिस्थितियों की जांच और उचित दूरी तय करे, यही निर्देश राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को देने को कहा गया।

सीपीसीबी ने पत्थर खदान के लिए 100 मीटर की न्यूनतम दूरी की सिफारिश की है, जिसमें ब्लास्टिंग शामिल नहीं है, इसमें आवासीय, सार्वजनिक भवनों, बसे हुए स्थलों, संरक्षित स्मारकों, सार्वजनिक सड़कों, रेलवे लाइनों, पुलों, बांधों, जलाशयों, नदियों, झीलों या किसी अन्य स्थान शामिल नहीं होने चाहिए। सीपीसीबी ने कहा यदि ब्लास्टिंग शामिल होगी तो आवासीय भवनों से 200 मीटर की न्यूनतम दूरी और अन्य का पालन किया जाना चाहिए।

सीपीसीबी ने यह भी कहा कि यदि कोई भी राज्य पहले से ही अधिक कठोर मानदंडों का पालन कर रहा हो जिसे सीपीसीबी ने लघु खनिज खनन के लिए प्रस्तावित किया है, तो राज्यों द्वारा उसे लागू किया जा सकता है।

रिपोर्ट 20 जुलाई को एनजीटी की साइट पर अपलोड की गई।

बायो-मेडिकल वेस्ट ट्रीटमेंट फैसिलिटी के मानकों के उल्लंघन पर डीपीसीसी की रिपोर्ट

दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (डीपीसीसी) ने कॉमन बायो-मेडिकल वेस्ट ट्रीटमेंट फैसिलिटी (सीबीडब्ल्यूटीएफ) के संचालक मैसर्स एसएमएस वाटर ग्रेस बीएमडब्ल्यू प्राइवेट लिमिटेड पर पर अपनी रिपोर्ट सौंपी। रिपोर्ट, इकाई निर्धारित पर्यावरणीय मानदंडों का पालन कर रही है या नहीं इस पर थी।

डीपीसीसी ने पाया कि पार्टिकुलेट मैटर (पीएम), नाइट्रोजन डाइऑक्साइड (एनओ 2), कुल पॉलीक्लोराइनेटेड डाय-बेंजो डाइऑक्सिन और फुरान निर्धारित मानकों से अधिक पाए गए।

इकाई को कारण बताओ नोटिस नोटिस 9 जनवरी को जारी किया गया था। नोटिस में पूछा गया था कि बायो-मेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट रूल्स, 2016 के तहत प्राधिकरण द्वारा दी गई मंजूरी को क्यों न वापस ले लिया जाए, जारी किए गए निर्देशों की अनदेखी नहीं की जानी चाहिए थी। इसके अलावा, निर्धारित मानकों को पूरा किए बिना संचालन कैसे किया जा रहा था, क्यों इकाई पर पर्यावरणीय क्षति मुआवजा लगाया जाय। 

कारण बताओ नोटिस के जवाब में, वेस्ट कंपनी ने 28 जनवरी और 3 फरवरी को अपना जवाब प्रस्तुत किया। सीबीडब्ल्यूटीएफ संचालक द्वारा प्रस्तुत स्टैक निगरानी रिपोर्टों के अनुसार, उत्सर्जन निर्धारित मानकों के अंदर बताया गया।

हालांकि, यह साफ था कि सीबीडब्ल्यूटीएफ संचालक के उल्लंघन के पता लगने और बाद में 30 दिसंबर 2019 को किए गए स्टैक मॉनिटरिंग के बीच की अवधि के दौरान उत्सर्जन मानकों को पूरा किए बिना इकाई चल रही थी, जबकि इकाई ने बताया कि वह उत्सर्जन मानकों को पूरा कर रहे थे।

तदनुसार, पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति रुपये 4,00,000/- (चार लाख रुपये) का मूल्यांकन किया गया था और 20 मार्च को सीबीडब्ल्यूटीएफ संचालक को इसकी जानकारी दे दी गई थी।

रिपोर्ट में कहा गया है कि सीबीडब्ल्यूटीएफ संचालक ने उपरोक्त डीपीसीसी के निर्देशों के अनुपालन में 4 लाख रुपये का पर्यावरण मुआवजा जमा किया था। एम / एस एसएमएस वाटर ग्रेस बीएमडब्ल्यू प्राइवेट लिमिटेड द्वारा खुली जगह में अस्पताल के कचरे को जलाने और भंडारण के संबंध में अमृतपुरी रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन से 27 अप्रैल को ईमेल के माध्यम से एक और शिकायत प्राप्त हुई थी।

शिकायत में आरोपों को सत्यापित करने और यह देखने के लिए कि क्या सीबीडब्ल्यूटीएफ ने 18 अप्रैल को सीपीसीबी द्वारा जारी दिशानिर्देशों का पालन किया है या नहीं, कोविड-19 महामारी से उत्पन्न कचरे के सुरक्षित संचालन, उपचार और निपटान के बारे में सीबीडब्ल्यूटीएफ का निरीक्षण 2 मई को किया गया था।

निरीक्षण के दौरान, सीबीडब्ल्यूटीएफ के परिसर में बायोमेडिकल कचरे के जलाने का कोई भी सबूत नहीं मिला। साथ ही, शिकायत में कथित रूप से खुले स्थान पर भी बायोमेडिकल कचरा संग्रहीत नहीं किया गया था।

झांसी में बायोमेडिकल वेस्ट ट्रीटमेंट फैसिलिटी पर नियमों की अनदेखी करने पर लगा जुर्माना

मेसर्स मेडिकल पॉल्यूशन कंट्रोल कमेटी (सीबीएमडब्ल्यूटीएफ), ग्रोथ सेंट्रल, इंडस्ट्रियल एरिया, बिजोली, झांसी द्वारा बायोमेडिकल कचरे के अवैज्ञानिक निपटान के लिए उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (यूपीपीसीबी) द्वारा 7,41,000 रुपये का पर्यावरण मुआवजा लगाया गया। इकाई को इसकी जानकारी 17 जुलाई को पत्र के माध्यम से दी गई। इकाई को अपने नियमित कामकाज के साथ-साथ संयंत्र में आवश्यक सुधारों को तुरंत करने के लिए भी निर्देशित किया गया, ताकि सीबीडब्ल्यूटीएफ के प्रभावी संचालन को सुनिश्चित किया जा सके।

यूपीपीसीबी द्वारा 3 जून को सीबीडब्ल्यूटीएफ का निरीक्षण किया गया और निरीक्षण के समय, खुली भूमि पर परिसर के भीतर 265.760 किलोग्राम कचरे को अवैज्ञानिक तरीके से संग्रहीत किया गया था।

यह देखा गया कि बायोमेडिकल भंडारण क्षेत्र, कचरा-भट्ठी (इंसीनरेटर शेड), वाहन धुलाई और फर्श को धोने की प्रक्रिया के कारण उत्पन्न अपशिष्ट को ट्रीटमेंट प्लांट (ईटीपी) में एकत्रित नहीं किया गया क्योंकि यह चालू नहीं था।

परिसर के भीतर वाहनों की धुलाई की जा रही थी और उत्पन्न होने वाले अपशिष्ट को परिसर के अंदर जमीन पर बहाया जा रहा था। इसके अलावा, स्लज सुखाने वाले तल पर कोई स्लज नहीं निकल रहा था।

राख जो बायोमेडिकल कचरे के जलाने से उत्पन्न हुई थी, को कवर नहीं किया गया था, इसे सीबीडब्ल्यूटीएफ परिसर के एक खुले स्थान पर एकत्र किया जा रहा था और राख आस-पास के क्षेत्रों के वातावरण में फैल रही थी। बारिश होने की स्थिति में, इसके परिसर के बाहर बहने की संभावना है और यह झांसी के पास के बिजोली क्षेत्र में जल प्रदूषण का कारण बन सकता है।