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पर्यावरण मुकदमों की डायरी: सीआरडब्ल्यूसी गोदामों में प्रदूषण राेकने के इंतजाम का दावा

सभी सीमेंट कंपनियों द्वारा सीआरडब्ल्यूसी पर अपना माल उतारने की एक व्यवस्थित योजना प्रस्तुत की गई है

By Susan Chacko, Dayanidhi

On: Monday 22 June 2020
 

10 जनवरी, 2020 के नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) के आदेश के अनुपालन में, दिल्ली के शकूरबस्ती रेलवे स्टेशन के पास सीमेंट की लोडिंग / अनलोडिंग के कारण वायु प्रदूषण को कम करने के लिए उठाए गए कदमों पर सेंट्रल रेलसाइड वेयरहाउस कंपनी (सीआरडब्ल्यूसी) ने एक रिपोर्ट जमा कराई है।

रिपोर्ट के माध्यम से ट्रिब्यूनल को सूचित किया गया कि सीआरडब्ल्यूसी ने गोदामों को कवर किया है जो सीमेंट की धूल उड़ने से बचाते हैं। वायु प्रदूषण को रोकने और उड़ने वाली धूल को नियंत्रित करने के लिए उचित कदम उठाए हैं। श्रमिकों के स्वास्थ्य की जांच के लिए अंशकालिक चिकित्सक भी तैनात किए गए हैं। पर्यावरण में धूल को नियंत्रित करने के लिए टर्मिनल पर वृक्षारोपण भी किया गया है।

सीआरडब्ल्यूसी ने अपनी संबंधित सीमेंट उपयोगकर्ता कंपनियों यानी एम/एस एसीसी सीमेंट, एम/एस वंडर सीमेंट, एम/एस मंगलम सीमेंट औे एम/एस अम्बुजा सीमेंट की गतिविधि में लगे अपने श्रमिकों को बोरियों को संभालने के लिए शिक्षित और संरक्षित करने के लिए व्यवस्थित योजना को लागू करने के लिए कहा। इसके अनुसरण में, सभी सीमेंट कंपनियों द्वारा सीआरडब्ल्यूसी पर अपना माल उतारने की एक व्यवस्थित योजना प्रस्तुत की गई है।

झील प्रदूषण रोकने पर एनजीटी ने लगाया 15 लाख का जुर्माना

कर्नाटक राज्य और नगर परिषद, बोम्मासंद्र पर 19 जून, 2020 को नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) द्वारा 15 लाख रुपये का अंतरिम मुआवजा देने का निर्देश दिया गया है। किठिगानहल्ली झील के प्रदूषण को रोकने में अधिकारियों की ओर से निष्क्रियता के कारण जुर्माना लगाया गया। 

कर्नाटक राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा दायर एक रिपोर्ट में नगर परिषद, बोम्मासंद्र द्वारा खुले नालों के माध्यम से सीवेज के अनियमित तरीके से बहकर झील में मिलने से होने वाली क्षति को स्वीकार किया गया है। केआईएडीबी औद्योगिक क्षेत्र से भी सीवेज बहकर झील में मिलने की बात सामने आई है।

एनजीटी के आदेश और संबंधित अतिरिक्त मुख्य सचिव, कर्नाटक द्वारा तीन महीने के भीतर संबंधित कंपनियों के साथ समन्वय के बाद दायर की गई रिपोर्ट के अनुसार, अधिकारियों द्वारा आगे की सुधारात्मक कार्रवाई तेजी से किए जाने, जल निकाय में किसी भी प्रदूषक के मिलने से रोकने के लिए र्निदेशित किया गया है।

सुप्रीम कोर्ट ने कोविड-19 रोगियों की देखभाल के लिए विशेषज्ञ समिति गठित करने का दिया निर्देश

सुप्रीम कोर्ट ने 19 जून को स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय को राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीटी), दिल्ली  के सभी सरकारी अस्पतालों, कोविड अस्पतालों और अन्य अस्पतालों का निरीक्षण करने और आवश्यक दिशा-निर्देश जारी करने के लिए एक विशेषज्ञ समिति गठित करने का निर्देश दिया।

विशेषज्ञ समितियों को यह सुनिश्चित करने को कहा गया कि प्रत्येक अस्पताल में साप्ताह में कम से कम एक बार निरीक्षण किया जाय।

सभी राज्यों को कोविड-19 का इलाज कर रहे सरकारी अस्पतालों और अन्य अस्पतालों के निरीक्षण और मार्गदर्शन के लिए डॉक्टरों और अन्य विशेषज्ञों की एक विशेषज्ञ टीम गठित करने का आदेश दिया गया था।

प्रत्येक राज्य के मुख्य सचिव को यह सुनिश्चित करने को कहा गया कि ऐसी समितियां तुरंत गठित की जाएं, ताकि वे सात दिनों की अवधि के भीतर अपना काम शुरू कर सकें।

इसके अलावा, केंद्र सरकार को सभी राज्यों / केंद्र शासित प्रदेशों को उचित दिशा-निर्देश / निर्देश जारी करने का काम सौंपा गया है, जिसमें विभिन्न कोविड से संबंधित सुविधाओं / परीक्षण की उचित दरों को निर्धारित करने के संबंध में है, जिसका सभी संबंधितों द्वारा समान रूप से पालन किया जाय।

ट्रिडेंट कॉम्प्लेक्स में उपचारित (ट्रीटेड) पानी का उपयोग वृक्षारोपण और सिंचाई के लिए किया जाना चाहिए

पंजाब पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड ने ट्राइडेंट कॉम्प्लेक्स पर अपनी रिपोर्ट में मेसर्स ट्रिडेंट लिमिटेड, मानसा रोड, गांव धौला, जिला बरनाला के नौ उद्योगों को शामिल किया है। रिपोर्ट में इन उद्योगों का पर्यावरणीय ऑडिट का गहन अध्ययन करने की सिफारिश की गई है। विशेष रूप से कैप्टिव पावर प्लांट और टॉवल डिवीजन के पर्यावरण मानकों के अनुपालन की स्थिति का आकलन करने के संबंध में।

मेसर्स ट्राइडेंट लिमिटेड को धीरे-धीरे पानी की खपत और एफ्लूअन्ट को कम करने के लिए कहा गया है। उपचारित अपशिष्ट पानी का उपयोग वृक्षारोपण और सिंचाई के लिए उपयोग किया जाना चाहिए। 

रिपोर्ट में यह भी सिफारिश की गई है कि उद्योग द्वारा उपचारित पानी का अधिकतम उपयोग परिसर के भीतर बगीचे की सिंचाई में, वृक्षारोपण आदि मे किया जाना चाहिए, इसके लिए वैज्ञानिक विधि अपनाई जानी चाहिए।

समिति ने चंडीगढ़ नगर निगम को घर-घर जाकर 100 फीसदी कचरे को इकट्ठा कर उसे अलग-अलग कर उचित तरीके से प्रबंधन करने को कहा

चंडीगढ़ में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के मुद्दे पर न्यायमूर्ति प्रीतम पाल की अध्यक्षता में एक निगरानी समिति की रिपोर्ट 22 जून को एनजीटी की साइट पर अपलोड की गई।

जिन मुद्दों को समिति ने निबटाया, उनमें से एक 25000 मीट्रिक टन पुराना असंसाधित ठोस अपशिष्ट पदार्थ था, जो नगर निगम, चंडीगढ़ के ठोस अपशिष्ट प्रसंस्करण संयंत्र में काफी जगह को घेरे हुए था।

समिति ने निगम द्वारा अपशिष्ट पदार्थ को हटाने और संयंत्र में ठोस कचरे को अलग-अलग करने की सिफारिश की।

समिति ने अपने सिफारिश में कहा कि नगर निगम, चंडीगढ़ को घर-घर जाकर 100 फीसदी कचरे को इकट्ठा कर उसे अलग-अलग करना शुरू करना चाहिए समिति द्वारा यह भी सिफारिश की गई कि नगर निगम को शहर के 100 फीसदी गीले कचरे और बागवानी कचरे को संसाधित करने के लिए पर्याप्त संख्या में कम्पोस्ट पिटों का निर्माण करना चाहिए।

घरेलू खतरनाक कचरे को अलग किया जाना चाहिए और उसका निपटान टीएसडीएफ, निंबुआ में किया जाना चाहिए। इसी तरह ठोस कचरे को  सेनेटरी लैंडफिल साइट में वैज्ञानिक तरीके से डंप किया जाना चाहिए। लैंडफिल साइट में किसी भी तरह का असंसाधित कचरा नहीं डाला जाना चाहिए। पुराने अपशिष्ट स्थल पर डंप किए गए ठोस अपशिष्ट के प्रसंस्करण को भी जल्द पूरा किया जाना चाहिए।