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ईंधन में बदल जाएगा गाड़ियों से निकलने वाला कार्बन, वैज्ञानिकों ने इजाद की तकनीक

शोधकर्ताओं ने एक नई तकनीक इजाद की है, जो वाहनों से होने वाले कार्बन डाइऑक्साइड (सीओ2) उत्सर्जन में लगभग 90 फीसदी की कटौती कर सकती है

By Dayanidhi

On: Friday 10 January 2020
 
Photo: Vikas Choudhary
Photo: Vikas Choudhary Photo: Vikas Choudhary

स्विट्जरलैंड स्थित इकोले पॉलीटेक्निक फ्रेडेरेल डे लौसेन (ईपीएफएल) के शोधकर्ताओं ने एक नई तकनीक इजाद की है। यह तकनीक वाहनों से कार्बन डाइऑक्साइड (सीओ2) उत्सर्जन में लगभग 90 फीसदी की कटौती कर सकती है। वाहनों से निकलने वाली सीओ2 को सीधे कैप्चर किया जाता है। इसके बाद इसे तरल में परिवर्तित कर वाहन की छत पर एक बॉक्स में एकत्रित किया जाता है। एकत्रित किए गए तरल सीओ2 को सर्विस स्टेशन पर पहुंचा कर इसे अक्षय ऊर्जा का उपयोग करके ईंधन में बदला जाता है।

इस परियोजना को फ्रांकोइस मार्चल की अगुवाई में ईपीएफएल के स्कूल ऑफ इंजीनियरिंग, औद्योगिक प्रक्रिया और ऊर्जा प्रणाली इंजीनियरिंग समूह द्वारा किया जा रहा है। यह शोध फ्रंटियर्स इन एनर्जी रिसर्च पत्रिका में प्रकाशित हुआ है।

कैसे किया जाता है वाहन पर सीओ2 को एकत्र

वैज्ञानिकों ने सीओ2 को कैप्चर करने के लिए ईपीएफएल में विकसित कई तकनीकों को एक साथ उपयोग किया है। यह ऐसी प्रक्रिया है जो गैस को तरल में बदल देता है। इसके साथ-साथ पानी के जहाज पर उपलब्ध अधिकांश ऊर्जा, जैसे कि इंजन से उष्मा प्राप्त करता है। इस अध्ययन में, वैज्ञानिकों ने एक डिलीवरी ट्रक का उदाहरण लिया है।

सबसे पहले, वाहन के निकास पाइप में से निकलने वाली गैसों को पानी से ठंडा किया जाता है, फिर पानी को गैसों से अलग किया जाता है। सीओ2 अन्य गैसों (नाइट्रोजन और ऑक्सीजन) से टेम्परेचर स्विंग अडसोर्प्शन सिस्टम के साथ अलग-अलग होती है। धातु-कार्बनिक ढ़ाचे (एमओएफ) का उपयोग करके, सीओ2 को अवशोषित किया जाता है। वेन्गी क्वीन के नेतृत्व में ईपीएफएल टीम द्वारा इन सामग्रियों को विकसित किया जा रहा है। एक बार जब सामग्री सीओ2 के साथ मिल जाती है, इसे गर्म किया जाता है ताकि शुद्ध सीओ2 को इससे निकाला जा सके।

ईपीएफएल के नेउचाटेल कैंपस में जुर्ग स्किफमैन की प्रयोगशाला द्वारा विकसित उच्च गति टर्बो कंप्रेशर्स वाहन के इंजन से निकले सीओ2 को अलग करने और इसे एक तरल में बदलने के लिए गर्मी का उपयोग करते हैं। उस तरल को एक टैंक में संग्रहीत किया जाता है और फिर अक्षय ऊर्जा का उपयोग करके सर्विस स्टेशनों पर इसे पारंपरिक ईंधन में परिवर्तित किया जाता है।

यह पूरी प्रक्रिया ड्राइवर के केबिन के ऊपर रखे 2 मीटर x 0.9 मीटर x 1.2 मीटर के एक कैप्सूल की आकृति के डिब्बे के अंदर होती है। मारचेल ने कहा, कैप्सूल और टैंक का वजन वाहन के भार का केवल 7 प्रतिशत होता है। इस प्रक्रिया में बहुत कम ऊर्जा का उपयोग होता है।

शोधकर्ताओं की गणना से पता चलता है कि 1 किलो पारंपरिक ईंधन का उपयोग करने वाला एक ट्रक 3 किलोग्राम तरल सीओ2 पैदा कर सकता है, और इसके रूपांतरण में कोई अतिरिक्त ऊर्जा नहीं लगती है। ट्रकों से होने वाले सीओ2 उत्सर्जन का केवल 10% पुनर्नवीनीकरण नहीं किया जा सकता है।

यह प्रणाली सैद्धांतिक रूप से सभी ट्रकों, बसों और यहां तक कि पानी के जहाजों और किसी भी प्रकार के ईंधन के साथ काम कर सकती है।