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लॉकडाउन के समय दिल्ली में 53 फीसदी घट गया था प्रदूषण

लॉकडाउन के समय चेन्नई में पीएम 2.5 के स्तर में करीब 43 और दिल्ली में 53 फीसदी तक की कमी दर्ज की गई थी

By Lalit Maurya

On: Monday 20 July 2020
 

लॉकडाउन के समय दिल्ली में प्रदूषण का स्तर 53 फीसदी तक घट गया था जबकि उसी समय मुंबई में 10 से 39 फीसद की गिरावट दर्ज की गई थी| यह जानकारी यूनिवर्सिटी ऑफ सरे द्वारा किये एक शोध में सामने आई है| जोकि अंतराष्ट्रीय जर्नल सस्टेनेबल सिटीज एंड सोसाइटी में प्रकाशित हुआ है|

शोध के अनुसार यदि एशिया और यूरोप के शहरों पर नजर डालें तो दिल्ली में लगभग उनके जितनी ही प्रदूषण में कमी आई थी| अनुमान है कि पीएम 2.5 में आई गिरावट से 630 लोगों की जान बच गई है जो प्रदूषण के कारण असमय जा सकती थी| साथ ही इससे करीब 5,170 करोड़ रुपए (69 करोड़ डॉलर) की बचत हुई है|  

गौरतलब है 18 जुलाई 2020 तक जारी आंकड़ों के अनुसार इस महामारी से अब तक दुनिया भर में 6 लाख से भी ज्यादा लोगों की जान जा चुकी है| अकेले भारत में इस बीमारी से करीब 26,273 लोगों की मृत्यु हो चुकी है| वहीँ दुनिया में 1.42 करोड़ मामले सामने आ चुके हैं| भारत दुनिया में 3 सबसे बड़ा कोरोना संक्रमित देश है जहां अब तक 10 लाख से भी ज्यादा मामलों की पुष्टि हो चुकी है| यदि इस महामारी के दो पहलुओं को देखें तो एक ओर इस बीमारी ने दुनिया भर में ऐसी तबाही मचाई है जिस की भरपाई शायद कभी नहीं की जा सकेगी| न जाने कितने लोग इस बीमारी की भेंट चढ़ चुके हैं| पर यदि इसका दूसरा पहलु देखें तो इस महामारी ने हमें एक बार फिर से रूककर यह सोचने का मौका दिया है कि विकास की जिस गति और दिशा में हम दौड़ रहें हैं क्या वो सही दिशा में जा रहा है| या फिर उसपर फिर से विचार करने की जरुरत है| यह शोध इस बात की पुष्टि करता है| जो वायु प्रदूषण के बढ़ते खतरे की ओर इशारा करता है|

चेन्नई, दिल्ली, हैदराबाद, कोलकाता और मुंबई पर किया गया है यह अध्ययन

यह शोध भारत के पांच प्रमुख शहरों चेन्नई, दिल्ली, हैदराबाद, कोलकाता और मुंबई पर किया गया है| जिसमें लॉकडाउन के दौरान वहां पीएम 2.5 के स्तर में आए बदलाव का विश्लेषण किया है|  जोकि वाहनों और अन्य स्रोतों से उत्सर्जित हुए थे| शोधकर्ताओं ने लॉकडाउन के समय में प्रदूषण के स्तर में आई गिरावट को जानने के लिए पिछले पांच वर्षों के आंकड़ों के आधार पर तुलनात्मक अध्ययन किया है|

इस शोध के निष्कर्ष के अनुसार मुंबई में प्रदूषण के स्तर में करीब 10 से 39 फीसदी की गिरावट आई थी| जबकि दिल्ली में करीब 53 फीसदी गिरावट दर्ज की गई थी| जबकि इसी अवधि में शंघाई में 40 फीसदी और वियना में 60 फीसद की गिरावट दर्ज की गई थी| जबकि यदि चेन्नई में देखे तो पीएम 2.5 के स्तर में करीब 43 फीसदी, कोलकाता में 36 फीसदी और हैदराबाद में 54 फीसदी तक की कमी दर्ज की गई है|

सरे विश्वविद्यालय के जीसीएआरई के निदेशक और इस शोध के प्रमुख प्रोफेसर प्रशांत कुमार के अनुसार, "दुनिया भर में रहने वाले अरबों लोगों के जीवन और जीविका पर इस महामारी ने विनाशकारी असर डाला है| इस दुखद घटना ने हमें एक बार फिर से अपनी गतिविधियों और उसके पड़ने वाले प्रभाव को समझने का मौका दिया है। प्रदूषण के स्तर में जो कमी आई है वो चौंकाने वाली नहीं है| पर यह हमारे कारण पर्यावरण पर जो बुरा असर पड़ रहा है उसे समझने में हमारी मदद कर सकती है| यह सोचने, समझने और चर्चा करने का विषय है कि वातावरण और बढ़ते प्रदूषण में हमारा आने वाला कल कैसा होगा| और क्या आने वाले वक्त में यह बढ़ता प्रदूषण और दूषित हवा क्या एक आम बात होगी|