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इस साल एक भी दिन अच्छी हवा नसीब नहीं हुई पटना वालों को

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के आंकड़ों के मुताबिक शहर में पूरे 2019 में एयर क्वालिटी इंडेक्स का आंकड़ा 50 के नीचे नहीं जा पाया

By Pushya Mitra

On: Tuesday 31 December 2019
 
बिहार की राजधानी पटना में साल में एक दिन भी हवा की गुणवत्ता अच्छी नहीं रही। फोटो: पुष्यमित्र
बिहार की राजधानी पटना में साल में एक दिन भी हवा की गुणवत्ता अच्छी नहीं रही। फोटो: पुष्यमित्र बिहार की राजधानी पटना में साल में एक दिन भी हवा की गुणवत्ता अच्छी नहीं रही। फोटो: पुष्यमित्र

किसी भी इंसान के स्वस्थ रहने के लिए उसे बेहतर हवा में सांस लेना जरूरी है, मगर दुर्भाग्यवश बिहार की राजधानी पटना के लोगों को इस साल एक भी दिन अच्छी गुणवत्ता की हवा नसीब नहीं हुई। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के आंकड़ों के मुताबिक शहर में पूरे 2019 में एयर क्वालिटी इंडेक्स का आंकड़ा 50 के नीचे नहीं जा पाया। प्रदूषण मानकों के हिसाब से यह आंकड़ा 50 से कम होने पर ही हवा की गुणवत्ता बेहतर मानी जाती है। राज्य के दूसरे शहरों मुजफ्फरपुर और गया में जहां प्रदूषण के आंकड़े दर्ज होते हैं, वहां का भी हाल कमोबेस ऐसा ही रहा। मुजफ्फरपुर में साल में एक दिन शहर की हवा की गुणवत्ता अच्छी थी, गया में ऐसा तीन दिनों के लिए ही रहा. जानकार इसके पीछे डीजल वाहनों के प्रदूषण, निर्माण कार्यों में बरती जाने वाली अनियमितता और हिमालय के तराई क्षेत्र में होने के कारण ठंड के दिनों में हवा के बहाव में होने वाली कठिनाई को प्रमुख वजह बताते हैं।

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि बिहार की राजधानी पटना में पूरे 2019 साल में सिर्फ 87 दिन ही हवा की गुणवत्ता संतोषजनक रही। यानी इस अवधि में एयर क्वालिटी इंडेक्स 50 से 100 के बीच रहा. 73 दिन हवा की गुणवत्ता को मध्यम दर्जे की(मोडरेट) कहा जा सकता है। यानी इस अवधि में हवा की गुणवत्ता का इंडेक्स 101 से 200 के बीच रहा। बाकी दिनों में शहर के लोगों को खराब गुणवत्ता वाली हवा में सांस लेना पड़ा। इनमें 52 दिन गुणवत्ता खराब रही, यानी इंडेक्स 201 से 300 के बीच रहा, 71 दिन गुणवत्ता बहुत खराब रही, इंडेक्स 301 से 400 के बीच रहा। 30 दिन तो हवा की गुणवत्ता गंभीर बतायी गयी, इस दौरान इंडेक्स 400 के ऊपर चला गया. बोर्ड के पास 365 में से 313 दिनों की हवा की स्थिति के आंकड़े उपलब्ध हैं।

बिहार राज्य के दो अन्य शहरों मुजफ्फरपुर और गया की वायु गुणवत्ता के आंकड़े बोर्ड के पास उपलब्ध हैं। मुजफ्फरपुर में पूरे साल में सिर्फ एक दिन पांच सितंबर को हवा की गुणवत्ता अच्छी बतायी गई। 63 दिन संतोषजनक, 70 दिन मोडरेट, 79 दिन खराब, 57 दिन बहुत खराब और 14 दिन गंभीर रही। शहर के 283 दिनों के आंकड़े उपलब्ध थे. गया में तीन दिन 6 अगस्त, 25 और 26 अक्तूबर को हवा की गुणवत्ता बेहतर रही. 110 दिन संतोषजनक, 108 दिन मोडरेट यानी यहां तुलनात्मक रूप से हवा की गुणवत्ता ठीक रही. 43 दिन खराब, 33 दिन बहुत खराब रही. सात दिन स्थिति गंभीर रही. 301 दिन के आंकड़े उपलब्ध हैं.

बिहार में प्रदूषण के आंकड़ों का विश्लेषण करने वाली विशेषज्ञ अंकिता ज्योति कहती हैं कि हिमालय के पास वाले क्षेत्र में होने के कारण इस इलाके में ठंड के दिनों में हवा को बहने का रास्ता नहीं मिलता और प्रदूषित हवा निचले इलाके में चक्कर काटती रहती है, इसलिए इस क्षेत्र में स्वाभाविक रूप से प्रदूषण अधिक होता है। इसके अलावा डीजल वाहनों से होने वाला प्रदूषण, निर्माण कार्यों में होने वाली अनियमितता की वजह से होने वाला प्रदूषण, शहर में पेड़ों की कटाई आदि इस क्षेत्र में प्रदूषण की मुख्य वजह हैं। बिहार सरकार ने डीजल वाहनों के परिचालन को लेकर कुछ नये नियम बनाये हैं, इससे अगले साल स्थिति बेहतर होने की उम्मीद है।