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एक बार फिर दिल्ली का प्रदूषण क्रिकेटरों को कर सकता है परेशान

तीन नवंबर को दिल्ली में भारत व बांग्लादेश के बीच अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट मैच है, लेकिन दिल्ली में वायु प्रदूषण जैसे बढ़ा है, उसका असर इस मैच पर दिख सकता है 

By Anil Ashwani Sharma

On: Monday 28 October 2019
 
Photo: Wikipedia
Photo: Wikipedia Photo: Wikipedia

दिल्ली के फिरोज शाह कोटला मैदान (अरुण जेटली स्टेडियम) में आगामी तीन नवंबर को भारत और बांग्लादेश के बीच खेली जाने वाले टी-20 मैच अंतरराष्ट्रीय मैच पर खतरे के बादल मंडरा रहे हैं। यह बादल आसमान वाले नहीं, बल्कि प्रदूषण के बादल ने इस मैच पर संशय पैदा कर दिया है। क्योंकि दिल्ली इस समय दुनिया की दूसरे नंबर की सबसे ज्यादा वायु प्रदूषण फैलाने वाला शहर बना हुआ है। अगर यह क्रम जारी रहता है तो मैच पर इसका असर पड़ सकता है। विगत में भी इस मैदान पर श्रीलंकाई टीम ने वायु प्रदूषण से बचने के लिए मैच के दौरान मास्क पहन कर खेल चुके हैं।

हालांकि दिल्ली क्रिकेट एसोसिएशन और भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड का कहना है  कि यह मैच एक हफ्ते बाद होना है, इसलिए तब तक वायु प्रदूषण का स्तर स्वत: ही कम हो जाएगा। जबकि सेंटर फॉर साइंस एनवॉयरनमेंट के वायु प्रदूषण पर शोध करने वाले वरिष्ठ शोधकर्ता विवेक चटोपाद्धाय का कहना है कि अभी दिल्ली का वायु प्रदूषण सूचकांक 356 से ऊपर है। यह तब है, जब अभी हवा का रूख स्थिर बना हुआ है और जब हवाएं चलेगी तो निश्चत तौर पर यह सूचकांक और बढ़ेगा अभी, घटेगा नहीं। यानी आगामी एक हफ्ते से अधिक तक राजधानी की हवा की गुणवत्ता जस की तस बनी रहेगी।

वहीं आकाशवाणी के वरिष्ठ खेल विशेषज्ञ राकेश थपियाल कहते हैं कि अब तक तो ऐसा नहीं हुआ है कि वायु प्रदूषण के कारण कोई मैच रद्द हुआ हो। हालांकि उन्होंने बताया कि विगत में एक अंतरराष्ट्रीय मैच के दौरान जरूर ऐसा हुआ था कि धूप तेज होने के कारण मैच कुछ समय के लिए रोक दिया गया था।

ध्यान रहे कि 23 जनवरी, 2019 को भारतीय क्रिकेट टीम न्यूजीलैंड के खिलाफ पांच मैचों की एक दिवसीय सीरीज के पहले मैच में लक्ष्‍य का पीछा करने उतरी भारतीय टीम के बल्लेबाजों को सूरज की रोशनी के कारण परेशानी का सामना करना पड़ा था। जी हां, यह सुनने में अजीब लगता है लेकिन भारत और न्यूजीलैंड के बीच नेपियर के मैकलीन पार्क में पहले एकदिवसीय अंतरराष्ट्रीय मैच के दौरान डिनर के बाद सूरज के कारण खेल रोकना पड़ा। 

सूरज की तेज रोशनी सीधी बल्लेबाजों की आंखों पर पड़ रही थी, जिसके कारण उनके लिए गेंद देख पाना मुश्किल हो गया था। इसके कारण खेल रोकना पड़ा। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में इससे पहले ऐसा कभी नहीं हुआ। तब मैदानी अंपायर शान जार्ज ने बताया था कि डूबते हुए सूरज की रोशनी खिलाड़ियों की आंखों पर पड़ रही थी और हमें उनकी और अंपायरों की सुरक्षा के बारे में सोचना था।

विगत में भी यहां सूरज के कारण घरेलू प्रतियोगिताओं के दौरान भी खेल रोका गया है। यही नहीं इंग्लैंड के कुछ मैदानों पर भी ऐसा हुआ है, लेकिन इनमें से कोई भी अंतरराष्ट्रीय मैच नहीं था। न्यूजीलैंड के बल्लेबाज रोस टेलर ने कहा था कि हमने श्रृंखला से पहले इस पर बात की थी। यह कुछ अलग चीज है। सामान्यत: इस तरह की स्थिति से बचने के लिए क्रिकेट पिचों को उत्तर-दक्षिण दिशा में बनाया जाता है लेकिन यहां की मैकलीन पार्क की पिच पूर्व-पश्चिम की ओर है। नेपियर के मेयर बिल डाल्टन ने कहा कि हम इस समस्या से निपटने का तरीका निकालने की कोशिश कर रहे हैं।

बीसीसीआई को उम्मीद है कि रात दिन के इस मैच में वायु प्रदूषण कोई मुद्दा नहीं बनेगा। लेकिन दीपावली से दो दिन पहले ही वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) बेहद खराब दिखाया गया है। एक्यूआई के मानकों के अनुसार 0-50 अच्छा, 51 से 100 संतोषजनक, 101 से 200 मध्यम स्तर का, 201 से 300 खराब, 300 से 400 बेहद खराब और 400 से अधिक गंभीर माना जाता है, जिससे स्वास्थ्य पर विपरीत प्रभाव पड़ सकता है।

दिवाली के एक दिन पहले ही दिल्ली यूनिवर्सिटी का एक्यूआई 357 था जो कि बहुत खराब माना जाएगा। बीसीसीआई और डीडीसीए के अधिकारियों ने कहा कि खराब वायु प्रदूषण उनके नियंत्रण से बाहर है और वे यही उम्मीद कर सकते हैं कि मैच दीपावली के एक सप्ताह बाद होगा तो तब तक स्थिति नियंत्रण में आ जाएगी।

इस समय राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में रविवार को दिवाली के दिन प्रदूषण की वजह से धुंध छा गई और वायु गुणवत्ता बहुत खराब स्तर पर जा पहुंची। ध्यान रहे कि सर्वोच्च अदालत ने राजधानी की आबोहवा को सांस लेने लायक बना रहने के लिए दिवाली पर पटाखा छोड़ने के लिए केवल दो घंटे की सीमा तय की थी, लेकिन लोगों अधाधुंध पटाखे टोटके के रूप में चलाए। इसके चलते राजधानी में मालवीय नगर, लाजपत नगर, कैलाश हिल्स, बुराड़ी, जंगपुरा, शाहदरा, लक्ष्मी नगर, मयूर विहार, सरिता विहार, हरी नगर, न्यू फ्रेंड्स कॉलोनी, द्वारका सहित कई इलाकों में पटाखा छोड़ने के लिए तय दो घंटे की समयसीमा का खुला उल्लंघन हुआ। इससे शहर का प्रदूषण सूचकांक ने लंबी छलांग लगाई और अब सांस लेना दूभर हो रहा है।

विवेक कहना है कि दिवाली की रात में बैन के बावजूद बड़ी मात्रा में पटाखे जलने से दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है। दिल्ली-एनसीआर की हवा जहरीली हो गई है।

लोधी रोड जैसे इलाके में आज सोमवार की सुबह (दिवाली के अगले दिन) पीएम (पार्टिकुलेट मैटर) 2.5 का स्तर 500 के पार जा पहुंचा है। जबकि  गाजियाबाद से सटे हापुड़ में यह 657 के स्तर पर दर्ज किया है। बीती रात दिल्ली में नगर निगम ने प्रदूषण रोकने के लिए फॉगिंग भी की थी। दिल्ली के लोधी रोड इलाके में पीएम 2.5 500 पर दर्ज किया गया, वहीं मेजर ध्यान चंद नेशनल स्टेडियम और इंडिया गेट पर पीएम 2.5, 240 के स्तर पर और पीएम 10, 182 के स्तर पर दर्ज किया गया। यह बेहद खतरनाक माना जाता है।