हवा में लंबे समय तक बना रहता है खाना पकाने से होने वाला प्रदूषण

खाना पकाने में उत्सर्जित होने वाले एरोसोल 10 प्रतिशत तक पार्टिकुलेट मैटर (पीएम) उत्सर्जन के लिए जिम्मेदार होते हैं।

By Dayanidhi

On: Tuesday 19 April 2022
 
खाना पकाने से होने वाला प्रदूषण हवा में लंबे समय तक बना रहता है

वायुमंडलीय एरोसोल की बूदें जलवायु को प्रभावित करते हैं। हानिकारक प्रदूषक हवा में लंबी दूरी तय कर सकते हैं। इसलिए ऐसे एरोसोल के बने रहना उनके पर्यावरणीय प्रभाव को निर्धारित कर सकता है। वायुमंडलीय एरोसोल के कार्बनिक हिस्से में विभिन्न प्रकार के अणु शामिल होते हैं, जिनके अलग-अलग तरह के कार्य होते हैं, जो मौसम और पर्यावरण के साथ भिन्न होते हैं।

कार्बनिक एरोसोल जैसे कि खाना पकाने में उत्सर्जित होने वाला प्रदूषण कई दिनों तक वातावरण में बना रह सकता हैं। खाना पकाने में उत्सर्जित होने वाला फैटी एसिड द्वारा बने नैनोस्ट्रक्चर हवा में छोड़े जाते हैं।

उन प्रक्रियाओं की पहचान करना जो इस प्रक्रिया को नियंत्रित करती हैं कि ये एरोसोल वातावरण में कैसे परिवर्तित होते हैं। अब वैज्ञानिक पर्यावरण और जलवायु पर उनके प्रभाव को बेहतर ढंग से समझने और उनका अनुमान लगाने में सक्षम होंगे।

बर्मिंघम और बाथ विश्वविद्यालयों के विशेषज्ञों ने ओलिक एसिड की पतली फिल्मों के व्यवहार की जांच करने के लिए ऑक्सफोर्ड में हार्वेल कैंपस आधारित डायमंड लाइट सोर्स और सेंट्रल लेजर फैसिलिटी में उपकरणों का इस्तेमाल किया। फैटी एसिड आमतौर पर खाना बनाने के दौरान जारी होता है।

अध्ययन में वे विशेष आणविक गुणों का विश्लेषण किया गया जो इन्हें नियंत्रित करते हैं कि वायुमंडल में कितनी तेजी से एरोसोल उत्सर्जन को तोड़ा जा सकता है।

फिर प्रयोगात्मक आंकड़ों के साथ संयुक्त सैद्धांतिक मॉडल का उपयोग करके टीम यह अनुमान लगाने में सक्षम थी कि खाना पकाने से उत्पन्न एरोसोल पर्यावरण में कितनी देर तक बने रह सकते हैं।

इस प्रकार के एरोसोल लंबे समय से शहरी क्षेत्रों में खराब वायु गुणवत्ता से जुड़े हुए हैं, लेकिन मानव निर्मित जलवायु परिवर्तन पर उनके प्रभाव का आकलन करना मुश्किल है। यह एरोसोल के भीतर पाए जाने वाले अणुओं की विविध श्रेणी और पर्यावरण पर उनका अलग-अलग प्रभाव पड़ता है।

खाना पकाने के दौरान उत्सर्जित अणुओं के नैनोस्ट्रक्चर की पहचान करके, जो कार्बनिक एरोसोल के टूटने को धीमा कर देता है, यह मॉडल करना संभव हो जाता है कि उन्हें कैसे ले जाया जाता है और वातावरण में फैलाया जाता है।

यूनिवर्सिटी ऑफ बर्मिंघम स्कूल ऑफ ज्योग्राफी, अर्थ एंड एनवायर्नमेंटल साइंसेज के अध्ययनकर्ता डॉ. क्रिश्चियन पफ्रांग ने कहा कि यूके में कुकिंग एरोसोल 10 प्रतिशत तक पार्टिकुलेट मैटर (पीएम) उत्सर्जन के लिए जिम्मेदार है। उन्होंने कहा एयरोसोल व्यवहार का अनुमान लगाने के सटीक तरीके खोजने से, यह हमें जलवायु परिवर्तन में उनके योगदान का आकलन करने के लिए और अधिक सटीक तरीके प्रदान करेगा।

बाथ विश्वविद्यालय के सह-अध्ययनकर्ता डॉ. एडम स्क्वायर्स ने कहा हम तेजी से पता लगा रहे हैं कि खाना पकाने से इन फैटी एसिड जैसे अणु खुद को दोहरी परत और अन्य नियमित आकार और हवा में तैरने वाले एयरोसोल की बूंदों के भीतर के ढेर में व्यवस्थित कर सकते हैं। यह कैसे पूरी तरह से बदल जाता है कि वे कितनी तेजी से निचे आते हैं, कितनी देर तक वातावरण में बने रहते हैं और वे प्रदूषण और मौसम को कैसे प्रभावित करते हैं।

बर्मिंघम विश्वविद्यालय के ब्लूबियर उच्च प्रदर्शन और उच्च थ्रूपुट कंप्यूटिंग सेवा का उपयोग करके आंकड़ों का उत्पादन और विश्लेषण किया गया था। ब्लूबियर प्रत्यक्ष, ऑन-चिप, वाटर कूलिंग का उपयोग करके ऊर्जा की खपत को कम करते हुए शोधकर्ताओं के लिए तेज और कुशल प्रसंस्करण क्षमता प्रदान करने के लिए कुछ नवीनतम तकनीक को नियोजित करता है। यह अध्ययन एटमोस्फियरिक केमिस्ट्री एंड फिजिक्स नामक पत्रिका में प्रकाशित हुआ है।

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