दीवाली से पहले पराली जलाने में आई तेजी, देश के 29 शहरों की वायु गुणवत्ता हुई खराब

दिल्ली की हवा में इस बार पराली प्रदूषण का स्तर 5 फीसदी है जबकि बीते वर्ष यह 15 फीसदी था

By Vivek Mishra

On: Sunday 23 October 2022
 
दीवाली से ठीक पहले पराली जलने की घटनाएं बढ़ने लगी हैं। फाइल फोटो: विकास चौधरी
दीवाली से ठीक पहले पराली जलने की घटनाएं बढ़ने लगी हैं। फाइल फोटो: विकास चौधरी दीवाली से ठीक पहले पराली जलने की घटनाएं बढ़ने लगी हैं। फाइल फोटो: विकास चौधरी

गंगा के मैदानी राज्यों में दीपपर्व के साथ ही वायु प्रदूषण की समस्या ने पांव पसारना शुरू कर दिया है। पंजाब-हरियाणा, राजस्थान, उत्तर प्रदेश के साथ मध्य प्रदेश में धान के अवशेषों को जलाने की घटनाओं में बढ़ोतरी देखी जा रही है। इसके चलते दिल्ली -एनसीआर की हवा में फसल अवशेष प्रदूषण की हिस्सेदारी 5 फीसदी तक पहुंच गई है।
 
हालांकि, बीते वर्ष 2021 के मुकाबले यह काफी कम है। आशंका जाहिर की जा रही है कि यदि स्थानीय प्रदूषकों की हिस्सेदारी बढ़ी तो  दिल्ली-एनसीआर समेत उत्तर भारत के प्रमुख शहरों की हवा गुणवत्ता बहुत खराब से गंभीर श्रेणी की तरफ खिसक सकती है।  
 
वायु गुणवत्ता की निगरानी और फोरकास्ट करने वाली एजेंसी सिस्टम ऑफ एयर क्वालिटी एंड वेदर फोरकास्टिंग एंड रिसर्च (सफर) के मुताबिक दिल्ली की हवा में बीते वर्ष 2021 में फसल अवशेष प्रदूषण की हिस्सेदारी करीब 15 फीसदी थी जबकि इस बार यह अभी तक पांच फीसदी के आस-पास मौजूद है। सफर ने आगाह किया है कि पराली जलाने की घटनाएं 26 दिसंबर तक तेज हो सकती हैं। 
 
उत्तर भारत में धान अवशेषों के जलाए जाने को लेकर इंडियन एग्रीकल्चर रिसर्च  इंस्टीट्यू़ट (आईएआरआई) की सेटेलाइट के जरिए रीयल टाइम मॉनिटरिंग जारी है। आइएआरआई के मुताबिक 15 सितंबर से 22 अक्तूबर तक पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, मध्य प्रदेश और राज्स्थान में कुल 5000 फायर काउंट गिने गए हैं। इनमें सर्वाधिक फायर काउंट करीब 3000 पंजाब के हैं। 
 
आइएआरआई के आंकड़ों के मुताबिक यदि इस बार के 15 सितंबर से 22 अक्तूबर तक के  फायर काउंट की तुलना बीते वर्ष 2021 की समान अवधि (15 सितंबर-22 अक्तूबर) तक की जाए तो फसल अवशेष जलाए जाने में करीब 30 फीसदी की कमी देखी गई है। यह आशंका जरूर है कि देर से की गई धान की बुआई के चलते यह संख्या कम है जो दीवाली के बाद बढ़ सकती है। 
 
आईएआरआई के 2021 में 15 सितंबर से 22 अक्तूबर तक कुल 7790 फसल अवशेष जलाए जाने की घटनाएं दर्ज की गई थीं।  इनमें पंजाब में  5438, हरियाणा में 1508, उत्तर प्रदेश में 634, दिल्ली में 0, राजस्थान में 45 और मध्य प्रदेश में कुल 165 बर्निंग इवेंट हुए थे। 
 
उत्तर भारत में वायु प्रदूषण की स्थिति 
 
सीपीसीबी के रोजाना 24 घंटे औसत वाले 23 अक्तूबर एक्यूआई बुलेटिन के मुताबिक देश के कुल 177 निगरानी स्टेशनों में 29 स्टेशनों की हवा खराब श्रेणी वाली एक्यूआई में मौजूद है। जबकि 83 स्टेशन मॉडरेट वायु गुणवत्ता वाली श्रेणी में हैं। सिर्फ उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर का एक्यूआई बहुत खराब श्रेणी में रिकॉर्ड किया गया है।
 
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के वायु गुणवत्ता सूचकांक की चार अहम श्रेणियां हैं। इसके मुताबिक 1-50 का एक्यूआई अच्छा, 51 से 100 का एक्यूआई संतोषजनक, 101 से 200 का एक्यूआई मध्यम (मॉडरेट), 201-300 का एक्यूआई खराब, 301 से 400 का एक्यूआई बहुत खराब और गंभीर श्रेणी की वायु गुणवत्ता 401-500 का एक्यूआई दर्शाता है। जबकि 501 से अधिक इमरजेंसी वायु गुणवत्ता को दर्शाता है। 
 
इस बार दीपावली से पहले दिल्ली, पंजाब, हरियाणा और बिहार के कई शहरों की वायु गुणवत्ता का मौजूदा स्तर बीते वर्षों से काफी बेहतर है। सीपीसीबी के मुताबिक  23 अक्तूबर को दिल्ली का एक्यूआई 259 (खराब) जबकि एनसीआर के प्रमुख शहरों जैसे : गाजियाबद 270 ( खराब),  गुरुग्राम 251 (खराब),  ग्रेटर नोएडा 202 (खराब),  नोएडा 236 (खराब), फरीदाबाद 200 (मॉडरेट) वायु गुणवत्ता श्रेणी में पहुंच गए हैं। 
 
आगे और खराब होने की आशंका
 
सफर एजेंसी के मुताबिक 23 अक्तूबर को दिल्ली की हवा में पार्टिकुलेट मैटर 2.5 प्रदूषण का स्तर 45 से बढ़कर 48 फीसदी हो गया है। वहीं, मिक्सिंग हाईट लेयर (जहां प्रदूषक तत्व आपस में मिलते हैं) वह 200 मीटर पर आ गई है। साथ ही सरफेस विंड 5 से 10 किलोमीटर प्रति घंटे की मंद रफ्तार में ही आगे दो दिन रहने वाली है।
 
ऐसे में मौसम के फैक्टर प्रदूषकों को बढ़ाएंगे। स्थानीय प्रदूषण इसमें और इजाफा कर सकता है। सफर एजेंसी के जरिए बुजुर्गों और बच्चों की सेहत का ख्याल रखने की नसीहत दी गई है। 
 

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