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स्वास्थ्य को वायु प्रदूषण के किस पार्टिकुलेट मैटर से सबसे अधिक खतरा है

शोधकर्ताओं ने मास स्पेक्ट्रोमेट्री तकनीक का उपयोग करते हुए पार्टिकुलेट मैटर की संरचना का विश्लेषण किया और पता लगाया कि ये स्वास्थ्य के लिए किस कदर खतरनाक हैं

By Dayanidhi

On: Thursday 19 November 2020
 
Particulate matter of air pollution

पॉल शेरेर इंस्टीट्यूट (पीएसआई) के शोधकर्ताओं ने इस बात की जांच की है कि ऐसे कौन से स्रोत हैं, जिनके पदार्थ कण (पार्टिकुलेट मैटर) मानव स्वास्थ्य के लिए सबसे ज्यादा हानिकारक हैं। उन्होंने पाया कि केवल पार्टिकुलेट मैटर की मात्रा ही स्वास्थ्य के लिए सबसे बड़ा खतरा नहीं है, बल्कि एरोसोल क्षमता पार्टिकुलेट मैटर प्रदूषण को हानिकारक बनाती है।

पार्टिकुलेट मैटर (पीएम) वायु प्रदूषण से स्वास्थ्य को होने वाले सबसे बड़े खतरों में से एक है और अध्ययनों के अनुसार, यह हर साल करोड़ों लोगों की मौत के लिए जिम्मेदार है। इसका मतलब यह है कि उच्च रक्तचाप, धूम्रपान, मधुमेह और मोटापे के साथ खराब वायु गुणवत्ता और पार्टिकुलेट मैटर स्वास्थ्य के लिए पांच सबसे खतरनाक कारकों में से हैं। क्या पार्टिकुलेट मैटर प्रदूषण को इतना खतरनाक बनाता है, हालांकि अभी तक ठीक से इसकी जानकारी नहीं है।

अब एक अंतरराष्ट्रीय टीम के साथ मिलकर पॉल शेरेर इंस्टीट्यूट (पीएसआई) के शोधकर्ताओं ने पता लगाया है कि जब स्वास्थ्य के लिए खतरे की बात आती है तो पार्टिकुलेट मैटर प्रदूषण की मात्रा एकमात्र निर्णायक कारण नहीं होता है।

स्वास्थ्य के लिए खतरे के रूप में पार्टिकुलेट मैटर की क्षमता

पीएसआई में गैस-चरण और एरोसोल रसायन विज्ञान शोध समूह के कास्पर डलेनबाक कहते हैं कि इस अध्ययन में हम मुख्य रूप से दो बिंदुओं पर ध्यान केंद्रित करना चाहते है। पहला वातावरण में कौन से पार्टिकुलेट मैटर स्रोत तथाकथित एरोसोल है जो इसके लिए जिम्मेदार हैं और दूसरा, क्या इन पार्टिकुलेट मैटर से स्वास्थ्य को होने वाले खतरे इसकी एरोसोल क्षमता के कारण होता है। एरोसोल को ऑक्सीडेटिव भी कहा जाता है।

यहां "ऑक्सीडेटिव  क्षमता" का मतलब एंटीऑक्सिडेंट की मात्रा को कम करने के लिए पार्टिकुलेट मैटर की क्षमता पर निर्भर करता है, जिससे मानव शरीर की कोशिकाओं और ऊतकों को नुकसान हो सकता है। पहले चरण में, शोधकर्ताओं ने मानव के वायुमार्ग से कोशिकाओं को दिखाया जिन्हें ब्रोन्कियल उपकला कोशिकाएं भी कहते है, यहां से लिए गए पार्टिकुलेट मैटर के नमूनों का उनकी जैविक प्रतिक्रिया का परीक्षण किया।

जब ये कोशिकाएं तनाव में होती हैं, तो वे प्रतिरक्षा प्रणाली के लिए एक संकेत के रूप में एक पदार्थ को छोड़ देती हैं, जो शरीर में जलन की प्रतिक्रियाओं को शुरू करता है। डलेनबाक के अनुसार, अधिक ऑक्सीडेटिव क्षमता और स्वास्थ्य के लिए खतरे के बीच कारण अभी भी निश्चित रूप से स्थापित नहीं हुआ है। लेकिन अध्ययन से स्पष्ट है कि इसके बीच संबंध वास्तव में मौजूद है।

बर्न विश्वविद्यालय के नेतृत्व में किए गए अध्ययन से पता चला है कि रोगियों की कोशिकाएं जो एक विशेष पूर्व-मौजूदा बीमारी सिस्टिक फाइब्रोसिस से पीड़ित हैं, पार्टिकुलेट मैटर के खिलाफ कमजोर प्रतिरक्षा को दिखाती है। जबकि स्वस्थ कोशिकाओं में एक एंटीऑक्सिडेंट रक्षा तंत्र उत्तेजक प्रतिक्रिया के बढ़ने को रोकने में सक्षम था, बीमार कोशिकाओं में रक्षा क्षमता कम थी, इससे कोशिका मृत्यु दर में वृद्धि हुई। यह अध्ययन नेचर पत्रिका में प्रकाशित हुआ है।

पार्टिकुलेट मैटर क्या मायने रखते हैं और उनकी ऑक्सीडेटिव क्षमता कहां से आती है

शोधकर्ताओं ने स्विट्जरलैंड के विभिन्न स्थानों पर पार्टिकुलेट मैटर के नमूने एकत्र किए। पीएसआई में विकसित मास स्पेक्ट्रोमेट्री तकनीक का उपयोग करते हुए, उन्होंने पार्टिकुलेट मैटर की संरचना का विश्लेषण किया। प्रत्येक पार्टिकुलेट मैटर के नमूने के लिए इस तरह से प्राप्त रासायनिक रूपरेखा उन स्रोतों की ओर इशारा करता है जिनसे यह उत्पन्न होता है। इसके अलावा, ग्रेनोबल के सहयोगियों ने मानव स्वास्थ्य को होने वाले खतरे का संकेत प्राप्त करने के लिए समान नमूनों की ऑक्सीडेटिव क्षमता का निर्धारण किया। इन प्रायोगिक आंकड़ों के आधार पर, उन्होंने यूरोप में स्थानों की गणना करने के लिए एक कंप्यूटर मॉडल का उपयोग किया, जो कि पूरे वर्ष में पार्टिकुलेट मैटर के कारण ऑक्सीडेटिव क्षमता सबसे अधिक हो जाती है।

डलेनबाक ने कहा हमारे परिणाम बताते हैं कि पार्टिकुलेट मैटर की ऑक्सीडेटिव क्षमता और पार्टिकुलेट मैटर की मात्रा समान स्रोतों से निर्धारित नहीं होती है। पार्टिकुलेट मैटर के सबसे बड़े हिस्से में खनिज धूल और तथाकथित अकार्बनिक एरोसोल, जैसे अमोनियम नाइट्रेट और सल्फेट होते हैं।

दूसरी ओर, पार्टिकुलेट मैटर की ऑक्सीडेटिव क्षमता, मुख्य रूप से तथाकथित मानवजनित कार्बनिक एरोसोल द्वारा निर्धारित की जाती है, जो मुख्य रूप से लकड़ी के जलने से होती है और सड़क यातायात में होने वाले उत्सर्जन के द्वारा होती है। शोधकर्ताओं ने पाया कि न केवल शहरी क्षेत्रों में आबादी अधिक मात्रा में पार्टिकुलेट मैटर के संपर्क में थी, बल्कि इन क्षेत्रों में इस पार्टिकुलेट मैटर की ऑक्सीडेटिव क्षमता अधिक है और इसलिए यह ग्रामीण क्षेत्रों में पार्टिकुलेट मैटर प्रदूषण से स्वास्थ्य के लिए अधिक हानिकारक है।