गोवा की नदियों में नहीं मिल रहा उद्योगों से निकला गंदा पानी: रिपोर्ट

यहां पढ़िए पर्यावरण सम्बन्धी मामलों के विषय में अदालती आदेशों का सार

By Susan Chacko, Lalit Maurya

On: Friday 03 March 2023
 
तेरेखोल नदी; फोटो: विकिपीडिया

गोवा के राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने 2 मार्च 2023 को राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) के समक्ष अपनी रिपोर्ट सबमिट कर दी है। इस रिपोर्ट में जानकारी दी गई है कि नदी के किसी भी प्रदूषित हिस्से में उद्योगों से निकला दूषित निर्वहन नहीं है।

गोवा में, जहां सीवर नेटवर्क नहीं है, वहां सेप्टिक-टैंक-सोक-पिट की व्यवस्था अपनाई गई है। कई बड़े होटलों और आवासीय भवनों के पास अपना उपचार संयंत्र है, जैसा कि टीसीपी अधिनियम 2010 के तहत अनिवार्य भी है। इन होटलों में 50 या उससे ज्यादा कमरे हैं।

इसी तरह राज्य में खुले में शौच न करने (ओडीएफ) की नीति के तहत घरों के लिए सुलभ शौचालय और जैव शौचालय बनाए गए हैं। वहीं राज्य में नौ सीवेज उपचार संयंत्र कार्यरत हैं और इनकी शोधन क्षमता में कोई अंतर नहीं है।

इसी तरह 250 मीट्रिक टन लैंडफिल योग्य कचरे का निपटान पिसुरलेम में सुरक्षित लैंडफिल साइट के माध्यम से किया जा रहा है। गोवा ने पेरनेम नगर परिषद (उत्तरी गोवा) में प्लास्टिक से ईंधन बनाने का एक संयंत्र स्थापित किया है। हालांकि, वर्तमान में वो काम नहीं कर रहा है और उसकी मरम्मत की जा रही है।

पलक्कड़ में पत्थर खनन मामले में समिति ने कोर्ट को सौंपी रिपोर्ट

संयुक्त समिति ने अपनी रिपोर्ट में सिफारिश की है कि यदि खदान विस्फोट क्षेत्र से 150 मीटर के दायरे में यदि घर हैं तो वहां रॉक ब्लास्टिंग की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। हालांकि रिपोर्ट में खदान मालिकों के घरों को इस दायरे की सीमा से बाहर रखा है। मामला केरल के पलक्कड़ जिले में किझाकेंचेरी गांव में चल रही पत्थर की खदानों से जुड़ा है।

जानकारी दी गई है कि कई मामलों में खनन मालिकों ने योग्य खनन इंजीनियरों को नियुक्त नहीं किया है। अध्ययन के दौरान अन्य खदानों और संस्थानों के खनन इंजीनियर पर्यवेक्षी भूमिका में थे। साथ ही नॉन इलेक्ट्रिक इनिशिएशन सिस्टम जोकि ब्लास्ट तकनीक है उसके बारे में भी ज्ञान और विशेषज्ञता की कमी है।

शोध से पता चलता है कि सुरक्षा फ्यूज और विद्युत विधियों की तुलना में नोनेल के साथ ब्लास्टिंग के दौरान उत्पन्न होने वाले फ्लाईरॉक, शोर और कंपन कम होते हैं। यह भी देखा गया है कि नॉन इलेक्ट्रिक इनिशिएशन सिस्टम के शुरू होने से ब्लास्टिंग की दक्षता बढ़ जाती है। साथ ही इसका ब्लास्टिंग की लागत पर भी अनुकूल प्रभाव पड़ता है।

गौरतलब है कि इस मामले में एनजीटी ने 9 दिसंबर, 2021 को एक सात सदस्यीय संयुक्त समिति के गठन का निर्देश दिया था। इस समिति इस क्षेत्र की जांच करनी थी।

अयोध्या में एयरपोर्ट बनाने से प्रभावित जल स्रोतों को हुए नुकसान का किया जा रहा है निदान

अयोध्या में श्री राम अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे के रनवे के विस्तार के चलते चांदपुर हरबंश नाले और सनैया नाले का प्रवाह हवाईअड्डे के दाहिनी ओर प्रभावित हुआ है। गौरतलब है कि चांदपुर हरबंश नाला और सनैया नाला के जलभराव की घटना को रोकने के लिए अयोध्या के जिलाधिकारी द्वारा जिला स्तरीय समिति का गठन किया गया था। इस क्षेत्र के पूरी तरह निरीक्षण के बाद, समिति ने अपनी सिफारिशें दी है। इनके आधार पर अयोध्या सिंचाई विभाग ने परियोजना तैयार की है।

इस परियोजना के तहत वैकल्पिक नालों अथवा मार्ग को परिवर्तन कर इन नालों का अप्रतिबंधित प्रवाह सुनिश्चित किया गया है। पता चला है कि इन परियोजनाओं के पूरा होने के बाद, जलग्रहण क्षेत्र में अप्रतिबंधित और प्रभावी जल निकासी सुनिश्चित की जाएगी और वर्षा जल के हाइड्रॉलिक रूप से सर्वोत्तम निपटान के माध्यम से जल भराव की घटना को पूरी तरह से टाला जा जाएगा।

गौरतलब है कि श्री राम अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के निर्माण से त्रिलोकी गंगा नदी को होने वाले नुकसान के संबंध में दुर्गा प्रसाद यादव द्वारा एक आवेदन दायर किया गया था। रिपोर्ट में अदालत को सूचित किया कि राजस्व रिकॉर्ड के अनुसार, त्रिलोकी गंगा के नाम से कोई नदी अयोध्या में नहीं है।

शिकायतकर्ता द्वारा जिसे त्रिलोकी गंगा कहा गया है उसे कुछ गांवों में तिलैया नाले के रूप में भी जाना जाता है और कुछ अन्य गांवों और तहसील में इसे सोती और बहा के रूप में भी जाना जाता है। इस मामले में "सिंचाई विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार, अयोध्या हवाई अड्डे के विस्तार के कारण नदी का जल प्रवाह न रुके और जल प्रवाह सुचारू जारी रहे, इसके लिए जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं।"

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