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कीटनाशक ईकाइयों के दुष्प्रभाव को कम करने के लिए प्रोटोकॉल तैयार, साल में एक बार होगा औचक निरीक्षण

कीटनाशकों के कारण प्रदूषित होते मिट्टी-पानी और मानव स्वास्थ्य को कम करने के लिए नगरानी प्रोटोकॉल बनाया गया है। सभी कीटनाशक ईकाइयां इस प्रोटोकॉल के दायरे में रहेंगी। 

By Vivek Mishra

On: Monday 07 December 2020
 

कीटनाशकों के निर्माण की गति तेज हुई है तो इसने मानव स्वास्थ्य और मिट्टी-पानी को प्रदूषित करने में भी कोई कोर-कसर नहीं छोड़ी है। बहरहाल नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) के आदेश बाद प्रभावी तौर पर कीटनाशकों की निगरानी को लेकर निगरानी तंत्र तैयार हो गया है।

इस नए निगरानी तंत्र के प्रोटोकॉल में पर्यावरण प्रदूषण की आशंका के तहत कीटनाशकों का निर्माण करने वाली ईकाईयों का औचक निरीक्षण किया जा सकेगा। 

नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने 26 जून, 2020 को अपने आदेश में चार महीने के भीतर कीटनाशकों की प्रभावी निगरानी के लिए प्रभावी प्रोटोकॉल विकसित करने का आदेश दिया था। इसे ध्यान में रखते हुए सीपीसीबी ने यह आदेश जारी किया है। 

एनजीटी ने यह गौर किया था कि उत्तर प्रदेश के किंग जॉर्ज मेडिकल कॉलेज की रिपोर्ट के आधार पर याचिका में कहा गया था कि अलीगढ़ डिवीजन में करीब सात लाख हेक्टेयर जमीन कीटनाशक के चलते बर्बाद हो गई। वहीं, कीटनाशकों पर निगरानी न होने के कारण इसका मानव स्वास्थ्य पर भी बुरा असर पड़ा है। 

कीटनाशकों की प्रभावी निगरानी वाले प्रोटोकॉल में तय किया गया है कि  राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और समितियां डॉयरेक्टोरेट ऑफ प्लांट प्रोटेक्शन क्वरंटीन एंड स्टोरेज (डीपीपीक्यूएस) के साथ संयुक्त तौर पर कीटनाशक ईकाइयों की जांच करेंगी। ईकाइयां संयुक्त समिति के अधीन रहेगी।

संयुक्त समिति को कम से कम से कम साल की छमाही पर टेक्निकल ग्रेड वाली ईकाइयां और सालाना स्तर पर फॉर्मुलेट करने वाली कीटनाशक ईकाइयों की औचक जांच करेगी।  

जांच से पहले किसी भी ईकाई को सूचित नहीं किया जाएगा। यदि कोई आदेश, नियम और कानून का उल्लंघन पाया जाएगा तो राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड या समिति अथवा डीपीपीक्यूएस उस ईकाई पर मौजूदा कानूनों के हिसाब से कार्रवाई करेगा। 

वहीं, ईकाइयों के इनलेट-आउटलेट, डिस्चार्ज, प्रवाह मानकों का बारीकी से जांच संयुक्त समिति को करना होगा। सैंपल एकत्र करने के साथ ही यह जांचना जरूरी होगा कि कीटनाशक ईकाइयां कहां पर अपना शोधित या गैर शोधित प्रवाह गिरा रही हैं।

यदि जेएलडी यानी जीरो लिक्विड डिस्चार्ज का दावा है तो इस बात की और सख्ती से जांच करनी होगी। वहीं, पर्यावरण प्रदूषण की संभावना वाली या जहरीली प्रकृति वाली ईकाइयों के डिस्चार्ज बिंदुओं में यह देखना होगा कि कहीं वर्षा जल या बरसाती नालों से उनका कोई प्रवाह नहीं जा रहा जिससे आस-पास पर्यावरण को खतरा हो। या फिर ईकाई में भंडारण के दौरान रिसाव की घटना का जोखिम कम करने के लिए क्या उपाय किए गए हैं।

प्रोटोकॉल के तहत निगरानी तंत्र को कीटनाशक ईकाई के 500 मीटर दायरे में भू-जल यदि कोई जलाशय है तो उसका पानी और मिट्टी की भी जांच करेगा।