कॉप-26: जारी किया गया प्लास्टिक प्रदूषण ट्रैकर

प्लास्टिक जीवाश्म ईंधन से बनता है, अपने जीवन चक्र के हर कदम पर यह ग्रीनहाउस गैसों का उत्पादन करता है

By Dayanidhi

On: Monday 15 November 2021
 
फोटो :लंदन की जूलॉजिकल सोसायटी

कॉप-26 के अंतिम दिन वैज्ञानिकों ने स्कॉटलैंड के आसपास के समुद्र में प्लास्टिक प्रदूषण का पता लगाने के उपकरण लगाए। ये उपकरण वैज्ञानिकों को यह समझने में मदद करेंगे कि समुद्र में प्लास्टिक की बोतलें कैसे समाती हैं। प्लास्टिक जलवायु परिवर्तन के प्रभावों, वन्यजीवों और मौसम के पैटर्न को कैसे प्रभावित करते हैं।

यह कार्यक्रम एक्सेटर विश्वविद्यालय, प्लायमाउथ विश्वविद्यालय और लंदन की जूलॉजिकल सोसायटी द्वारा चलाया जा रहा है। बोतल ट्रैकिंग प्रोजेक्ट डिज़ाइन द्वारा एक बार उपयोग होने वाली प्लास्टिक पेय की बोतल के बारे में पता लगाने के लिए चलाया जा रहा है। यह उपकरण वास्तविक बोतलों की तरह धाराओं और हवाओं से मुकाबला करता है।

वैज्ञानिकों ने बताया यह परियोजना कॉर्नवाल में जी 7 के दौरान विश्व महासागर दिवस पर शुरू की गई थी। इसके पहले चरण में और पिछले पांच महीनों में सात उपकरणों को समुद्र में सैकड़ों मील दूर तक जाते देखा जा चुका है।

दूसरे चरण में चार नए ट्रैकिंग उपकरण समुद्री स्तनधारियों और पक्षियों के रहने वाले मार्गों में लगाए गए हैं। जो समुद्र के तटों से दूर, गहरे समुद्र के  ऊपर से गुजर सकते हैं। जूलॉजिकल सोसाइटी और बांगोर विश्वविद्यालय द्वारा जारी एक हालिया अध्ययन ने वैश्विक जलवायु संकट और प्लास्टिक प्रदूषण के बीच संबंधों का खुलासा किया है। जिसमें चरम मौसम के प्रभाव से पुराने और दूरदराज के क्षेत्रों में माइक्रोप्लास्टिक्स का फैलना शामिल है।

ग्लासगो में चल रहे कॉप-26 के पूरा होने के बाद, चार उपकरणों को गर्मी, खारापन, ऑक्सीजन की कमी और प्रदूषण नाम दिया गया है। ताकि इन समुद्री संकटों को हल करने की आवश्यकता पर ध्यान आकर्षित किया जा सके। यह सुनिश्चित किया जा सके कि एक बार-बार होने वाले महासागर जलवायु संवाद भविष्य के जलवायु शिखर सम्मेलन के लिए मुख्य मुद्दा बन सके।

लंदन की जूलॉजिकल सोसायटी और यूनिवर्सिटी ऑफ एक्सेटर के प्रोफेसर हीथर कोल्डवी, परियोजना के प्रमुख वैज्ञानिक हैं। इस अभियान के निदेशक ने कहा की शोध के माध्यम से हमने देखा है कि प्लास्टिक और जलवायु परिवर्तन मौलिक और आंतरिक रूप से जुड़े हुए हैं। प्लास्टिक जीवाश्म ईंधन से बनता है, अपने जीवन चक्र के हर कदम पर यह ग्रीनहाउस गैसों का उत्पादन करता है। प्लास्टिक प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन दोनों का प्रभाव दुनिया भर में पड़ रहा है।

ये संकट वास्तव में आपस में जुड़े हुए हैं। महासागर में  प्लास्टिक के प्रवाह को ट्रैक करके हम उस जुड़ाव और व्यापक प्रभाव को प्रदर्शित करने की कोशिश कर रहे हैं जो इंसानो और हमारी धरती पर पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि यह स्वीकार करने की तत्काल आवश्यकता है कि जलवायु संकट महासागर संकट है।

महासागर राज्य (आईपीएसओ) पर अंतर्राष्ट्रीय कार्यक्रम के निदेशक मिरेला वॉन लिंडेनफेल ने कहा कि महासागर हमारी जलवायु को नियंत्रित करता है।

महासागर हमारी अतिरिक्त गर्मी और सीओ 2 उत्सर्जन के एक तिहाई से अधिक को अवशोषित करके जलवायु परिवर्तन को रोकने मैं मदद करता है।

समुद्र में किसी भी तरह के अपरिवर्तनीय और महत्वपूर्ण परिवर्तन का गहरा आर्थिक और पारिस्थितिक परिणाम हो सकता है।

हमने अपनी नई उपकरणों  को गर्मी, खारापन, डीऑक्सीजनेशन और प्रदूषण नाम दिया है ताकि यह उजागर किया जा सके कि समुद्र पर ये जलवायु से होने वाले प्रभाव पृथ्वी पर जीवन को कैसे प्रभावित करेंगे।

जैसा कि नए शोध से पता चलता है, जलवायु परिवर्तन का समुद्री प्लास्टिक संकट का अलग से इलाज नहीं किया जा सकता है। इसलिए ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन से साथ मिलकर निपटना होगा।

प्लायमाउथ विश्वविद्यालय में भौतिक समुद्र विज्ञान में एसोसिएट प्रोफेसर डॉ फिल होसेगूड ने कहा कि जी 7 के दौरान देखा कि कैसे प्लास्टिक समुद्र से दूर हो जाता है, फिर आसानी से हमारे समुद्र तटों पर वापस आ जाता है।

यह खुले समुद्र में धाराओं और हमारे तटों और समुद्र तटों के साथ बहने वाली धाराओं के बीच एक मजबूत संपर्क को प्रदर्शित करता है। हालांकि, यह भी दिखाता है कि यह कोई ऐसा मुद्दा नहीं है जिससे एक देश अकेले निपट सकता है, लेकिन जमीन से समुद्र में बहने वाले कचरे को रोकने के लिए स्थानीय स्तर पर उठाए गए कदमों का समग्र रूप से हमारे धरती पर सकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।

सालाना 35.9 करोड़  टन से अधिक प्लास्टिक का उत्पादन होता है और अगले 20 वर्षों में उत्पादन के दोगुना होने का अनुमान है। इस मात्रा का 40 फीसदी से अधिक एक बार उपयोग के लिए आवंटित किया गया है, कुछ समूहों, जैसे कि लंदन के अभियान, ने घर के करीब प्लास्टिक प्रदूषण की समस्या से निपटने का फैसला किया है।

शोधकर्ताओं ने कहा कि हमारे जलमार्गों से महासागर में मिलने वाले प्लास्टिक की मात्रा को कम करने के लिए हम सभी बहुत से ठोस और तत्काल कदम उठा सकते हैं।

शोधकर्ताओं ने कहा कि हमें उम्मीद है कि महासागरीय प्लास्टिक की आवाजाही पर ये नवीनतम आंकड़े दुनिया भर के अन्य शहरों को हमारे महासागर की एक बार उपयोग होने वाले प्लास्टिक प्रदूषण को रोकने के लिए प्रेरित करेगा।

यह अभियान वैज्ञानिकों, व्यवसायों, आगंतुकों के आकर्षण और सरकारों के साथ मिलकर प्लास्टिक की पानी की बोतलों पर निर्भरता और संख्या को कम करने के लिए काम करेगा।

उन्होंने हाल ही में दुनिया भर के संगठनों, अभियानों और शहरों के उद्देश्य से एक व्यावहारिक मार्गदर्शिका लॉन्च की है जो पर्यावरण संरक्षण के लिए एक प्रणालीगत परिवर्तन के रूप में में रुचि रखते हैं।

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