Sign up for our weekly newsletter

प्लास्टिक के कचरे से मैंग्रोव वनों का घुट रहा है दम : अध्ययन

प्लास्टिक का कचरा फंसने से मैंग्रोव के जंगलों में एक तरह का जाल बन जाता है, जो इन जंगलों के लिए काफी घातक होता है

By Dayanidhi

On: Wednesday 09 December 2020
 
Mangrove forests are suffocating due to plastic waste
Plastic waste was frequently observed to cover 50% of the forest floor,  Photo : Science of the Total Environment
Plastic waste was frequently observed to cover 50% of the forest floor, Photo : Science of the Total Environment

मैंग्रोव के महत्व को दुनिया भर में स्वीकार किया गया है, लेकिन कई मानव जनित समस्याओं के कारण मैंग्रोव जंगलों में लगातार गिरावट आ रही है। इंसानों द्वारा इस्तेमाल करने के बाद फैंका गया प्लास्टिक का कचरा इन जंगलों के लिए बड़ी मुसीबत बनता जा रहा है। एक अध्ययन में कहा गया है कि जिन इलाकों में प्लास्टिक का कचरा अधिक है, वहां मैंग्रोव के जंगल सबसे तेजी से घट रहे हैं। ऐसे इलाकों में दक्षिण पूर्व एशिया प्रमुख है।

जावा के उत्तरी तट के मैंग्रोव वनों का धीरे-धीरे प्लास्टिक कचरे के कारण दम घुट रहा हैं। पूर्वोत्तर एशिया में प्लास्टिक की बहुत बड़ी समस्या है और यह इस क्षेत्र के मैंग्रोव के लिए एक बड़ा खतरा है, मैंग्रोव तटीय कटाव को रोकने में एक अहम प्राकृतिक भूमिका निभाते हैं। रॉयल नीदरलैंड्स इंस्टीट्यूट फॉर सी रिसर्च (एनआईओजेड) के शोधकर्ता सेलीन वैन बिजस्टरवेल्ट बताते हैं कि बेहतर कचरा प्रबंधन के बिना इस ग्रीन प्रोटेक्शन बेल्ट की बहाली असंभव है।

वान बिजस्टरवेल्ट ने वर्षों से इंडोनेशियाई मैंग्रोव में प्लास्टिक कचरे की निगरानी की है। इसमें ज्यादातर घरेलू कूड़ा, दूसरे शहरों से तटीय क्षेत्रों तक स्थानीय नदियों द्वारा ले जाया जाता है। अंत में जमीन और समुद्र के बीच के क्षेत्र में यह कचरा फंस जाता है। वान बिजस्टरवेल्ट ने कहा कि मैंग्रोव के वनों पर प्लास्टिक फस कर एक तरह का जाल बन जाता हैं। मैंग्रोव वनों के लिए, यह जाल काफी घातक हो सकता है। जावा के तट पर सबसे आम मैंग्रोव वन, ग्रे मैंग्रोव, ज्वार के दौरान ऑक्सीजन लेने के लिए इनकी जड़ें ऊपर की ओर बढ़ती हैं। वान बिजस्टरवेल्ट कहते हैं आप इन जड़ों को श्वास नली (स्नोर्कल) के रूप में देख सकते हैं। जब इन जंगलों में प्लास्टिक कचरा जमा होता है, तो श्वास नली (स्नोर्कल) अवरुद्ध हो जाती हैं। प्लास्टिक से पूरी तरह से भरे क्षेत्रों में पेड़ों का दम घुटता है। यह अध्ययन साइंस ऑफ द टोटल एनवायरनमेंट में प्रकाशित हुआ है।

वान बिज़स्टरवेल्ट बताते हैं कि उत्तरी तट के किनारे मैंग्रोव वनों के तल प्लास्टिक कचरे से घिरे हुए हैं। औसतन हमें 27 प्लास्टिक आइटम प्रति वर्ग मीटर में मिलते हैं, कई स्थानों पर जंगल के आधे हिस्से प्लास्टिक से ढ़के हुए हैं। समस्या केवल सतह पर प्लास्टिक नहीं है। टीम ने पाया कि प्लास्टिक तलछट (सेडीमेंट) के अंदर 35 सेंटीमीटर तक गहरे दबे हुए हैं।

प्लास्टिक के इन ऊपरी परतों में फंसने से पेड़ों की ऑक्सीजन तक पहुंच कम हो जाती है। फिर भी पेड़ इस प्लास्टिक से ढ़के हुए क्षेत्र में भी अपने आपकों ढ़ाल रहे हैं। जब इनकी जड़ों पर प्लास्टिक फंस जाती है तो ये बदल जाते हैं। वे प्लास्टिक के चारों ओर बढ़ते हैं। जब वनों का आधा हिस्सा ढक जाता है, तब भी पेड़ों को अपने आपको बचाए रखने के लिए पर्याप्त ऑक्सीजन मिलती है।

हालांकि 75 फीसदी तक पहुंच जाने के बाद इनके जीवित रहने के आसार बहुत कम हो जाते हैं और तलछट में प्लास्टिक इसे 100 फीसदी तक धकेल देता है। हमने प्लास्टिक की थैलियों के अंदर जड़ों को देखा है। अंततः वे पेड़ जो प्लास्टिक को नहीं निकाल सकते वे मर जाते हैं।

स्थानीय समुदायों के सहयोग से वैन बिजस्टरवेल्ट आगे के कटाव को रोकने के लिए मैंग्रोव की बहाली करने वाली परियोजनाओं पर काम कर रहे हैं। वान बिज़स्टरवेल्ट ने कहा कि मैंग्रोव तटीय समुदायों के लिए एक कम लागत वाली और प्राकृतिक तौर पर रक्षा करते हैं। वे लहरों को रोकते हैं और पानी के साथ तलछट (सेडीमेंट) के बहने को रोकते है जिससे कटाव रुक जाता हैं।

मैंग्रोव वनों की बहाली से अधिक लाभ होता है। स्वस्थ मैंग्रोव का मतलब है स्वस्थ मछली की आबादी और एक निरंतर मछली पकड़ने की अर्थव्यवस्था। पर्यटन उद्योग जंगलों को एक बढ़ते आकर्षण के रूप में भी देख रहा है जो स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ाता है। इंडोनेशिया सरकार तट के किनारे ग्रीन-बेल्ट बनाने के प्रयास में मैंग्रोव बहाली में निवेश कर रही है। लेकिन बहाली धीमी है और मौजूदा वनों पर अधिक दबाव है।

वान बिज़स्टरवेल्ट ने बताया कि नए मैंग्रोव लगाने के प्रयास विफल रहे हैं। 'मैंग्रोव लगाने की प्रारंभिक संख्या में वृद्धि करने पर इतना ध्यान केंद्रित किया गया है, कि बड़े पेड़ों के वास्तविक अस्तित्व पर प्लास्टिक कचरे से उत्पन्न चुनौतियों की अनदेखी की गई है। प्लास्टिक की समस्या से निपटने के बिना मैंग्रोव को फिर से भरना एक चम्मच से महासागर को खाली करने की कोशिश करने जैसा है। स्थायी अपशिष्ट प्रबंधन के साथ मैंग्रोव की सफल बहाली के लिए सही से काम करने की जरूरत है।