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प्लास्टिक उपयोग गंभीर स्तर तक बढा, खारे दलदल में जमा हो रहे माइक्रोप्लास्टिक से चला पता: अध्ययन

वैज्ञानिकों ने उस प्लास्टिक की मात्रा का अनुमान लगाया गया है जो खारे दलदल में फंसा रह जाता है।

By Dayanidhi

On: Monday 07 June 2021
 
प्लास्टिक उपयोग गंभीर स्तर तक बढा, खारे दलदल में जमा हो रहे माइक्रोप्लास्टिक से चला पता: अध्ययन
Photo : Wikimedia Commons Photo : Wikimedia Commons

दुनिया भर में आज प्लास्टिक का उपयोग हर जगह हो रहा है। सेल फोन से लेकर पेन और कारों से लेकर चिकित्सा उपकरणों तक, हमारी आधुनिक कहे जाने वाली दुनिया प्लास्टिक और प्लास्टिक के कचरे से भरी हुई है। पूरी दुनिया में प्लास्टिक का उत्पादन हर साल बढ़ रहा है। अब मरीन बायोलॉजिकल लेबोरेटरी (एमबीएल) इकोसिस्टम सेंटर के वैज्ञानिकों के नए शोध में पाया कि प्लास्टिक कचरा कुछ दशकों से खारे दलदल में जमा हो रहा है।

खारे दलदल वाली भूमि और खुले महासागर के पारिस्थितिक तंत्र एक दूसरे से जुड़े हुए है। एक तरह से ये शहरी वातावरण और महासागर के बीच अहम भूमिका निभाते हैं। माइक्रोप्लास्टिक - 5 मिलीमीटर से छोटे प्लास्टिक के कण हैं जो पानी की सतह पर तैरते हैं। लेकिन जब खारे दलदल ज्वार से भर जाते हैं और कुछ समय के बाद खाली हो जाते हैं, तो पानी में तैरते प्लास्टिक के कण दलदली मिट्टी में उगने वाले पेड़-पौधों की शाखाओं और जड़ों के भीतर फंस जाते हैं और फिर हमेशा के लिए वही ठहर जाते हैं।

पेड़ के छल्ले की तरह परत दर परत खारे दलदली परत पर तलछट या गाद जमा होती है, जो पारिस्थितिकी तंत्र के भीतर तलछट का एक ऐतिहासिक रिकॉर्ड रखती है। एमबीएल शोध वैज्ञानिक जेवियर लोरेट कहते हैं कि तलछट जमा करके, वे तलछट के समय का रिकॉर्ड रखते हैं।

वैज्ञानिकों का अनुमान है कि दुनिया भर में हर साल लगभग 80 लाख टन प्लास्टिक समुद्र में प्रवेश करता है। लेकिन अब तक, उस प्लास्टिक की मात्रा का कोई अनुमान नहीं लगाया गया है जो खारे दलदली पारिस्थितिकी तंत्र में फंसा  रह जाता है।

शोधकर्ताओं ने केप कॉड, न्यू बेडफोर्ड, मास, हार्बर पर वैक्वॉइट बे सिस्टम में छह अलग-अलग मुहानों में दलदली तलछट को चुना। इन जगहों से नमूने लिए गए, शोधकर्ता उन क्षेत्रों में दशकों से जमा हो रहे माइक्रोप्लास्टिक्स की प्रचुरता कब से जमा हो रही है इसके बारे में पता लगाने में सफल रहे।

लोरेट बताते हैं कि जैसे-जैसे आप अतीत में जाते हैं, तो आपको मिलने वाले माइक्रोप्लास्टिक की मात्रा घटती जाती है। तलछटों में आपको जितने माइक्रोप्लास्टिक मिलते हैं, वह जनसंख्या से संबंधित होती है, यह मात्रा इस बात पर निर्भर करती है कि कितने लोग वहों प्लास्टिक का उपयग करते हैं।

शोधकर्ताओं ने बताया कि वैक्वॉइट बे प्लास्टिक प्रदूषण का अध्ययन करने के लिए एकदम सही खारे दलदल वाली प्रणाली है। क्योंकि हम एक ऐसे क्षेत्र की तुलना कर सकते हैं जो लगभग बहुत पुराना या प्राचीन है।  दूसरे क्षेत्र जो मानव गतिविधि से अत्यधिक प्रभावित है, वह "रूट पेड्रोसा-पॉमिस" है, उन्होंने कहा हमें इन जगहों पर बहुत अधिक प्लास्टिक प्रदूषण मिला। यह अध्ययन एनवायर्नमेंटल एडवांसेज में प्रकाशित हुआ है।

शोधकर्ताओं बताते हैं कि उन्होंने दो प्रकार के माइक्रोप्लास्टिक प्रदूषण पर ध्यान केंद्रित किया, वे टुकड़े जो बड़े प्लास्टिक के टुकड़ों के टूटने से बने और फाइबर- धागे जैसे प्लास्टिक जो कपड़ों और मछली पकड़ने के धागों से निकलते हैं। उन्होंने पाया कि समय और शहरीकरण के साथ प्लास्टिक के टुकड़ों के प्रदूषण में वृद्धि हुई है। शोधकर्ताओं ने कहा कि इकट्ठा करने वाली जगह के आसपास का क्षेत्र जितना अधिक आबादी वाला होगा, वहां उतने ही अधिक प्लास्टिक के टुकड़े देखे गए।

आंकड़ों में एक आश्चर्य यह था कि शहरीकरण बढ़ने के साथ तलछट में माइक्रोप्लास्टिक सांद्रता एक जैसी नहीं पाई गई। 50 फीसदी लंबे, माइक्रोप्लास्टिक के टुकड़ों की सांद्रता में बदलाव नहीं आया था, लेकिन एक बार जब भूमि पर 50 फीसदी तक कब्जा हो गया, तो वहां माइक्रोप्लास्टिक की मात्रा में तेजी से वृद्धि हुई।

शोधकर्ताओं का मानना ​​है कि टुकड़ों का एक स्थानीय आधार होता है खासकर जहां प्लास्टिक का उपयोग और निपटान किया जाता है। जबकि फाइबर को बड़े पैमाने पर शहरी क्षेत्रों से हवा या पानी द्वारा लंबी दूरी तक ले जाया जा सकता है।

लोरेट ने कहा जब हमने शुरुआत की थी, तो हमें पता नहीं था कि केप कॉड में माइक्रोप्लास्टिक एक मुद्दा था या नहीं। पहले किसी ने माइक्रोप्लास्टिक के लिए केप कॉड पर दलदली तलछट का विश्लेषण नहीं किया था।

अब जब वैज्ञानिकों ने दिखा दिया है कि खारे दलदल में माइक्रोप्लास्टिक प्रदूषण है, तो अगला कदम आगे की जानकारी हासिल करना है। प्लास्टिक के कण पारिस्थितिकी तंत्र में कैसे आ रहे हैं? स्रोत क्या हैं? वे वहां रहने वाले जीवों के पारिस्थितिकी तंत्र और खाद्य जाल को कैसे प्रभावित कर रहे हैं?