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बंधवाड़ी लैंडफिल ने दूषित किया 20 गांवों का पानी

फरीदाबाद और गुरुग्राम का करीब 1600 मिट्रिक टन कचरा रोज यहां पहुंचता है। बंधवाड़ी सहित दर्जनों गांव के लोग इस संयंत्र का विरोध कर रहे हैं 

By Bhagirath Srivas

On: Saturday 30 November 2019
 

अरावली की हरी-भरी पहाड़ियों में बसा बंधवाड़ी गांव किसी शहरी कस्बे जैसा लगता है। पक्के मकान, पक्की सड़कें और पानी की लिए निकासी के लिए बनी पक्की नालियां गांव के विकसित होने का एहसास कराती हैं। यह भ्रम उस वक्त टूटता है जब ग्रामीणों से बात होती है। गांव का हर व्यक्ति डर से साए में जी रहा है। इस डर की वजह है यहां फैली बीमारियां, खासकर जानलेवा कैंसर। ग्रामीण बताते हैं कि कैंसर की वजह बन रहा है दूषित पानी और दूषित पानी की वजह है खत्ता अथवा लैंडफिल साइट।

साल 2009 में यहां लैंडफिल और 2010 में ठोस कचरे की प्रोसेसिंग शुरू हुई लेकिन नवंबर 2013 में आग लगने की घटना के बाद से यहां कचरे की प्रोसेसिंग बंद है। फिलहाल यहां केवल कचरा डाला जा रहा है। फरीदाबाद और गुरुग्राम का करीब 1600 मिट्रिक टन कचरा रोज यहां पहुंचता है। बंधवाड़ी, मांगर, डेरा, ग्वाल पहाड़ी सहित दर्जनों गांव के लोग इस संयंत्र का विरोध कर रहे हैं।  

अगस्त 2016 में केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने संयंत्र के आसपास गांवों से लिए गए पानी के नमूने जांचने के बाद पाया था कि इसमें हानिकारक रसायन हैं और पानी पीने लायक नहीं है। पानी में कई रसायन तय मात्रा से ज्यादा पाए गए हैं। 

हरियाली संस्था के विवेक कंबोज बंधवाड़ी लैंडफिल से पर्यावरण को पहुंच रहे नुकसान के मुद्दे लगातार मुखर रहे हैं और इसे एनजीटी लेकर गए हैं। उन्होंने बताया कि जब से बंधवाड़ी लैंडफिल साइट शुरू हुई तब है, तब से 2018 तक आसपास गांवों के 200 से ज्यादा लोग कैंसर की चपेट में आकर जान गंवा चुके हैं।

कंबोज बताते हैं कि केंद्रीय ग्राउंड वॉटर अथॉरिटी ने अरावली क्षेत्र को भूमिगत जल का रिचार्ज जोन माना है। पर्यावरण के लिहाज से यह अति संवेदनशील क्षेत्र है, जिसे नष्ट किया जा रहा है। हमने 2015 में एनजीटी में याचिका दाखिल कर मांग की है कि संयंत्र को हटाया जाए। उन्होंने बताया कि भरावक्षेत्र को ऊंची पहाड़ी पर बनाया गया है। उसके चारों तरफ खाइयां हैं। लैंडफिल का गंदा पानी रिसकर जलस्रोतों में पहुंच रहा है। इससे न केवल पानी दूषित हो रहा है बल्कि वन्यजीव भी खत्म हो रहे हैं।

बंधवाड़ी गांव के परसादी पहलवान बताया कि खत्ते की वजह से पानी न तो पीने लायक बचा है और न ही नहाने या कपड़े धोने लायक। ग्रामीण गंदा पानी पीकर जान गंवा रहे हैं। उन्होंने बताया कि गांव में कैंसर से लगातार लोग मर रहे हैं। गांव में अब भी 15 से 20 लोग कैंसर से पीड़ित हैं और जिंदगी और मौत से जूझ रहे हैं।

डाउन टू अर्थ कैंसर से जूझ रहा ऐसे ही परिवार के घर पहुंचा जहां करीब 35 के साल के घनश्याम बिस्तर पर लेटे मिले। दूषित पानी के कारण घनश्याम कैंसर से जूझ रहे हैं। उन्हें बोलने में तकलीफ है। उनकी पत्नी ने बताया “परिवार में जेठानी की भी कैंसर से मौत हो चुकी है। जिनके पास पैसा है वे बीमारियों से बचने के लिए गांव छोड़कर शहर में बस गए हैं लेकिन जो गरीब हैं वे यहां तिल-तिल मर रहे हैं।”

ग्रामीण महेंदर ने बताया कि दूषित पानी की वजह से उनकी मौसी नत्थो की भी कैंसर की वजह से मौत हो चुकी है। गांव में तीन सगे भाई हरिकिशन, बुद्धि और बलेश भी कैंसर की भेंट चढ़ चुके हैं।

ग्रामीण चैनपाल एक दूसरी समस्या की ओर इशारा करते हैं। उन्होंने बताया “गांव में रोजी रोटी का मुख्य जरिया पशुपालन है। शहरों में दूध बेचकर लोग गुजर-बसर कर हैं। जब से शहर के लोगों को पता चला है कि गांव का पानी जहरीला हो गया है, तब से उन्होंने दूध लेना बंद कर दिया है। कुछ समय पहले गांव के सुरेंदर और सरबजीत दूध लेकर शहर गए थे लेकिन उनका 125 किलो दूध बिना बिके वापस आ गया। शहर में लोगों ने उनका दूध लेने से साफ इनकार कर दिया।”   

चैनपाल बताते हैं कि खत्ते की पॉलिथीन और कचरा खाने से गाय और भैंसें मर रही हैं। अब दूध की बिक्री बंद या कम होने से रोजी रोटी पर भी संकट आ गया है। उन्होंने बताया कि गंदा पानी पीने आयदिन पशु मर रहे हैं। गांव के बहुत से लोगों ने अब बीमारियों से बचने के लिए 25 रुपये में 20 लीटर पानी खरीदकर पी रहे हैं।

ग्रामीण बताते हैं कि गांव में फैल रही बीमारियों और खत्ते की वजह से लोग अपनी लड़कियों की यहां के लड़कों से शादी नहीं करना चाहते। वे कई बार नेताओं और निगम अधिकारियों से मिलकर अपनी परेशानियां बता चुके हैं लेकिन समस्या दूर नहीं हुई।

ग्रामीणों के अनुसार, लैंडफिल साइट से बंधवाड़ी के अलावा मांगर, बलियावास, डेरा, ग्वाल पहाडी, बास, भांडई, फतेहपुर,बैरमपुर, घाटा, कूलावास, कादरपुर आदि 20 गावों का पानी दूषित हो चुका है।

बंधवाड़ी गांव के पास ही फरीदाबाद जिले स्थित मांगर गांव भी इन्हीं दिक्कतों से जूझ रहा है। यहां रहने वाले देशराज ने बताया कि कोई सुनवाई नहीं हो रही है। गांव का पानी पूरी तरह खराब हो चुका है। गंदा पानी पीने और कचरा खाने से गायों का दूध भी दूषित हो गया है। ग्वाल पहाड़ी में रहने वाले मंगल सिंह बताते हैं कि जब से लैंडफिल साइट बनी है, तब से बदबू और मक्खियों के कारण घर में बैठना मुश्किल हो गया है। 

ग्रामीणों को एक और बात का डर है। उनका कहना है कि लैंडफिल साइट अभी 18 एकड़ में है। इसे 32 एकड़ में और बढ़ाने की बात की जा रही है। अगर ऐसा हुआ तो गांव में रहना असंभव हो जाएगा। इस वक्त बदबू और मक्खी मच्छरों से लोग बेहाल हैं। अगर इसका विस्तार हुआ तो सांस लेना भी मुश्किल हो जाएगा। 

ग्रामीण सतवीर में बताया कि जब लैंडफिल साइट नहीं थी तब गर्मी के दिनों में भी यहां कूलर और पंखे की जरूरत महसूस नहीं होती थी। लेकिन अब हालात बहुत खराब हो चुके हैं। कुछ लोगों ने आरओ लगवा लिए हैं लेकिन जिनके पास पैसे नहीं हैं, उनके पास दूषित पानी पीने के अलावा कोई चारा नहीं हैं।