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पर्यावरण मुकदमों की डायरी: हाईवे के किनारे बढ़ते अतिक्रमण पर एनएचएआई ने दायर किया हलफनामा

पर्यावरण से संबंधित मामलों में सुनवाई के दौरान क्या कुछ हुआ, यहां पढ़ें-

By Susan Chacko, Lalit Maurya

On: Tuesday 17 November 2020
 

भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने हाईवे के साथ-साथ बढ़ते अतिक्रमण को हटाने के लिए उठाए गए कदमों पर एक हलफनामा एनजीटी में  दायर किया है।

गौरतलब है कि इससे पहले एनजीटी ने अपने 18 जून, 2020 को दिए आदेश में एनएचएआई को हाईवे के किनारे हुए अतिक्रमण और उन्हें हटाने के बारे में जानकारी मांगी थी। साथ ही इस हलफनामे में हाईवे के दोनों और ग्रीन बेल्ट के प्रावधान और उसके रखरखाव के बारे में भी जान्काइर मांगी गई थी। साथ ही लगाए गए कितने पेड़ अभी भी जीवित हैं उसके बारे में भी जानकारी मांगी थी।

एनएचएआई ने जानकारी दी है कि हाईवे के किनारे अतिक्रमण को रोकने की जिम्मेवारी उस स्थान का प्रयोग करने वाले की है जिसे उसकी जिम्मेवारी दी गई है। उसके साथ ही उस स्थान पर हुए अवैध अतिक्रमण को हटाने और कैरिजवे एवं मीडियन के साथ-साथ पेड़ों को लगाने और रखरखाव की जिम्मेवारी उसकी ही है।

एनएचएआई ने जानकारी दी है कि उसकी परियोजना क्रियान्वयन इकाइयों (पीआईयू) ने अपने वैधानिक दायित्वों को निभाते हुए अपने रियायतों और ठेकेदारों को निर्देश दिया है कि वो गश्त के दौरान हाईवे पर मिले अतिक्रमण को तुरंत हटाएं। यदि अतिक्रमणकारी इस मामले में विरोध करते हैं तो उसके लिए पीआईयू ने समय-समय पर जिला अधिकारियों से मदद मांगी है। लेकिन उनसे कोई मदद नहीं मिली है। 

एर्नाकुलम में भूजल प्रदूषण के मामले में ऐडयार जिंक लिमिटेड ने एनजीटी के सामने रखा अपना पक्ष

ऐडयार जिंक लिमिटेड ने के के मुहमद इकबाल बनाम केरल राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के मामले में एक जवाबी हलफनामा एनजीटी में दायर किया है। मामला जिंक उद्योग द्वारा किए जा रहे जल प्रदूषण से जुड़ा है। आरोप है कि पुराने तालाब से निकलता दूषित जल केरल के एर्नाकुलम जिले में एदयाट्टुचल और चकरचल में स्थित धान के खेतों को दूषित कर रहा है।

एनजीटी में एलोर-ऐडयार पर प्रस्तुत पर्यावरण प्रभाव के आकलन से जुड़ी रिपोर्ट से पता चला है कि हैवी मेटल और कीटनाशकों के चलते उस इलाके में प्रदूषण फ़ैल रहा है। जिसके लिए रिपोर्ट में एचआईएल (हिंदुस्तान कीटनाशक लिमिटेड), मर्सिडीज लिमिटेड, आईआरई (इंडियन रियर अर्थ लिमिटेड) और फैक्ट (यूडी) को जिम्मेवार माना है। 

जबकि जिंक उद्योग के साथ-साथ सीएमआरएल (कोचीन मिनरल्स एंड रुटिल्स लिमिटेड), सूद-केमी इंडिया प्राइवेट लिमिटेड, मर्चेम इंडिया प्राइवेट लिमिटेड और मर्चेम लिमिटेड और लेदर टैनिंग यूनिट्स को ऐडयार में भूजल और मिट्टी में बढ़ रहे प्रदूषण के लिए जिम्मेवार माना है। गौरतलब है कि इन उद्योगों से हो रहे प्रदूषण के चलते हैवी मेटल्स जमीन और पानी को दूषित कर रही हैं।

जिंक उद्योग ने अपने बचाव में कहा है कि ऐडयार में हो रहे प्रदूषण के लिए केवल वो ही जिम्मेदार नहीं है। एलएइसी द्वारा जारी पर्यावरण प्रभाव आंकलन की रिपोर्ट से पता चला है कि एदयाट्टुचल और चकरचल में पानी, मिट्टी और तलछट के नमूनों में हैवी मेटल्स जैसे जिंक, आयरन, लेड, कैडमियम कॉपर, निकेल और टोटल क्रोमियम जैसी भारी धातुएं मिली हैं। जबकि जिंक कंपनी के जेरोसाइट तालाब में केवल जस्ता, लोहा, सीसा, कैडमियम, तांबा और निकल की उपस्थिति पाई गई है। वहीं एदयाट्टुचल में भूजल, मिटटी और तलछट के नमूनों में मिले टोटल क्रोमियम का कंपनी के तालाब में कोई नामों निशान नहीं है। जिसका मतलब है कि धान के खेतों में हो रहे प्रदूषण के लिए केवल वो ही अकेला ही जिम्मेवार नहीं है।  

उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने मेसर्स उन्नति कंस्ट्रक्शन पर लगाया 10,37,500 रुपए का जुर्माना

मेसर्स उन्नति कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड ने अपने राम सुधा अपार्टमेंट परिसर की स्थापना और संचालन के लिए किसी प्रकार की सहमति नहीं ली है। यह जानकारी हाल ही में जारी उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (यूपीपीसीबी) की रिपोर्ट में सामने आई है। यह अपार्टमेंट उत्तर प्रदेश में अलीगढ़ के स्वर्ण जयंती नगर में स्थित है। गौरतलब है कि इस अपार्टमेंट के लिए जल (प्रदूषण निवारण और नियंत्रण) अधिनियम, 1974 के तहत स्वीकृति लेना जरुरी था, लेकिन इस प्रोजेक्ट में ऐसा नहीं किया गया। न ही वहां निर्धारित समय में सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) की स्थापना के लिए प्रस्ताव रखा गया है।

रिपोर्ट से जानकारी मिली है कि यूपीपीसीबी ने मेसर्स उन्नति कंस्ट्रक्शन के राम सुधा अपार्टमेंट को बंद करने के लिए आदेश जारी कर दिया है। साथ ही उस पर वाटर एक्ट के तहत 10,37,500 का जुर्माना लगाया है। उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की इस रिपोर्ट को 17 नवंबर, 2020 को ऑनलाइन किया गया है।