Sign up for our weekly newsletter

पर्यावरण मुकदमों की डायरी: त्रयंबकेश्वर नदी के प्रदूषण पर रोक लगाने में विफल रहा है एमपीसीबी : एनजीटी

देश के विभिन्न अदालतों में विचाराधीन पर्यावरण से संबंधित मामलों में क्या कुछ हुआ, यहां पढ़ें-

By Susan Chacko, Dayanidhi

On: Friday 30 October 2020
 

नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने महाराष्ट्र के मुख्य सचिव को निर्देश दिया कि वे जिला नासिक के त्र्यंबकेश्वर में अनुपचारित सीवेज को बहाने के मामले में कार्रवाई करें। अदालत ने 28 अक्टूबर, 2020 को पारित एक आदेश में कहा कि राज्य के दोषी अधिकारियों के खिलाफ उपचारात्मक कार्रवाई की जाए और 23 फरवरी, 2021 से पहले कार्रवाई के अनुपालन में एक हलफनामा दाखिल किया जाए।

महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (एमपीसीबी) ने 26 दिसंबर, 2019 को अपनी रिपोर्ट में कहा था कि त्र्यंबकेश्वर नगर परिषद की विफलता के कारण प्रदूषण हो रहा है।

एमपीसीबी ने 27 अक्टूबर को एक अन्य रिपोर्ट के माध्यम से एनजीटी को बताया कि 1 एमएलडी की क्षमता वाले मौजूदा सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) की अस्थायी तौर पर बिजली बाधित होने के कारण संचान नहीं हो पाया, एसटीपी के संचालन के लिए बिजली की कोई बैकअप सुविधा नहीं हैं।

एसटीपी के प्रवेश-मार्ग (इनलेट) पर प्रवाह के बारे में पता लगाने के लिए कोई फ्लो मीटर नहीं लगया गया था और एसटीपी के प्रवेश-मार्ग से बेकार पानी को बहते हुए देखा गया, जो सीधे गोदावरी नदी में मिल रहा था। इसी तरह, त्र्यंबक नगर परिषद सीधे गोदावरी नदी में दो अन्य नालों - नीलगंगा नाला और म्हारारोड नाले के माध्यम से सीवेज का निर्वहन कर रहा है। एमपीसीबी की रिपोर्ट के अनुसार उक्त नालों पर इन-सीटू उपचार जैसे कि फाइटोरामेडियेशन या बायोरेमेडिएशन नहीं लगाए गए हैं।

एनजीटी ने एमपीसीबी की रिपोर्ट में बताई गई कमियों पर नाखुशी जाहिर की।

एनजीटी ने कहा कि नगर परिषद बार-बार कह रहा है कि वे डीपीआर तैयार करने के लिए कुछ सलाहकारों के साथ बैठकें करेंगे लेकिन यह कहकर वे इस तरह कानून के निरंतर उल्लंघनों को सही नहीं ठहरा सकते हैं।

इसके अलावा राज्य पीसीबी 'पोलुटर पे (प्रदूषण फैलाने वाले भुगतान करें) सिद्धांत पर रिकवरी मुआवजे और अन्य ठोस कदम उठाने के संबंध में अपने कर्तव्य में विफल रहा है। नागरिकों की धरपकड़ के लिए कानून उल्लंघनकर्ताओं की व्यक्तिगत जवाबदेही तय करने में राज्य प्रशासन भी विफल रहा है।

कोनोथुपुझा नदी में अतिक्रमण और प्रदूषण पर ग्राम पंचायत ने एनजीटी को सौंपी रिपोर्ट

अम्बालाउर ग्राम पंचायत ने केरल के एर्नाकुलम जिले में नादामा, मनकुन्नम गांवों, कन्ननूर तालुक से होकर बहने वाली कोनोथुपुझा नदी के अवैध अतिक्रमण और प्रदूषण पर एनजीटी को एक रिपोर्ट सौंपी। यह रिपोर्ट एनजीटी द्वारा 24 जनवरी को पारित अंतरिम आदेश के जवाब में थी।

केरल सरकार ने एक संयुक्त समिति का गठन किया और कोनोथुपुझा नदी के प्रदूषण को रोकने और नदी को पहले जैसा करने के लिए एक कार्य योजना तैयार की। इस संबंध में आवश्यक कदम उठाने के लिए इसे समिति को सौंपा गया था। समिति की एक बैठक 15 जून को जिला कलेक्टर के साथ की गई थी, जिसमें कलेक्टर ने अध्यक्ष के रूप में  भाग लिया था।

निर्णय लिया गया कि कोनोथुपुझा नदी की सीमाओं का निर्धारण करने के लिए सर्वेक्षणकर्ताओं की सहायता ली जानी चाहिए। रिपोर्ट में कहा गया है कि यह सर्वेक्षण का शुरू होना इस बात पर निर्भर करेगा कि, सर्वेक्षण करने के लिए स्थानीय स्व-सरकारी संस्थाएं खर्च होने वाली राशि को कब जमा करेंगी।

तदनुसार सर्वेक्षण के उप निदेशक ने खर्च होने वाली राशि का आकलन किया और अम्बालाउर ग्राम पंचायत ने 11 अगस्त, 2020 को सर्वेक्षण विभाग को अपनी सीमा के भीतर, कोनोथुपुझा नदी की सीमा का सर्वेक्षण करने के लिए आयोजित राशि को स्थानांतरित कर दिया।

सर्वेक्षण विभाग द्वारा सर्वेक्षण प्रक्रियाओं को पूरा करने पर, यदि पुरमपोक भूमि में अतिक्रमण पाया जाता है तो, केरल भूमि संरक्षण अधिनियम, 1957 के अनुसार, उसे बेदखल कर दिया जाएगा। इन उपायों के समानांतर, कोनोथुपुझा नदी से कचरे को हटाने के लिए लघु सिंचाई विभाग द्वारा कदम उठाए गए हैं।

थामिबरानी नदी में अवैध रेत खनन और प्रदूषण दूर करने के लिए संयुक्त समिति ने दिए सुझाव

संयुक्त समिति ने एनजीटी के समक्ष एक रिपोर्ट प्रस्तुत की। रिपोर्ट में थामिबरानी नदी के तट पर अवैध रेत खनन को रोकने के लिए उठाए गए कदमों और आस-पास के उद्योगों और वर्कशॉप द्वारा नदी में अवैध व्यापार अपशिष्टों का निर्वहन किया गया था। नदी में अनुपचारित मल के निर्वहन के कारण भी प्रदूषण होने के बारे में बताया गया।

थामिबरानी नदी में सेप्टिक टैंकों के आउटलेट से अंतिम अपशिष्ट के मिश्रण को रोकने के लिए, चरण-दो और चरण- तीन में भूमिगत सीवरेज योजनाओं (यूजीएसएस) को निष्पादित किया जा रहा था। नदी में छोड़े गए घरेलू सीवेज के उपचार के लिए अस्थायी उपायों के रूप में देवत्स (DEWATS) तकनीक को 8 स्थानों पर लागू किया जा रहा है।

तमिलनाडु प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (टीएनपीसीबी) ने तिरुनेलवेली नगर निगम के कमिश्नर से कहा कि वह शहर क्षेत्र में जहां सीवरेज प्रणाली नहीं है, वहां के लिए भूमिगत सीवरेज प्रणाली की व्यवस्था करे और यह सुनिश्चित करे कि वर्तमान अनुपचारित शहर का सीवेज जो थामिबरानी, कोडागन चैनल, तिरुनेलवेली चैनल और पालय्मक्कल चैनल से नदी में बह रहा है उसे बंद कर दे और सीवेज का 100 फीसदी उपचार सुनिश्चित करें।

तिरुनेलवेली के भूविज्ञान और खनन के सहायक निदेशक ने कहा है कि राजस्व, पुलिस और खान विभाग द्वारा थामिबरानी नदी में अवैध रेत खनन की जांच के लिए कड़ी कार्रवाई की जा रही है। भू-विज्ञान और खनन विभाग (डिपार्टमेंट ऑफ़ जियोलॉजी एंड माइनिंग) के उड़नदस्ते ने अवैध रेत खनन के साथ-साथ भंडारण और रेत की आवाजाही पर अंकुश लगाने के लिए छापेमारी की।

तिरुनेलवेली नगर निगम के कमिश्नर ने करुपन्धुराई और वन्नारपेट्टई में धोबियों द्वारा कपड़े धोने को रोकने के लिए तीन स्थानों पर धोबी खाना बनाने का प्रस्ताव दिया है। तेल और पानी को अलग करने की प्रणाली लगाने का प्रस्ताव है जिसे 30 सितंबर, 2021 तक पूरा किया जाएगा।

ये संयुक्त समिति की रिपोर्ट में उल्लिखित कुछ उपाय थे जिससे थामिबरानी नदी की रक्षा की जाए।

जल निकायों की बहाली

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) ने एनजीटी के समक्ष एक रिपोर्ट प्रस्तुत की, जिसमें राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से प्राप्त सूचनाओं को शामिल किया गया, ताकि जल निकायों की बहाली के लिए कार्य योजना बनाई जा सके।

छत्तीसगढ़ ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि वर्ष 2019-2020 के दौरान लगभग 68,803 तालाबों का जीर्णोद्धार किया गया। जिनमें से, 33,106 तालाबों को मनरेगा योजना के तहत बहाल किया गया था, जबकि वित्तीय वर्ष 2018-2019 के दौरान 2,38,004 तालाबों को बहाल किया गया था। सभी पहचान किए गए जल निकायों को भू-टैग (जियो-टैग) किया गया है, सभी को एक विशिष्ट पहचान संख्या आवंटित की गई है।

दिल्ली के वेटलैंड प्राधिकरण, पर्यावरण विभाग, दिल्ली सरकार के राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र ने बताया कि 49 तालाब हैं जो दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) और बागवानी विभाग के अधिकार क्षेत्र में हैं। सभी 49 तालाबों को जीर्णोद्धार के लिए चुना गया था और 4 तालाबों को पहले ही बहाल कर दिया गया था। इन तालाबों का उपयोग मुख्य रूप से बागवानी और मनोरंजन प्रयोजनों के लिए किया जा रहा है। अधिकांश तालाब स्थानीय नालों से प्रदूषित हो रहे थे। एसटीपी स्थापित करके नाली के सीवेज के उपचार के लिए कार्य योजना तैयार की गई है।