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पर्यावरण मुकदमों की डायरी: जानें, आज अदालतों में क्या हुआ

डाउन टू अर्थ की विशेष प्रस्तुति: सुप्रीम कोर्ट, हाई कोर्ट और एनजीटी में पर्यावरण अदालतों में चल रही सुनवाई के दौरान क्या हुआ

By Susan Chacko, Dayanidhi

On: Monday 06 July 2020
 

गुरुग्राम मेट्रोपॉलिटन डेवलपमेंट अथॉरिटी (जीएमडीए) ने 5 जुलाई, 2020 को सौंपी अपनी एक रिपोर्ट में कहा है कि यमुना नदी के क्षेत्र में एक सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट लगाने का प्रस्ताव है। इसके बाद बारिश की नालियों के साथ बहने वाले अनुपचारित सीवेज को 31 दिसंबर, 2020 तक बंद कर दिया जाएगा, लेकिन साथ ही कोविड-19 लॉकडाउन के कारण इस कार्य को करने की समय सीमा को बढ़ाए जाने का अनुरोध किया है।

जीएमडीए ने बताया कि कोविड-19 की महामारी के कारण हाल ही में हुए लॉकडाउन से नजफगढ़ के नाले से पहले बहने वाले जल का बायोकेमिकल ऑक्सीजन डिमांड (बीओडी) पैरामीटर 43.29 एमजी / लीटर से घटकर 14.39 एमजी / लीटर हो गया है।

लॉकडाउन के दौरान निवासियों को पानी की आपूर्ति उसी समान मात्रा में की जा रही थी जो अभी की जा रही है। जीएमडीए का विचार है कि फाइटो-रिमेडिएशन पर खर्च को सही तरीके से किया जाएगा, क्योंकि वर्तमान स्थिति से स्पष्ट है कि पानी में बायोकेमिकल ऑक्सीजन डिमांड (बीओडी) का स्तर सीमा के अंदर है। रिपोर्ट में कहा गया है कि हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को प्रदूषण करने वाले स्रोत की पहचान करनी चाहिए और ऐसी प्रदूषणकारी इकाइयों के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए।

साइनोर लाइफ साइंसेज में दिखी सुरक्षा उपायों की भारी कमी

29 जून, 2020 को जिला कलेक्टर विशाखापत्तनम ने एम/एस साइनोर लाइफ साइंसेज प्राइवेट लिमिटेड, जेएन फार्मा सिटी, ग्राम थानम, परवाड़ा मंडल में हाइड्रोजन सल्फाइड (एच2एस) गैस के रिसाव के बारे में एक रिपोर्ट तैयार की है। 

यहां एच2एस गैस रिसाव के दौरान सांस लेने से दो व्यक्तियों की मृत्यु हो गई थी। यह गैस 'एसएसआर-107 में बेंज़िमिडाज़ोल के तृतीय चरण में उत्पन्न तरल को स्थानांतरित करते हुए निकली थी। यह घटना तब हुई जब नली के पाइप को बिना ठीक किए सीधे नोजल में डाला गया था, निप्पल को एयर टाइट भी नहीं किया गया था।

रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि उत्पन्न तरल के भंडारण और इसे दूसरी जगह भेजने के लिए सुरक्षा के उपाय नहीं किए गए थे। इसके साथ ही संचालन प्रक्रिया के लिए मानक भी तैयार नहीं किए गए थे। काम के दौरान उत्पन्न होने वाले संभावित खतरों के बारे में श्रमिकों को प्रभावी प्रशिक्षण नहीं दिया गया था।

ब्रह्मपुरम सॉलिड वेस्ट प्रोसेसिंग प्लांट में प्रदूषण रोकने के लिए उठाए गए कदम नाकाफी : एनजीटी

एनजीटी ने 3 जून को केरल राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (केएसपीसीबी) द्वारा केरल के कोच्चि शहर के बाहरी इलाके में ब्रह्मपुरम सॉलिड वेस्ट प्रोसेसिंग प्लांट में प्रदूषण को रोकने के लिए उठाए गए कदमों को अपर्याप्त बताया। एनजीटी ने कहा कि अपशिष्ट प्रबंधन के सही तरीके से निपटने के गंभीर परिणाम हो सकते हैं।

ट्रिब्यूनल ने केएसपीसीबी को हर दिन के आधार पर प्रभावी कदम उठाने और 4 अगस्त 2020 से पहले एक और रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया। यह आदेश न्यायमूर्ति वी रामकृष्ण पिल्लई, पूर्व न्यायाधीश, केरल उच्च न्यायालय द्वारा 22 फरवरी को दायर रिपोर्ट के जवाब में था, जिसमें कानून का निंरतर उल्लंघन होने की बात कही गई।

केएसपीसीबी द्वारा 16 जून को दायर एक अन्य रिपोर्ट में कहा गया था कि पुराने कचरे के निपटारे के लिए नगर निगम द्वारा ई-टेंडर जारी किया गया था, जिसे अपरिहार्य कारणों से रद्द कर दिया गया।

इसके अलावा कभी समाप्त होने वाले (गैर-बायोडिग्रेडेबल) कचरे की पूरी मात्रा जिसे कोच्चि कॉर्पोरेशन से एकत्र कर लाया गया था उसे ब्रह्मपुरम प्लांट के दो खुली जगहों में निपटाया गया। इसमें से केवल 1% प्लास्टिक कचरे को अलग कर उसे रिसाइकल करने वालों को दिया गया।

करावल नगर औद्योगिक क्षेत्र में चल रही इकाइयों पर डीपीसीसी की रिपोर्ट

दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (डीपीसीसी) की रिपोर्ट के अनुसार, करावल नगर औद्योगिक क्षेत्र में किसी भी इकाई को एलपीजी / पीएनजी के अलावा अन्य ईंधन के उपयोग से चलाने की अनुमति नहीं है। रिपोर्ट में कहा गया है कि यहां नियमित रूप से पर्यावरण मानदंडों के अनुपालन की जांच की जाती है।

रिपोर्ट एनजीटी के आदेश के जवाब में थी, जिसमें एनजीटी ने डीपीसीसी, सीपीसीबी और उप-विभागीय मजिस्ट्रेट कार्यालय, करावल नगर के अधिकारियों सहित एक टीम द्वारा क्षेत्र में इकाइयों के निरीक्षण करने का निर्देश दिया गया था। डीपीसीसी ने रिपोर्ट के माध्यम से बताया है कि करावल नगर में 117 वाइट श्रेणी की इकाइयां, 54 ग्रीन श्रेणी की इकाइयां और 13 ऑरेंज श्रेणी इकाइयां हैं।