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दुनिया भर में 52 फीसदी वेस्ट वाटर का नहीं हो पाता ट्रीटमेंट

दुनिया भर में हर साल लगभग 35,900 करोड़ क्यूबिक मीटर अपशिष्ट जल का उत्पादन होता है, जोकि 14.4 करोड़ ओलंपिक आकार के स्विमिंग पूल के बराबर है।

By Dayanidhi

On: Tuesday 16 February 2021
 
Only 48% of the waste water generated worldwide is treated
Photo:  Wikimedia Commons, Wastewater Treatment Photo: Wikimedia Commons, Wastewater Treatment

यूट्रेक्ट विश्वविद्यालय और संयुक्त राष्ट्र विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों द्वारा किए गए एक नए अध्ययन के अनुसार, दुनिया भर में लगभग आधे अपशिष्ट जल (वेस्ट वाटर) का ट्रीटमेंट किया जाता है।

मनुष्य और कारखाने प्रति दिन भारी मात्रा में अपशिष्ट जल का उत्पादन करते हैं। यदि इसका ठीक से एकत्र और उपचार नहीं किया गया, तो अपशिष्ट जल से मानव स्वास्थ्य को गंभीर खतरा हो सकता है और यह पर्यावरण को प्रदूषित कर सकता है।

अध्ययनकर्ताओं ने अपशिष्ट जल उत्पादन, संग्रह, उपचार और पुन: उपयोग की मात्रा का अनुमान लगाने के लिए राष्ट्रीय आंकड़ों का उपयोग किया हैं। यूट्रेक्ट विश्वविद्यालय के अध्ययनकर्ता एडवर्ड जोन्स ने कहा कि विश्व स्तर पर हर साल लगभग 35,900 करोड़ क्यूबिक मीटर अपशिष्ट जल का उत्पादन होता है, जोकि 14.4 करोड़ ओलंपिक आकार के स्विमिंग पूल के बराबर है। वर्तमान में इस अपशिष्ट जल का लगभग 48 फीसदी का उपचार किया जाता है। जो कि 80 फीसदी के सौचे गए आंकड़ों की तुलना में बहुत कम है।

हालांकि परिणाम पिछले काम की तुलना में अधिक आशावादी हैं, अध्ययनकर्ता जोर देते हैं कि कई चुनौतियां अभी भी मौजूद हैं। जोन्स ने कहा हम देखते हैं कि विशेष रूप से विकासशील देशों में, जहां भविष्य में अधिकांश जनसंख्या वृद्धि की संभावना है, वहां की उपचार दर पिछड़ रही है। इन देशों में, विशेष रूप से, अपशिष्ट जल का उत्पादन तेजी से बढ़ने के आसार हैं, जो संग्रह बुनियादी ढांचे और उपचार सुविधाओं के वर्तमान विकास की तुलना में अधिक है। यह मानव स्वास्थ्य और पर्यावरण दोनों के लिए गंभीर खतरा पैदा करता है।

विकासशील देशों में, अपशिष्ट जल को इकट्ठा करने और उसके उपचार के लिए बुनियादी ढांचे के निर्माण के लिए वित्तीय संसाधनों की कमी है, जो मुख्य समस्याओं में से एक है। यह विशेष रूप से उन्नत उपचार तकनीकों का मामला है, जो महंगा हो सकता है। हालांकि, अध्ययनकर्ता अपशिष्ट जल के पुन: उपयोग के लिए संभावित अवसरों को उजागर करते हैं, जो कि अपशिष्ट जल उपचार प्रथाओं में सुधार करने में मदद कर सकते हैं। यह शोध जर्नल अर्थ सिस्टम साइंस डेटा में प्रकाशित हुआ है।

जोन्स कहते हैं कि अपशिष्ट जल का सबसे स्पष्ट पुन: उपयोग ताजे पानी की आपूर्ति को बढ़ाने के लिए है। अपशिष्ट जल का पुन: उपयोग पहले से ही कई सूखा प्रभावित देशों में सिंचाई के पानी का एक महत्वपूर्ण स्रोत है, विशेष रूप से मध्य पूर्व और उत्तरी अफ्रीका में। हालांकि, वर्तमान में दुनिया भर में केवल 11 फीसदी अपशिष्ट जल का पुन: उपयोग किया जा रहा है, जिसे बढ़ाया जा सकता है।

'कचरे' से संसाधन तक

जोन्स कहते हैं केवल ताजे पानी में वृद्धि करना एकमात्र विकल्प नहीं है। अपशिष्ट जल में पोषक तत्वों और ऊर्जा के स्रोत के रूप में भी बड़ी क्षमता होती है। अपशिष्ट को एक संसाधन के रूप में मान्यता दी जा सकती है।

हालांकि, अध्ययनकर्ता अपशिष्ट जल उपचार संयंत्रों की उचित निगरानी के महत्व पर जोर देते हैं, साथ ही मजबूत कानून और नियमों के साथ, यह भी सुनिश्चित करना कि अपशिष्ट जल का पुन: उपयोग सुरक्षित हो। अध्ययनकर्ताओं ने अपशिष्ट जल के पुन: उपयोग की दिशा में एक अन्य महत्वपूर्ण अवरोध के रूप में सार्वजनिक स्वीकृति को भी स्वीकार किया है।

भारत में अपशिष्ट जल उत्पादन और उपचार

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की 2015 की रिपोर्ट के अनुसार भारत में लगभग 37 फीसदी अपशिष्ट जल या 22,963 मिलियन लीटर प्रति दिन (एमएलडी), उपचारित करने की क्षमता है। भारत में रोज लगभग 61,754 एमएलडी  सीवेज उत्पन्न होता है।