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उत्तर प्रदेश के 63 जिलों में फ्लोराइड, 25 में आर्सेनिक व 18 में दोनों की मात्रा अधिक

उत्तर प्रदेश के वाटर एण्ड सेनिटेशन मिशन ने आरटीआई के जबाव में जियोग्राफिकल क्वालिटी टेस्टिंग सर्वे रिपोर्ट की जानकारी दी, लेकिन यह रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की जा रही है

On: Thursday 26 December 2019
 
उत्तरप्रदेश के कई जिलों में आर्सेनिक व फ्लोरायड की मात्रा तय मानक से अधिक है। फोटो: मीता अहलावत
उत्तरप्रदेश के कई जिलों में आर्सेनिक व फ्लोरायड की मात्रा तय मानक से अधिक है। फोटो: मीता अहलावत उत्तरप्रदेश के कई जिलों में आर्सेनिक व फ्लोरायड की मात्रा तय मानक से अधिक है। फोटो: मीता अहलावत

अनिल सिन्दूर

देश के सबसे बड़े सूबे उत्तर प्रदेश के 63 जिलों के भूजल में मानक से अधिक फ्लोराइड, 25 जिलों के भूमिगत जल में आर्सेनिक तथा 18 जिलों के भूजल में फ्लोराइड एवं आर्सेनिक दोनों मानक से कई गुना अधिक है। यह खुलासा वाटर एण्ड सेनिटेशन मिशन, उप्र द्वारा दिए गए एक आरटीआई के जबाव से हुआ है। पीने के पानी में मानक से अधिक फ्लोराइड तथा आर्सेनिक आने से गंभीर बीमारी के खतरे बढ़ गये हैं। जियोग्राफिकल क्वालिटी टेस्टिंग सर्वे रिपोर्ट की भयावता को देखते हुये जिस रिपोर्ट को पोर्टल के माध्यम से सार्वजनिक होना था उसे आज तक नहीं किया गया।

केंद्र सरकार ने पीने के पानी की गुणवत्ता को ध्यान में रखते हुए वर्ष 2015-16 में 150 करोड़ की धनराशि वाटर एण्ड सेनिटेशन मिशन, उप्र को दी, जिससे वह उप्र के प्रत्येक गांवों, कस्बों एवं शहरों के पीने के पानी के स्रोतों की जियोग्राफिकल क्वालिटी टेस्टिंग सर्वे करवाये और इस रिपोर्ट को पोर्टल के माध्यम से सार्वजानिक करे। केंद्र सरकार ने यह भी आदेश दिया कि इस रिपोर्ट की एक हार्ड तथा सॉफ्ट  कापी जनपदों के जिला विकास अधिकारी को भी दी जाए, जिससे वे भी अपने स्तर पर कारगर उपाय कर सकें।

वाटर एण्ड सेनिटेशन मिशन उप्र ने दो एजेंसियों को इस कार्य को सौंपा, जिसमें एक एडीसीसी इंफोकेड प्राइवेट लिमिटेड, नागपुर थी। एजेंसियों ने अपनी सर्वे रिपोर्ट की हार्ड कॉपी प्रदेश के सभी जनपदों के मुख्य विकास अधिकारी को दी तथा सॉफ्ट कॉपी वाटर एण्ड सेनिटेशन मिशन उप्र को दी। इस सर्वे रिपोर्ट के अनुसार 63 जनपदों में फ्लोराइड की मात्रा 3 पीपीएम तक पाई गई है, जबकि 25 जनपदों में आर्सेनिक की मात्रा 1 पीपीएम तक है। जनपदों के विकास अधिकारियों को सर्वे रिपोर्ट का 60 प्रतिशत सत्यापन अपने स्तर पर करवाना था, लेकिन अधिकतर जनपदों में यह सर्वे रिपोर्ट आज तक अलमारियों में बन्द है। सर्वे रिपोर्ट को राज्य पेयजल एवं स्वच्छता मिशन को सॉफ्ट कॉपी का उपयोग करते हुये पोर्टल तैयार करना था लेकिन पोर्टल भी तैयार नहीं किया जा सका।

भारतीय मानक ब्यूरो के अनुसार पीने के पानी में फ्लोराइड की वांछनीय मान्य सीमा 1.0 पीपीएम तथा अधिकतम मान्य  सीमा 1.5 पीपीएम तथा आर्सेनिक की मान्य सीमा 0.01 पीपीएम तथा अधिकतम मान्य सीमा 0.05 पीपीएम है। वाटर एण्ड सेनिटेशन मिशन, उप्र ने आरटीआई में जानकारी दी है कि फ्लोराइड से प्रभावित जिलों में अधिकतम 3 पीपीएम तक है। पीने के पानी में मानक से अधिक फ्लोराइड से घातक रोग फ्लोरोसिस हो जाता है जो दन्त क्षरण, जोड़ों में अकड़न तथा हड्डियों में मुड़ाव ला देता है। इसी तरह पीने के पानी में मानक से अधिक 1 पीपीएम आर्सेनिक है, जो त्वचा रोग एवं कैंसर देता है। फ्लोराइड तथा आर्सेनिक प्रभावित बस्तियों में नागरिकों पर पड़े प्रभावों तथा परिणामों का मूल्यांकन मिशन के स्तर से तो कराया ही नहीं गया स्वास्थ्य मंत्रालय ने भी इस सर्वे रिपोर्ट पर कोई कार्य नहीं किया।

संवाददाता द्वारा मांगी गई आरटीआई से मिली जानकारी की सूचना रजिस्टर्ड डाक द्वारा प्रधानमन्त्री नरेंद्र मोदी को भेजी गई। प्रधानमंत्री कार्यालय ने इस सूचना को शिकायत मानते हुये मुख्यमंत्री जनसुनवाई पोर्टल पर निस्तारण को प्रेषित कर दी, जबकि मुख्यमंत्री जनसुनवाई पोर्टल पर शिकायत को सन्दर्भ संख्या 6000190107115 दिया गया। प्रधानमंत्री कार्यालय से भेजी गई शिकायत को तीन माह बाद बिना समझे, बिना पढ़े ही कानपुर नगर से निस्तारित कर दिया गया।

उत्तर प्रदेश के फतेहपुर के गांव चौहट्टा निवासी पवन फ्लरोसिस से पीड़ित हैं। उनकी मां व बहन की मौत का कारण भी फ्लरोसिस बताया गया है। फोटो: अनिल सिन्दूर

नीति आयोग की रिपोर्ट के अनुसार देश की 84 प्रतिशत आबादी को सुरक्षित नलों से घरों तक पानी उपलब्ध नहीं कराया जाता है। पीने का 90 प्रतिशत पानी हेंडपम्प या सबमर्शिबल के माध्यम से जमीन के अन्दर से ही लिया जाता है। अतिदोहन के चलते भूमिगत जलस्तर ख़त्म होने की कगार पर पहुंच गया है, जिसके परिणाम स्वरुप पानी में ऐसे तत्व आ रहे हैं जो मानक से अधिक हैं।

फ्लोराइड प्रभावित जिलों की सूची– आगरा, अलीगढ़, अम्बेडकर नगर, अमेठी, औरैया, बागपत, बहराइच, बलरामपुर, बाँदा, बाराबंकी, बिजनौर, बदायूं, बुलंद शहर, चन्दौली, चित्रकूट, एटा, इटावा, फैज़ाबाद, फर्रुखाबाद, फतेहपुर, फ़िरोज़ाबाद, गौतम बुद्ध नगर, गाज़ियाबाद, गाज़ीपुर, गोंडा, हमीरपुर, हापुड़, हरदोई, जालौन, जौनपुर, झाँसी, ज्योतिबाफुलेनगर, कन्नौज, कानपुर देहात, कानपुर नगर, कासगंज, कौशाम्बी, लखीमपुर खीरी, ललितपुर, लखनऊ, महामायानगर, महाराजगंज, महोबा, मैनपुरी, मथुरा, मेरठ,  मिर्ज़ापुर, मुज़फ्फरनगर, प्रतापगढ़, रायबरेली, रामपुर, सहारनपुर, संभल, संतकबीर नगर, संतरविदास नगर, शाहजहाँपुर, शामली, श्राबस्ती, सीतापुर, सोनभद्र, सुल्तानपुर, उन्नाव तथा  वाराणसी।

आर्सेनिक प्रभावित जिलों की सूची– अलीगढ़, आजमगढ़, बहराइच, बलिया, बाराबंकी, देवरिया, फैज़ाबाद, गाज़ीपुर, गोंडा, गोरखपुर, जौनपुर, झांसी, ज्योतिबाफुले नगर, कुशीनगर, लखीमपुर खीरी, लखनऊ, महाराजगंज, मथुरा, मिर्ज़ापुर, पीलीभीत,  संतकबीर नगर, शाहजहाँपुर, सिद्धार्थ नगर, सीतापुर तथा उन्नाव।

आर्सेनिक तथा फ्लोराइड दोनों से प्रभावित जिलों की सूची- अलीगढ़, बहराइच,  बाराबंकी, फैज़ाबाद, गाज़ीपुर, गोंडा, जौनपुर, झाँसी, ज्योतिबाफुलेनगर, लखीमपुर खीरी, लखनऊ, महाराजगंज, मथुरा, मिर्ज़ापुर,  संतकबीर नगर, शाहजहाँपुर,  सीतापुर तथा  उन्नाव।