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134 मीटर से ऊपर पहुंचा सरदार सरोवर बांध का जलस्तर, 19 गांव और डूबे

सरदार सरोवर बांध का जलस्तर बढ़ने से जिन गांवों में पानी घुस आया है, वहां के ग्रामीणों ने गांव में ही सत्याग्रह शुरू कर दिया है

On: Thursday 05 September 2019
 
सरदार सरोवर बांध का जल स्तर बढ़ने के बाद गांव डूबने के विरोध में सत्याग्रह करते हुए गांव कड़माल के लोग। फोटो: रहमत
सरदार सरोवर बांध का जल स्तर बढ़ने के बाद गांव डूबने के विरोध में सत्याग्रह करते हुए गांव कड़माल के लोग। फोटो: रहमत सरदार सरोवर बांध का जल स्तर बढ़ने के बाद गांव डूबने के विरोध में सत्याग्रह करते हुए गांव कड़माल के लोग। फोटो: रहमत

डूब प्रभावित गांव से रहमत की रिपोर्ट

बुधवार देर रात सरदार सरोवर बांध में जल स्तर 134 मीटर से ऊपर जाने के कारण मध्य प्रदेश के बड़वानी जिले के 19 गांवों में पानी घुस गया है। इस कारण इन 19 गांवों में स्थानीय ग्रामीणों ने अपने-अपने घरों से ही धरना प्रदर्शन करना शुरू कर दिया है। 

बुधवार को बढ़े जल स्तर से पिछोड़ी, अवल्दा, बिजासन, मोरकट्टा, कुली, घोंघसा, भवती, देहदला, बगूद, पिपलुद, सेगांवा, छोटा बड़दा, निसरपुर, कड़माल, बाजरी खेड़ा, खापरखेड़ा, निसरपुर,  चिखल्दा, कवठी, एक्कलबारा आदि गांव डूबने लगे हैं। 

ग्रामीणों का आरोप है कि गुजरात सरकार नियमों का उल्‍लंघन करते हुए बांध का जलस्‍तर बढ़ा रही है। जलस्तर को लेकर मध्य प्रदेश सरकार की ओर से नर्मदा नियंत्रण प्राधिकरण (एनसीए) की एक बैठक बुलाने का आग्रह किया गया था, 21 अगस्‍त 2019 को एनसीए की बैठक होनी थी, लेकिन केन्‍द्र सरकार ने एक दिन पहले इस बैठक को स्थगित कर दिया। 

उधर, कड़माल और उससे लगे खापरखेड़ा और बाजरीखेड़ा के करीब 100 घरों में पानी घुस गया है। ग्रामीणों का कहना है कि 2017 में कड़माल के 19 मकानों का सर्वे किया गया था, लेकिन उनके मुआवजे की गणना 2012 की दर से की गई। इसलिए कड़माल के कई परिवारों ने मुआवजा स्वीकार नहीं किया। छोटा बड़दा में भी ग्रामीण नए भू-अर्जन कानून के अनुसार मुआवजे की मांग कर रहे हैं।

कड़माल में सत्याग्रह कर रह रहे ग्रामीणों की मांग है कि जब तक पुनर्वास का इंतजाम नहीं हो जाता, तब तक बांध का जलस्तर बढ़ने से रोका जाए।

गांव चिखल्दा में घुसा पानी। फोटो- रहमत

उधर, इस मामले में पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह की चुप्पी बहुत ही हैरत करने वाली है। उन्होंने ही पहले 15,946 परिवारों को बैकवाटर लेवल के नाम पर डूब से बाहर कर अधिकारों से वंचित किया था। उसके बाद शेष प्रभावितों को भी वंचित करने हेतु सर्वोच्च न्यायालय में झूठे आंकड़े पेश करते हुए पुनर्वास का “जीरो बेलेंस” घोषित कर दिया था।