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फरक्का बराज: डिजाइन बदलने से निकल जाएगा बाढ़ का समाधान?

फरक्का बराज की संरचना में बदलाव पर बिहार-बंगाल सहमत हो गए हैं, लेकिन इससे क्या गंगा की अविरलता सुनिश्चित हो पाएगी

By Pushya Mitra

On: Thursday 05 March 2020
 
Photo credit: Flickr
Photo credit: Flickr Photo credit: Flickr

गंगा नदी पर पश्चिम बंगाल में स्थित फरक्का बराज की संरचना में बदलाव पर बिहार और बंगाल के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और ममता बनर्जी सहमत हो गये हैं। इस बारे में जानकारी देते हुए बिहार के जल संसाधन मंत्री संजय कुमार झा ने 4 मार्च को विधानसभा में बताया कि भुवनेश्वर में हुई पूर्वी क्षेत्रीय परिषद की बैठक में मुख्यमंत्री नीतिश कुमार और बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के बीच फरक्का के रेट्रो-फिटिंग और डिजाइन में बदलाव को लेकर सहमति बनी है। इससे उम्मीद जताई जा रही है कि केंद्र सरकार इस दिशा में काम शुरू करेगी। मगर सवाल यह है कि क्या इससे बिहार की बाढ़ की समस्या का समाधान हो पाएगा।

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बिहार सरकार लंबे समय से फरक्का बराज को हटाये जाने की मांग करती रही है, क्योंकि फरक्का बराज के पास भारी मात्रा में गाद जमा होने से राज्य से गुजरने वाली गंगा नदी का प्रवाह काफी धीमा हो जाता है। इसी वजह से राज्य के कई जिलों में अक्सर बाढ़ जैसी स्थिति उत्पन्न हो जाती है। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार बार-बार केंद्र सरकार से फरक्का बराज के डिकमीशन की मांग करते रहे हैं। जबकि बंगाल सरकार इसका विरोध करती रही है।

डाउन टू अर्थ ने जब बिहार के जल संसाधन मंत्री से संपर्क किया तो उन्होंने अपने विभाग के एक अधिकारी को इस मसले पर बात करने के लिए अधिकृत कर दिया। अधिकारी ने बताया कि फरक्का बराज की वजह से जमा होने वाले अत्याधिक गाद के कारण बिहार में बाढ़ की समस्या होती है। अब केंद्र सरकार के सेंट्रल वाटर कमीशन को देखना होगा कि किस तरह के संरचनात्मक सुधार से फरक्का बराज से होकर गंगा के बहाव को बेहतर किया जा सके।

वहीं जल संसाधन विभाग के तकनीकी सलाहकार इंदुभूषण कुमार ने बताया कि फरक्का बराज को लेकर बनी विभिन्न समितियों के आंकड़ों के मुताबिक वहां हर साल 400 मिलियन टन सिल्ट जमा होता है। इस वजह से सभी गेट खोल देने पर भी बहाव की गति कम ही रहती है। उन्होंने बताया कि फरक्का बराज जब बना था, तब इससे होकर 76 हजार क्यूमेक जल प्रवाह की व्यवस्था थी, जो लगातार गाद जमा होने के कारण काफी घट गयी है। जबकि पटना के गांधी सेतु से होकर ही 90 हजार क्यूमेक जल प्रवाह की व्यवस्था है। इसलिए हमलोग लगातार फरक्का के जल प्रवाह को बढ़ाये जाने की मांग करते रहे हैं। अगर किसी बदलाव से वहां 117 हजार क्यूमेक प्रवाह सुनिश्चित हो जाये तो स्थिति काफी बेहतर हो सकती है। यह हमारी पुरानी मांग रही है।

हालांकि जल विशेषज्ञ इसे अस्थायी समाधान मानते हैं। उन्हें लगता है कि इस व्यवस्था से कुछ सालों के लिए जरूर राहत मिल जाय,गी, मगर बिहार की बाढ़ की समस्या का यह स्थायी समाधान नहीं होगा। बिहार में पानी के मसले पर लगातार काम करने वाले विशेषज्ञ रंजीव कहते हैं, हमारी मांग गंगा के अविरलता की है। एक तो बराज की संरचना में वे किस तरह का बदलाव सोच रहे हैं, यह हमें मालूम नहीं। किसी भी तरह के बदलाव से समस्या का स्थायी समाधान नहीं निकलेगा। जब तक फरक्का में बराज रहेगा, गंगा के प्रवाह में रुकावट बनी रहेगी। वे सवाल उठाते हुए कहते हैं, कल तक फरक्का बराज के डिकमीशन की मांग करने वाले मुख्यमंत्री नीतीश कुमार आज बराज की संरचना में बदलाव पर कैसे सहमत हो गये? इस समझौतावादी रुख से बिहार की नदियों के प्रवाह का भला नहीं होने वाला।