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लॉकडाउन से यमुना को कितनी मिली राहत, डीपीसीसी ने जारी की रिपोर्ट

दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति दिल्ली से गुजरने वाली यमुना में नौ जगहों से नमूने उठाए और इनकी तुलना पिछले साल के अप्रैल माह से की है

On: Tuesday 21 April 2020
 
लॉकडाउन के बाद खिंची गई यमुना की तस्वीर। फोटो: विकास चौधरी
लॉकडाउन के बाद खिंची गई यमुना की तस्वीर। फोटो: विकास चौधरी लॉकडाउन के बाद खिंची गई यमुना की तस्वीर। फोटो: विकास चौधरी

पार्थ कबीर


लॉकडाउन के चलते तमाम गतिविधियों पर लगी रोक से यमुना को भी राहत की सांस मिली है। दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति की हालिया रिपोर्ट के मुताबिक यमुना का पानी पिछले साल अप्रैल महीने की तुलना में काफी हद तक साफ हुआ है। समिति ने दिल्ली से गुजरने वाली यमुना में नौ जगहों से नमूने उठाए थे। इन नौ में से चार जगहों पर पानी में बीओडी (बायोकेमिकल ऑक्सीजन डिमांड) में 18 से लेकर 33 फीसदी तक की कमी आई है। जबकि, यमुना में गिरने वाले नालों का पानी भी पहले की तुलना में साफ हुआ है।

दिल्ली में प्रवेश करने से पहले यमुना नदी अपेक्षाकृत साफ-सुथरी है। लेकिन, यहां पर प्रवेश करने के साथ ही यमुना का पानी बेहद गंदा होने लगता है। यह प्रदूषण इस हद तक है कि नदी के कई हिस्सों में जलीय जीवन का बचे रहना भी संभव नहीं रह गया है। इसी के चलते कुछ लोग यमुना को मृत नदी की संज्ञा भी देने लगे हैं। लेकिन, लॉकडाउन के चलते इंसानी गतिविधियों पर लगी तमाम प्रकार की रोक से यह साबित होता है कि यमुना में इंसानों का हस्तक्षेप अगर कम से कम हो तो नदी का पानी अभी साफ है और यमुना नदी अभी सदानीरा नदी है।

लॉकडाउन के तत्काल बाद यमुना नदी का पानी साफ होने के तमाम दावे किए जा रहे थे। जिसके बाद यमुना निगरानी समिति ने इसकी वास्तविकता की जांच करने के निर्देश दिए थे। इस क्रम में दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति ने दिल्ली में नौ जगहों से यमुना के पानी के नमूने उठाए थे। पानी के नमूनों में प्रदूषण की मात्रा की तुलना पिछले साल अप्रैल के महीने में मौजूद पानी के नमूनों से की गई।

इससे पता लगा है कि दिल्ली में तमाम जगहों पर यमुना के पानी में आक्सीजन की मात्रा में खासा सुधार हुआ है और यहां पर बीओडी के स्तर में कमी आई है। आगरा कैनाल, ओखला ब्रिज पर 33 प्रतिशत, आईटीओ पुल पर 21 प्रतिशत, ओखला बैराज पर 18 प्रतिशत, निजामुद्दीन ब्रिज पर 20 प्रतिशत और कुदेशिया घाट पर पानी में आक्सीजन की मात्रा में पिछले साल की तुलना चार फीसदी तक का सुधार हुआ है। जान लें कि नदी में प्रदूषण के स्तर को बीओडी के स्तर से मापा जाता है।

बायोकेमिकल ऑक्सीजन डिमांड यानी बीओडी आक्सीजन की वह मात्रा है जो किसी माइक्रोआर्गेनिज्म को चाहिए होता ताकि वह किसी आर्गेनिक चीज को (कचरा या प्रदूषक) को डिकंपोस्ट कर सके। इसलिए बीओडी का स्तर ज्यादा होने का मतलब है कि ज्यादा आक्सीजन की जरूरत है। दूसरी ओर, रिपोर्ट यह भी बताती है कि यमुना के पानी में भी इस वर्ष इजाफा हुआ है। पिछले साल अप्रैल के महीने में यमुना में औसतन एक हजार क्यूसेक पानी मौजूद था। जबकि, इस वर्ष अप्रैल के महीने में 3900 क्यूसेक पानी मौजूद है। इससे भी पानी गुणवत्ता में सुधार आया है।

उद्योग बंद होने से आया बदलावः
यमुना के पानी की गुणवत्ता मे आए सुधार के पीछे मुख्य रूप से औद्योगिक गतिविधियों पर लगी रोक को कारण माना जा रहा है। इस रोक के चलते उद्योगों से निकलने वाला कचरा नदियों में नहीं जा रहा है। इससे यमुना नदी पहले की तुलना में साफ हुई है। हालांकि, अभी इसका पानी ज्यादातर जगहों पर पीने और नहाने लायक नहीं है। क्योंकि, लॉकडाउन के समय में भी घरों से निकलने वाले सीवरेज का बड़ा हिस्सा सीधे इसमें जा रहा है। इससे यह स्पष्ट कहा जा सकता है कि औद्योगिक कचरे और घरेलू सीवरेज को यमुना में गिरने से रोक लगाए बिना नदी को साफ नहीं किया जा सकता।