दुनिया भर में खतरनाक कचरे की आवाजाही पर नजर रख रहा है 'वेस्ट वेब'

अध्ययन में कम पर्यावरण प्रदर्शन सूचकांक वाले 28 देशों का पता लगा जो कि कचरे के जमाव से सबसे अधिक खतरे में पाए गए

By Dayanidhi

On: Monday 04 April 2022
 
'वेस्ट वेब' दुनिया भर में खतरनाक कचरे की आवाजाही पर रख रहा है नजर

दुनिया भर में हर साल लगभग 7 से 10 अरब मीट्रिक टन कचरा पैदा होता है। इसमें से लगभग 300 से 500 मीट्रिक टन खतरनाक कचरा है। इतनी बड़ी मात्रा में सामग्री को संभालने के प्रयासों के तहत, कचरे का व्यापार शुरू हुआ। कुछ देश अपने कचरे का कुछ हिस्सा दूसरे देशों में भेजते हैं। उन देशों को इस कचरे को स्वीकार करने के लिए भुगतान किया जाता है और वहां अक्सर इसे संसाधन के रूप में उपयोग किया जाता है।

प्रसंस्करण या उपचारित कचरे से विभिन्न प्रकार की मूल्यवान सामग्री हासिल की जा सकती है, जैसे कि इलेक्ट्रॉनिक्स से सोना निकालना आदि। इस नए प्रयास में शोधकर्ताओं ने कचरे के  व्यापार का अध्ययन किया और उस प्रयास के हिस्से के रूप में, इसे "विश्वव्यापी अपशिष्ट वेब" या "वेस्ट वेब" नाम दिया, क्योंकि यह एक दूसरे से काफी जुड़ा हुआ है। वर्ल्ड वाइड वेस्ट वेब (डब्ल्यू4) कचरे के कानूनी व्यापार द्वारा गठित एक नेटवर्क है।

शोधकर्ताओं की एक टीम ने इसे दुनिया भर में फैले कचरे और इससे संबंधित व्यापार को 'वेस्ट वेब' के रूप में वर्णित किया है। इसका उपयोग दुनिया भर में खतरनाक कचरे की आवाजाही को ट्रैक करने के लिए किया है। टीम उन कारणों की रूपरेखा तैयार करती है जो अपशिष्ट वेब के द्वारा दुनिया भर में खतरनाक सामग्रियों की आवाजाही किस तरह हो रही है। इस प्रणाली को स्पेन में इंस्टीट्यूट ऑफ इंटरडिसिप्लिनरी फिजिक्स एंड कॉम्प्लेक्स सिस्टम्स के शोधकर्ताओं ने विकसित किया है।

अपशिष्ट वेब और अधिक विशेष रूप से खतरनाक अपशिष्ट व्यापार पर एक बेहतर परिप्रेक्ष्य हासिल करने के लिए, उन्होंने 2001 से 2019 के सालों में दुनिया भर के देशों से एकत्र किए गए आंकड़ों का उपयोग किया। आंकड़ों की मदद से इसकी विशेषताओं का वर्णन करने के लिए एक गणितीय मॉडल बनाया।

उन्होंने पाया कि अध्ययन की अवधि के दौरान बेसल कन्वेंशन समझौतों का पालन करने वाले देशों से 1.4 मिलियन मीट्रिक टन से अधिक खतरनाक कचरे की जानकारी हासिल हुई। उन्होंने गौर किया कि इस तरह के कचरे की एक अज्ञात मात्रा को भी अवैध रूप से डंप किया गया था।

शोधकर्ताओं ने यह भी पाया कि वे अपने मॉडल का उपयोग उन देशों की पहचान करने के लिए कर सकते हैं जो खतरनाक कचरे का आयात और निर्यात कर रहे थे। उन्होंने कम पर्यावरण प्रदर्शन सूचकांक वाले 28 देशों का पता लगाया जो कि कचरे के जमाव के सबसे अधिक खतरे में पाए गए थे।

ये देश सामग्रियों को सही तरीके से संचालित नहीं कर रहे हैं। ऐसी स्थितियों से उन लोगों के लिए पर्यावरण और स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं होने की आशंका जताई गई है जो डंपिंग साइटों के पास रहते हैं। शोधकर्ताओं ने निष्कर्ष निकाला है कि उनके मॉडल का उपयोग आने वाले वर्षों में अन्य लोगों द्वारा वैश्विक अपशिष्ट मुद्दों का आकलन करने के लिए किया जा सकता है। यह शोध नेचर कम्युनिकेशंस जर्नल में प्रकाशित हुआ है।

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